भारत–चीन सीमा विवाद की पूरी कहानी: असली वजह क्या है?

भारत–चीन सीमा विवाद की पूरी कहानी: असली वजह क्या है?

भारत और चीन—दो प्राचीन सभ्यताएँ है, भारत से चीन का सम्बन्ध न केवल व्यापारिक ही रहा बल्कि सांस्कृतिक भी रहा है चीन में बौद्ध धर्म भरता से ही गया हुआ है। वर्तमान में चीन और भारत दोनों ही एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है।

दोनों की विवाद का कारण मात्र सीमा का अस्पस्टीकरण

यह विवाद केवल जमीन का नहीं, बल्कि रणनीति, सुरक्षा और प्रभुत्व का है।

सीमा विवाद की शुरुआत कहाँ से हुई?

आजादी के बाद सीमा का अस्पष्ट न होना 

भारत–चीन सीमा लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा आज भी स्पष्ट रूप से सीमांकित नहीं है। ब्रिटिश काल में बनी मैकमोहन रेखा को चीन कभी स्वीकार नहीं करता है और न ही भारत।

India china conflict


जहां एक ओर चीन भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को भी अपना हिस्सा मानता है वहीं भारत का मानना है कि चीन की सीमा भारत से मिलती ही नहीं क्योंकि दोनों देस के बीच तिब्बत एक स्वायत्त देश था। दोनों देशों का दावा इतिहास के सन्दर्भ से है।

1962 का युद्ध: निर्णायक मोड़

1962 का युद्ध भारत के लिए एक बड़ा झटका था। इस युद्ध से पहले भारत और चीन एक मित्र देश हुआ करते थे। परंतु भू राजनीति के महत्वकांक्षा के चलते चीन ने भारत से युद्ध किया फलस्वारूप चीन ने अक्साई चिन पर नियंत्रण मजबूत किया दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास पैदा हुआ

आज भी तनाव क्यों?

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) आज भी स्पष्ट नहीं है 

चीन द्वारा करोना के समय में भारत के सीमा पर की गयी गतिविधियों ने दोनों का टकराव की शुरुआत किया।दोनों देशों की सैन्य गश्त आमने-सामने आती रहती है इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को लेकर दोनों देशों का आपस में संदेह बढ़ाने का कारण है। 

व्यापार बनाम टकराव

दोनों देश एक दूसरे के व्यापार पर प्राचीन काल से ही निर्भर है आज भी वस्तुतः वही स्थिति है।भले ही चीन एक दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब है जिसका कारण है डालर को fyat करेंसी बनाए रखना। परंतु भारत ही बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था और एक बड़ा बाजार है।

जिसके कारण चीन और भारत सीधे युद्ध में नहीं जा रहे हैं। दूसरा कारण चीन की घटती जनसंख्या और अमेरिका का चीन से बढ़ता असहयोग का संबंध 

क्या यह टकराव जारी रहेगागा?

उत्तर है नहीं कारण इसका यह है की अमेरिका से सम्बन्ध खराब होने से चीन को बाजार की आवश्यकता है जो केवल भारत के द्वारा ही पूरा किया जा सकता है।

दूसरा कारण है चीन की बुजुर्ग और घटती हुई जनसंख्या जो अब आने वाले समय में निष्क्रिय हो जाएंगी। घटती हुई जनसंख्या के कारण है one child policy।

तीसरा कारण है अमेरिका और चीन दोनों में सम्बन्ध खराब होना। अब चीन को न तो अमेरिका से टेक्नोलॉजी मिलने वाली है और न ही अमेरिकी बाजार। अतः भारत ही चीन का एक मात्र आशा है।

यहां एक दम से सीमा विवाद खत्म नहीं होगा, सीमा विवाद जारी रहेगा परंतु सम्बन्ध भी साथ में चलते रहेंगे।

सवाल: 

क्या भारत को चीन के साथ सख्त रुख अपनाना चाहिए या कूटनीति जारी रखनी चाहिए?

उत्तर: 

कूटनीतिक सख्त रुख अर्थात दोनों का मिश्रण 

सवाल: 

क्या भारत और चीन मित्र हो सकते हैं?

उत्तर: 

 हां परंतु उसमें अभी समय है। कारण चीन की घटती जनसंख्या जिसके कारण चीन अपने दरवाजे भारतीय निवासियों के लिए खोलेगा 

निष्कर्ष

भारत–चीन सीमा विवाद का समाधान आसान नहीं है, लेकिन संवाद और संतुलन ही एकमात्र रास्ता है।

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