Petrodollar system vs US Treasury bonds – global financial stability analysis
Caption: सऊदी अरब, तेल और डॉलर प्रणाली का भविष्यवैश्विक अर्थव्यवस्था में पिछले कुछ दशकों से एक शब्द ने सबसे अधिक सुर्खियां बटोरी हैं 'पेट्रोडॉलर'।
हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ न्यूज़ पोर्टल्स पर यह दावा किया गया कि सऊदी अरब और अमेरिका के बीच 50 साल पुराना पेट्रोडॉलर समझौता समाप्त हो गया है, जिससे डॉलर के प्रभुत्व का अंत निश्चित है।
लेकिन क्या यह वाकई सच है? क्या रियाद अपनी तेल संपदा के लिए केवल डॉलर पर निर्भरता कम कर रहा है, या हम वैश्विक वित्तीय ढांचे में एक बुनियादी बदलाव (Structural Shift) देख रहे हैं?
इस विस्तृत विश्लेषण में हम डेटा, वैश्विक नीतियों और भू-राजनीतिक समीकरणों के माध्यम से यह समझेंगे कि तेल व्यापार और डॉलर का भविष्य किस दिशा में जा रहा है।
पेट्रोडॉलर का अर्थ: Pricing vs Settlement vs Recycling
अक्सर लोग 'पेट्रोडॉलर' को एक औपचारिक संधि समझ लेते हैं, जबकि यह एक आर्थिक व्यवस्था है। इसे तीन चरणों में समझना आवश्यक है:
Pricing (मूल्य निर्धारण):
वैश्विक बेंचमार्क जैसे Brent और WTI मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में कोट किए जाते हैं। इसका मतलब है कि तेल की कीमत प्रति बैरल डॉलर में तय होती है। [Source: https://www.atlanticcouncil.org/blogs/econographics/is-the-end-of-the-petrodollar-near/]
Settlement (भुगतान):
यह वह प्रक्रिया है जिसमें तेल खरीदने वाला देश विक्रेता को भुगतान करता है। परंपरागत रूप से यह डॉलर में होता रहा है, लेकिन अब इसमें अन्य मुद्राओं (जैसे युआन या रुपया) के विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
Recycling (पुनर्चक्रण):
जब तेल निर्यातक देश (जैसे सऊदी अरब) डॉलर कमाते हैं, तो वे उन डॉलर को अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड, रियल एस्टेट या वैश्विक संपत्तियों में निवेश करते हैं। इसे 'पेट्रोडॉलर रिसाइकिलिंग' कहा जाता है।
Analysis:(विश्लेषण)
पेट्रोडॉलर व्यवस्था केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक बैंकिंग और निवेश प्रणाली की रीढ़ है। यदि सऊदी अरब केवल 'Settlement' बदलता है, तो प्रभाव सीमित होगा, लेकिन यदि 'Pricing' और 'Recycling' बदलती है, तो यह डॉलर के लिए गंभीर चुनौती होगी।
Fact-Check:
क्या सऊदी-अमेरिका 50 साल का पेट्रोडॉलर समझौता खत्म हो गया?
जून 2024 में इंटरनेट पर एक रिपोर्ट वायरल हुई कि 1974 में हुआ 50 वर्षीय 'पेट्रोडॉलर एग्रीमेंट' समाप्त हो गया है और सऊदी अरब ने इसे रिन्यू नहीं किया है।
सच्चाई (Reality Check):
ऐसी कोई औपचारिक "50 साल की समय सीमा" वाली लिखित संधि कभी अस्तित्व में ही नहीं थी जिसे रिन्यू करने की आवश्यकता हो।
1974 में 'US-Saudi Joint Commission on Economic Cooperation' की स्थापना हुई थी, जो मुख्य रूप से आर्थिक सहयोग और सुरक्षा के बदले डॉलर में तेल व्यापार पर आधारित एक अनौपचारिक समझ थी।
निष्कर्ष:
यह दावा कि कोई "एक्सपायरी डेट" वाला समझौता खत्म हुआ है, पूरी तरह से गलत है। सऊदी अरब और अमेरिका के संबंध रणनीतिक रूप से विकसित हो रहे हैं, न कि किसी कॉन्ट्रैक्ट के खत्म होने से बदल रहे हैं।
डेटा के आईने में डॉलर का वैश्विक प्रभुत्व (The Global Reality)
डॉलर के अंत की भविष्यवाणियां नई नहीं हैं, लेकिन डेटा कुछ और ही कहानी बयां करता है:
FX Turnover:
बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के 2022 के डेटा के अनुसार, दुनिया के कुल विदेशी मुद्रा लेनदेन (Foreign Exchange Trades) में **88%** लेनदेन में डॉलर एक तरफ होता है। स्रोत
Global Reserves:
IMF COFER डेटा के अनुसार, 2024 की चौथी तिमाही तक वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी लगभग 58.4% है। तुलना के लिए, चीनी युआन (RMB) की हिस्सेदारी मात्र 2.3% के आसपास है। स्रोत
Trade Invoicing:
फेडरल रिजर्व की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक व्यापार चालान (Invoicing) में डॉलर की हिस्सेदारी लगभग 80% बनी हुई है, जो इसकी तरलता (Liquidity) को दर्शाता है।
Cross-Border Payments:
SWIFT नेटवर्क के माध्यम से होने वाले सीमा पार भुगतान में डॉलर की हिस्सेदारी 47% से 50% के बीच रहती है। स्रोत
Petrodollar collapse narrative and Saudi oil trade reality check
सोशल मीडिया पर ‘पेट्रोडॉलर पतन’ की चर्चा—लेकिन क्या डेटा इस दावे का समर्थन करता है?Myth vs Fact: सऊदी अरब और पेट्रोडॉलर
Myth vs Fact: नीचे दी गई तालिका में सऊदी अरब, पेट्रोडॉलर और डी-डॉलराइजेशन से जुड़े प्रमुख भ्रम और उनकी वास्तविकता को सरल रूप में समझाया गया है।
| विषय | भ्रम (Myth) | वास्तविकता (Fact) |
|---|---|---|
| समझौता | जून 2024 में 50 साल की संधि खत्म हुई। |
कोई आधिकारिक “50 साल की संधि” नहीं थी। Source: https://www.rfa.org/english/news/afcl/afcl-us-saudi-oil-deal-07082024043619.html |
| मुद्रा | सऊदी अब डॉलर में तेल नहीं बेचेगा। | सऊदी अभी भी अधिकांश तेल डॉलर में ही बेचता है। |
| युआन का उदय | युआन जल्द डॉलर की जगह ले लेगा। |
युआन की रिज़र्व हिस्सेदारी 3% से कम है। Source: https://data.imf.org/en/datasets/IMF.STA:COFER |
| डॉलर की वैल्यू | डीडॉलराइजेशन से डॉलर शून्य हो जाएगा। |
डॉलर की liquidity और US bond market depth बहुत मजबूत है। Source: https://www.federalreserve.gov/econres/notes/feds-notes/the-international-role-of-the-u-s-dollar-2025-edition-20250718.html |
निष्कर्ष: वर्तमान डेटा के अनुसार, डॉलर अभी भी वैश्विक तेल व्यापार और मुद्रा भंडार में प्रमुख है। हालांकि वैकल्पिक मुद्राओं पर चर्चा बढ़ी है, लेकिन प्रणालीगत बदलाव धीरे-धीरे ही होता है।
US Treasury bond yields and their role in global oil pricing system
US Treasury यील्ड्स और वैश्विक तेल व्यापार—डॉलर की तरलता और गहराई क्यों अभी भी मजबूत है?5. सऊदी अरब के बदलते संकेत (Saudi Policy Signals)
सऊदी अरब अब अपनी अर्थव्यवस्था को 'Vision 2030' के तहत विविधता दे रहा है। दावोस 2023 में सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान ने कहा था कि रियाद अन्य मुद्राओं में व्यापार करने की चर्चा के लिए खुला है।
Analysis:
यह बदलाव राजनीतिक से अधिक आर्थिक है। चीन सऊदी अरब का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, इसलिए युआन (RMB) में व्यापार करना रियाद के लिए एक व्यावहारिक विकल्प है ताकि वह अपनी मुद्रा टोकरी (Currency Basket) को संतुलित कर सके।
सऊदी-चीन डायनामिक्स और युआन (RMB)
चीन और सऊदी अरब के बीच ऊर्जा संबंध गहरे हो रहे हैं। हालांकि, युआन आधारित तेल व्यापार में कुछ बड़ी चुनौतियां हैं:
1.Convertibility:
युआन पूरी तरह से परिवर्तनीय मुद्रा नहीं है।
2. Pegged Currency:
सऊदी रियाल (SAR) डॉलर के साथ पेग्ड (स्थिर) है। यदि डॉलर कमजोर होता है, तो रियाल पर भी असर पड़ता है।
Reality Check: क्या सच में तेल की कीमतें बदल रही हैं?
यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर है: Invoicing vs Settlement
अधिकांश वैश्विक तेल बेंचमार्क अभी भी डॉलर में मूल्यित (Priced) हैं।
यदि भारत सऊदी अरब से तेल खरीदता है और भुगतान रुपये या रियाल में करता है, तो भी उस तेल की मात्रा और कीमत का आधार डॉलर की तत्कालीन दर ही होती है।
Analysis:
असली 'डी-डॉलरइजेशन' तब होगा जब तेल की कीमत डॉलर के बजाय किसी अन्य मानक (जैसे सोने या युआन के एक बास्केट) में तय होने लगे। वर्तमान में जो हम देख रहे हैं, वह केवल 'भुगतान के माध्यम' (Payment Rails) का विविधीकरण है।
तेल व्यापार से डॉलर को पूरी तरह हटाने के लिए दुनिया को निम्नलिखित बदलावों की आवश्यकता होगी:
Capital Market Depth:
अमेरिका के पास दुनिया का सबसे गहरा और सबसे पारदर्शी ट्रेजरी बॉन्ड मार्केट है। किसी भी अन्य देश (चीन या यूरोप) के पास अभी ऐसा विकल्प नहीं है जहां तेल निर्यातक अपने खरबों डॉलर सुरक्षित निवेश कर सकें।
Trust and Rule of Law:
डॉलर पर विश्वास अमेरिकी न्याय प्रणाली और फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता पर टिका है।
Security Architecture:
मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था अभी भी अमेरिकी सैन्य उपस्थिति पर काफी हद तक निर्भर है।
भारत और एशिया पर प्रभाव (Implications for India/Asia)
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है। 'पेट्रो-रुपया' या स्थानीय मुद्राओं में व्यापार भारत के लिए वरदान साबित हो सकता है:
विदेशी मुद्रा भंडार की बचत:
डॉलर की मांग कम होने से रुपया स्थिर रह सकता है।
Transaction Costs:
डॉलर कन्वर्जन फीस में कमी आएगी।
Energy Security:
रूस के साथ भारत के 'रुबल-रुपया' व्यापार ने यह दिखाया है कि वैकल्पिक भुगतान तंत्र संकट के समय काम आ सकते हैं। स्रोत
भविष्य के 3 संभावित परिदृश्य (3 Scenarios for the Future)
परिदृश्य 1: Status Quo (यथास्थिति)
अगले 10-15 वर्षों तक डॉलर का दबदबा बना रहेगा। चीन और अन्य देश छोटे स्तर पर वैकल्पिक मुद्राओं का उपयोग करेंगे, लेकिन वैश्विक तेल व्यापार का 80%+ डॉलर में ही रहेगा।
परिदृश्य 2:Partial Diversification (आंशिक विविधीकरण)
एक 'बहु-ध्रुवीय मुद्रा प्रणाली' (Multi-polar currency system) उभरेगी। सऊदी अरब जैसे देश चीन को युआन में और भारत को आंशिक रूप से रुपये में तेल बेचेंगे। हालांकि, वैश्विक बेंचमार्क (Pricing) अभी भी डॉलर में ही रहेंगे।
परिदृश्य 3:Structural Shift (संरचनात्मक बदलाव)
यदि अमेरिका अपने डॉलर का उपयोग राजनीतिक हथियार (Sanctions) के रूप में बहुत अधिक करता है, तो दुनिया तेजी से एक वैकल्पिक प्रणाली (जैसे BRICS मुद्रा या गोल्ड-बैक्ड डिजिटल मुद्रा) की ओर बढ़ेगी।
इससे डॉलर की हिस्सेदारी 40% से नीचे गिर सकती है। [Analysis: यह सबसे कम संभावित लेकिन सबसे अधिक प्रभावशाली परिदृश्य है।]
निष्कर्ष: क्या डॉलर का अंत करीब है?
सऊदी अरब और डॉलर के बीच का रिश्ता बदल रहा है, लेकिन यह 'तलाक' नहीं बल्कि एक 'खुला रिश्ता' (Open Relationship) है।
रियाद अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ा रहा है, लेकिन वह डॉलर की तरलता और अमेरिकी सुरक्षा गारंटी को पूरी तरह छोड़ने के जोखिम से वाकिफ है।
डी-डॉलरइजेशन' एक क्रमिक प्रक्रिया (Incremental process) है, कोई रातों-रात होने वाला चमत्कार नहीं।
आपका क्या विचार है? क्या भारत को सऊदी अरब के साथ पूरी तरह से रुपये में व्यापार करने के लिए दबाव डालना चाहिए, या डॉलर की वैश्विक स्थिरता ही हमारे लिए बेहतर है? नीचे कमेंट्स में बताएं।
मुख बिंदु
कोई 50 साल का पेट्रोडॉलर समझौता" खत्म नहीं हुआ है; यह एक इंटरनेट मिथक है।
वैश्विक भंडार में डॉलर अभी भी 58% के साथ सबसे आगे है।
सऊदी अरब व्यापार विविधीकरण (Diversification) कर रहा है, जो एक सामान्य आर्थिक कदम है।
तेल की कीमत और तेल का भुगतान दो अलग चीजें हैं।
FAQs
Q 1.
क्या सऊदी अरब अब डॉलर स्वीकार नहीं कर रहा है?
A
नहीं, सऊदी अरब अभी भी अपने अधिकांश तेल व्यापार के लिए डॉलर ही स्वीकार करता है।
Q 2.
पेट्रोडॉलर व्यवस्था कब शुरू हुई थी?
A
यह 1970 के दशक की शुरुआत में अमेरिका और सऊदी अरब के बीच एक अनौपचारिक सहयोग के रूप में शुरू हुई थी।
Q 3.
युआन डॉलर की जगह क्यों नहीं ले पा रहा है?
A
क्योंकि युआन की पूंजी बाजार तक पहुंच सीमित है और यह पूरी तरह परिवर्तनीय नहीं है।
Q 4.
क्या भारत को इस बदलाव से फायदा होगा?
A
हां, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने से भारत का विदेशी मुद्रा घाटा कम हो सकता है।
Q 5.
डॉलर की वैश्विक हिस्सेदारी कितनी है?
A
विदेशी मुद्रा व्यापार में लगभग 88% और वैश्विक भंडार में 58%।



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