विश्व व्यवस्था में बदलाव की आहट तेज हो चुकी है। BRICS अब केवल एक आर्थिक समूह नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का नया केंद्र बनता दिख रहा है।
क्या विश्व व्यवस्था सच में बदल रही है? क्या अमेरिका केंद्रित यूनिपोलर विश्व अब मल्टीपोलर व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है? पिछले एक दशक में जिस संगठन का नाम सबसे अधिक चर्चा में आया है, वह है BRICS।
BRICS अब केवल एक आर्थिक मंच नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति, वित्तीय संरचना और भू-रणनीति में परिवर्तन का प्रतीक बन चुका है।
ब्रिक्स ग्रुप क्या है
BRICS का गठन 2009 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन द्वारा किया गया था। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद यह BRICS बना।
ब्राजील, रूस, इंडिया और चीन के द्वारा बनाया गया एक ग्रुप जिसमे बाद में साउथ अफ्रीका भी समलित हो गया को ब्रिक्स संगठन के नाम से जाना जाता है।
समय के साथ इसमें विस्तार हुआ और आज इसके सदस्य देश हैं:
वर्तमान ब्रिक्स सदस्य
. ब्राज़ील
2. रूस
3. भारत
4. चीन
5. दक्षिण अफ्रीका
6. सऊदी अरब
7. संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
8. ईरान
9. मिस्र
10. इथियोपिया
BRICS की उपयोगिता पर शुरुआती संदेह
शुरुआत में विश्लेषकों ने BRICS को केवल एक प्रतीकात्मक मंच माना।भारत और चीन के बीच सीमा विवादरूस पर पश्चिमी प्रतिबंध ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका की सीमित सैन्य शक्ति इन कारणों से इसे प्रभावहीन माना गया।
लेकिन समय के साथ परिस्थितियाँ बदलीं।आज ब्रिक्स देश
वैश्विक GDP का लगभग 30% हिस्सा रखते हैं और विश्व की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
क्यों बढ़ रही है BRICS की अहमियत?
1.अमेरिका की आर्थिक चुनौतियाँ:
अमेरिका पर बढ़ता राष्ट्रीय कर्ज और डॉलर पर निर्भर वैश्विक व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है।
भू राजनीति में घटित होने वाली घटनाएं आज के समय में ब्रिक्स संगठन को महत्वपूर्ण बना दिया है। यूनीपोलर विश्व का बादशाह अमेरिका अपनी शक्ति खोता जा रहा। कर्ज के जाल में फंसा अमरीक की मुद्रा डॉलर की वैल्यू गिरती जा रही है।
2. यूक्रेन युद्ध के बाद की स्थिति:
रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों ने कई देशों को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था सुरक्षित है?
3.डॉलर निर्भरता पर पुनर्विचार:
कई देश अब अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोना बढ़ा रहे हैं।
भारत और चीन जैसे देश भी वैकल्पिक भुगतान तंत्र पर काम कर रहे हैं।
देस अपने रिजर्व से डॉलर को हटा रहे हैं और सोना और चांदी को अपने फॉरेंस एक्सचेंज रिजर्व में रख रहे हैं जिसमें ब्रिक्स सदस्य देश चीन और भारत प्रमुख है।
ब्रिक्स की रणनीति
1 . De-dollarization (डॉलर से दूरी)
भारत चीन और रूस सहित अन्य कई देश अपने आपसी व्यापार से डॉलर करंसी को हटकर अपने लोकर करंसी में व्यापार कर रहे है। लोकल करेंसी में व्यापार ब्रिक्स देशों की एक अहम रणनीति है।
BRICS देशों की सबसे चर्चित रणनीति है , आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्रा का उपयोग। भारत-रूस व्यापार में रुपया-रूबलचीन-रूस में युआन सऊदी अरब द्वारा तेल व्यापार में विकल्पों की चर्चा यह पूरी तरह डॉलर विरोध नहीं, बल्कि निर्भरता कम करने की दिशा है।
2 क्षेत्रीय स्वायत्तता पर जोर
BRICS देश पश्चिमी नीतिगत दबाव से हटकर स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर दे रहे हैं।भारत की “रणनीतिकस्वायत्तता”चीन की बेल्ट एंड रोड पहलरूस का यूरेशियन फोकसये संकेत हैं कि विश्व अब एक ध्रुवीय नहीं रहा।
3 सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर जोर
BRICS देशों की सभ्यताएँ प्राचीन हैं।राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक पुनर्स्थापन पर बल दिया जा रहा है।भारत में सांस्कृतिक पुनरुत्थान,चीन का सभ्यतागत राष्ट्रवाद,रूस की पारंपरिक पहचान की राजनीति यह भी एक प्रकार की सॉफ्ट पावर रणनीति है।
ब्रिक्स देशों की लगभग सारी कंट्रीज का एक पुरातन सम्पूर्ण सांस्कृतिक इतिहास रहा है जो पाश्चात्य सभ्यता से प्रभावित हो कर अपनी पहचान खो रही है।
इन देशों ने पुनः अपने सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर बल देना शुरू कर दिया है। जैसे भारत द्वारा राम मंदिर निर्माण, कुम्भ मेले का भव्य आयोजन इसका प्रमाण है
4 सीमा निर्धारण पर revisit
भारत के द्वारा पीओके, चीन द्वारा ताईवान, रूस के द्वारा यूक्रेन पर दावा इस बात को पुष्ट कर रहे हैं। की ब्रिक्स देश विश्वयुद्ध के पश्चात निर्धारित सीमाओं को अस्वीकार कर रहे हैं।
5 वैकल्पिक संस्थाओं का निर्माण:
BRICS ने 2014 में New Development Bank (NDB) की स्थापना की। यह विश्व बैंक और IMF के विकल्प के रूप में देखा जाता है।
BRICS देशों के द्वारा इंटरनेशनल बॉडीज संस्थान का डेवल्यूशन तथा स्व वैल्युएशन संस्थान की स्थापना भी एक रणनीति है।
हंगर इंडेक्स इत्यादि संस्थाओं का अविश्वसनी अकड़े हिंडनवर्ग जैसी संस्थाओं की गिरती साख इसका प्रमुख कारण है।
इसके अलावा:
BRICS Payment System
स्थानीय मुद्रा में ऋणविकासशील देशों के लिए वित्तीय सहयोग।
6.भू-राजनीतिक पुनर्संतुलन
BRICS देशों की नीतियाँ यह संकेत देती हैं कि वे द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद बनी वैश्विक संरचना की समीक्षा चाहते हैं।
UN Security Council सुधार की मांग ग्लोबल साउथ की आवाज़ पश्चिमी इंडेक्स एजेंसियों पर सवाल इस बात का संकेत दे रहे हैं।
BRICS Strategy in Multipolar World
BRICS देशों की रणनीति: डॉलर निर्भरता कम करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ता कदम
BRICS बनाम G7:
बिंदु
BRICS
G7
सदस्य
विकासशील + उभरती अर्थव्यवस्थाएँ
विकसित पश्चिमी देश
रणनीति
बहुध्रुवीय विश्व
नियम आधारित पश्चिमी व्यवस्था
मुद्रा फोकस
डॉलर निर्भरता कम करना
डॉलर केंद्रित
| बिंदु | BRICS | G7 |
|---|---|---|
| सदस्य | विकासशील + उभरती अर्थव्यवस्थाएँ | विकसित पश्चिमी देश |
| रणनीति | बहुध्रुवीय विश्व | नियम आधारित पश्चिमी व्यवस्था |
| मुद्रा फोकस | डॉलर निर्भरता कम करना | डॉलर केंद्रित |
क्या BRICS Anti-West है?
BRICS को अक्सर पश्चिम विरोधी मंच बताया जाता है।
लेकिन आधिकारिक रूप से यह Anti-West नहीं, बल्कि Pro-Multipolar समूह है।
भारत विशेष रूप से संतुलन की नीति अपनाता है।
भारत QUAD में भी है और BRICS में भी यह उसकी बहु-आयामी कूटनीति दर्शाता है।
चुनौतियाँ :
भारत-चीन तनाव:
अगर चुनौतियों की बात की जाए तो सबसे प्रमुख चुनौती में चीन और भारत के बीच सीमा विवाद प्रमुख है। क्या यह खत्म हो जाएगा, हालही की घटनाओं को अध्ययन किया जाए तो अभी यह संभव नहीं दिखता।
परंतु चीन के कुछ प्रमुख ऑफिशियल सदस्यों द्वारा भारत के प्रति सकारात्मक बयान इस दिशा में सकारात्मक परिणाम की आशा जरूर जगाते हैं।
आर्थिक असमानता
ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक असमानताएं एक चुनौती के रूप में दिखती है परन्तु भारत जैसे देश के द्वारा आर्थिक सहयोग उन छोटी अर्थव्यवस्थाओं को प्रदान करना एक सकारात्मक प्रयास प्रतीत होता है।
सदस्य देशों के अलग राजनीतिक सिस्टम
सदस्य देशों के अलग राजनीतिक सिस्टम भी ब्रिक्स की सफलता पर प्रश्न उत्पन करता है, जैसे चीन, रूस में कम्युनिस्ट शासन व्यवस्था, खड़ी देशों में राजशाही और भारत जैसे देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था।
परंतु परस्पर विश्वास और सहयोग इस चुनौती को दूर कर सकता है ।
BRICS की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि यह अपने मतभेदों को कैसे संभालता है।
भविष्य की दिशाअगर BRICS:वैकल्पिक वित्तीय ढांचा मजबूत करता है आपसी व्यापार बढ़ाता है संस्थागत संरचना विकसित करता है तो आने वाले दशक में यह वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल सकता है।
निष्कर्ष
BRICS कोई Anti-West ग्रुप नहीं है,बल्कि Pro-Balance ग्रुप हैऔर भारत इसमें केंद्र की भूमिका में है।
भारत और ब्रिक्स देश द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद स्थापित हर उन मानकों का डेवल्यूशन तथा नए मानक और नियम का निर्धारण मुख्य रणनीति है।
FAQ
Q1. BRICS की स्थापना कब हुई?
A. 2009 में।
Q2. क्या BRICS डॉलर खत्म करना चाहता है?
A. नहीं, लेकिन डॉलर निर्भरता कम करना चाहता है।
Q3. क्या BRICS में भारत की भूमिका मजबूत है?
A. हाँ, भारत संतुलनकारी भूमिका निभाता है।
Q4. BRICS का सबसे बड़ा लक्ष्य क्या है?
A. बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और आर्थिक सहयोग।
आपसे सवाल
आपको क्या लगता है ब्रिक्स एक नए बहुध्रवीय व्यवस्था के निर्माण करने में सफल हो पाएगा। उत्तर कमेंट में जरूर बताइए।
लेखक
प्रभु नाथ
एक स्वतंत्र विश्लेषक
Last updated
22/02/2026


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