ब्रिक्स देशों की राजनीति! और रणनीति क्या यह अमेरिका के खिलाफ है ?

ब्रिक्स देशों की राजनीति और रणनीति क्या है? बदलती बादशाहत !

ब्रिक्स ग्रुप क्या है 

ब्राजील, रूस, इंडिया और चीन के द्वारा बनाया गया एक ग्रुप जिसमे बाद में साउथ अफ्रीका भी समलित हो गया को ब्रिक्स संगठन के नाम से जाना जाता है।

इसकी स्थापना 2009 में हुआ इस में प्रारंभिक रूप से चार सदस्य थे साउथ अफ्रीका के जुड़ जाने से इसके प्रमुख सदस्यों की संख्या पांच हो गई।

ब्रिक्स देस


वर्तमान ब्रिक्स सदस्य 

. ब्राज़ील

2. रूस

3. भारत

4. चीन

5. दक्षिण अफ्रीका

6. सऊदी अरब

7. संयुक्त अरब अमीरात (UAE)

8. ईरान

9. मिस्र

10. इथियोपिया


ब्रिक्स देशों की राजनीति 

ब्रिक्स के प्रारंभिक सदस्यों को देखकर प्रारंभ में ऐसा प्रतीत होता था की इसका भविष्य में कोई उपयोगिता नहीं रहने वाली। जहां भारत और चीन दोनों की परस्पर सम्बन्ध अच्छे नहीं थे तो रूस को पश्चिमी देशों द्वारा एक छोटी अर्थव्यवस्था वाला देश माना जाता था।

साउथ अफ्रीका और ब्राज़ील का आर्थिक और सैन्य दोनों रूप में नगण्य अर्थात पश्चिमी देश के सापेक्ष कम महत्व वाला माना जाता था। परन्तु आज की स्थिति बिल्कुल अलग हो गई है आज ब्रिक्स संगठन की चर्चा भू राजनीति में हर प्लेटफार्म पर हो रही है।

कारण क्या है चर्चा का 

भू राजनीति में घटित होने वाली घटनाएं आज के समय में ब्रिक्स संगठन को महत्वपूर्ण बना दिया है। यूनीपोलर विश्व का बादशाह अमेरिका अपनी शक्ति खोता जा रहा। कर्ज के जाल में फंसा अमरीक की मुद्रा डॉलर की वैल्यू गिरती जा रही है।

देस अपने रिजर्व से डॉलर को हटा रहे हैं और सोना और चांदी को अपने फॉरेंस एक्सचेंज रिजर्व में रख रहे हैं जिसमें ब्रिक्स सदस्य देश चीन और भारत प्रमुख है।

ब्रिक्स की रणनीति 

1 आपसी व्यापार में से डॉलर को निकलना 

भारत चीन और रूस सहित अन्य कई देश अपने आपसी व्यापार से डॉलर करंसी को हटकर अपने लोकर करंसी में व्यापार कर रहे है। लोकल करेंसी में व्यापार ब्रिक्स देशों की एक अहम रणनीति है।

2 क्षेत्रीय स्वायत्तता पर जोर

ब्रिक्स देशों की अहम रणनीत में एक रणनीति यह है कि वह usa के दिशा निर्देष को पालन करने की जगह अपनी स्वायत निति का पालन कर रहे हैं और क्षत्रिय संगठन को मजबूत करने पर बल दे रहे हैं।

3 सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर जोर 

ब्रिक्स देशों की लगभग सारी कंट्रीज का एक पुरातन रिच सांस्कृतिक इतिहास रहा है जो पाश्चात्य सभ्यता से प्रभावित हो कर अपनी पहचान खो रही है।

इन देशों ने पुनः अपने सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर बल देना शुरू कर दिया है। जैसे भारत द्वारा राम मंदिर निर्माण, कुम्भ मेले का भव्य आयोजन इसका प्रमाण है 


4 सीमा निर्धारण पर revisit 

भारत के द्वारा पीओके, चीन द्वारा ताईवान, रूस के द्वारा यूक्रेन पर दावा इस बात को पुष्ट कर रहे हैं। की ब्रिक्स देश विश्वयुद्ध के पश्चात निर्धारित सीमाओं को अस्वीकार कर रहे हैं।

5 इंडेक्स जारी करने वाली संस्थान,UN जैसे संस्थान का डेवल्यूशन 

BRICS देशों के द्वारा इंटरनेशनल बॉडीज संस्थान का डेवल्यूशन तथा स्व वैल्युएशन संस्थान की स्थापना भी एक रणनीति है।
हंगर इंडेक्स इत्यादि संस्थाओं का अविश्वसनी अकड़े हिंडनवर्ग जैसी संस्थाओं की गिरती साख इसका प्रमुख कारण है।

निष्कर्ष 

BRICS कोई Anti-West ग्रुप नहीं है,बल्कि Pro-Balance ग्रुप हैऔर भारत इसमें केंद्र की भूमिका में है।

भारत और ब्रिक्स देश द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद स्थापित हर उन मानकों का डेवल्यूशन तथा नए मानक और नियम का निर्धारण मुख्य रणनीति है।

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