G20 में भारत की भूमिका? भारत का कद बढ़ाने वाला मंच 2023

क्या जी -20, 2023 ने भारत के कद को बढ़ाया?G-20 में भारत की भूमिका 

जी 20 क्या है? जी 20 का इतिहास 

G20 विश्व के 20 देशों का संगठन है जो आर्थिक रुप से अन्य देशों से सम्पन्न है। यह सगठन की कुछ term और condition है जो इस संगठन में सदस्यता ग्रहण करने के लिए अनिवार्य है।

G 20 का स्थापना 1999 में 19 देश और यूरोपी देशों ने मिलाकर की, विश्व के 60 प्रतिशत से अधिक और अबादी के दो तिहाई हिस्सा है।

जी 20के सदस्य देश 

अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU)।

G 20 का उद्देश्य: 

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय स्थिरता, सतत विकास, जलवायु परिवर्तन, व्यापार, ऊर्जा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार-विरोध जैसे मुद्दों पर चर्चा करना।

अध्यक्षता: 

G20 की अध्यक्षता प्रतिवर्ष बदलती रहती है  2023 में भारत ने अध्यक्षता की, जिसके तहत 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' का नारा दिया गया। 2024 में ब्राजील और 2025 में दक्षिण अफ्रीका अध्यक्ष है।

2023 भारत की अध्यक्षता और भारत की भूमिका 

भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुआ 2030 का जी 20 भविष्य की भू राजनीति की आधार शीला थी साथ ही भारत की भू रणनीति का आगाज।



2023 में संपन्न हुआ सम्मेलन कई मामलों में भिन्न था अफ्रीकिय महा संघ का इस ग्रुप में आमंत्रण भारत की एक रणनीतिक muve था जिसका परिणाम दीर्घकालीन होगा।

भारत द्वारा अफ़्रीकी महासंघ को जी 20 में जोड़ना भारत और अफ्रीकिय राष्ट्रों से संबंध को विस्तार देगा साथ ही भारत को अफ्रीका महाद्वीप में पैर फैलाने का मौका देगा।

जी 20 की मेजबानी ने सिद्ध करने के मौका दिया की भारत न केवल प्रभुत्व सम्पन्न देश है बल्कि एक जिम्मेदार राष्ट्र जो मूल्यों और नियमो को प्रमुखता देता है। अफ़्रीकी महाद्वीप को जुड़ने से यह 21 देशों का समूह बन गया है।

जी-20 की अध्यक्षता में भारत निम्न विषय  केंद्र में था ।

जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए सतत विकास

जलवायु परिवर्तन एक महत्वपूर्ण कारक है पर्यावरण का परन्तु विकास भी जरूरी है राष्ट्र और समाज के लिए। किसी एक देस के ऊपर सारी जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। कार्बन उत्सर्जन केवल विकासशील देशों के लिए ही अनिवार्य नहीं होना चाहिए।

बल्कि विकसित देशों को प्रमुख रूप से इसमें नेतृत्व करना होगा। हालांकि जलवायु परिवर्तन के सबसे बड़े ध्वजवाहक अमेरिका ने आने वाले समय में कार्बन उत्सर्जन को बढ़ाने का निर्णय तथा मैन्यूफेक्चरिंग बढ़ने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश शुरू कर दिया है 

ऐसा प्रतीत होता है कि जलवायु परिवर्तन एक भुला बिसरा मुद्दा बन कर रह जायेगा।

डिजिटल अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी

भारत एक बड़ा खिलाड़ी वर्तमान समय में बन चुका है जो डिजिटल लेन देन के क्षेत्र में नित्य नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

भारत का ( UPI) payment system ने भारतीय लेन देन की आदतों को बदल डाला है। अब तो विश्व के कई देश भी इस सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं।

बदलते हुए समय ने यह साबित कर दिया है कि डिजिटल करंसी ही भविष्य है बैंकिंग व्यवस्था का और भारत इसमें नेतृत्व करेगा।

ग्लोबल साउथ का नेतृत्व 

जी 20 की अध्यक्षता में विकासशिला की आवाज बनकर भारत ने ग्लोबल साउथ का नेतृत्व क्षमता का दावा को साबित किया है। वैक्सीन डिप्लोमेसी से इसकी शुरुआत पहले से ही हो गई थी।

क्षेत्रीय गुटों से दूरी 

अमेरिका द्वारा लाख जी 20 को चीन विरोधी गुट के रूप में बढ़ावा देने का प्रयास को भारत ने बल नहीं देने दिया। यह भारत का एक होशियार कदम था।

निष्कर्ष 

2023 की जी20 का नेतृत्व ने भारत को अपनी मेहमान नवाजी, नेतृत्व क्षमता, विकासशील देशों की आवाज के रूप में स्थापित होने का मौका दिया। 

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लेखक 

प्रभु नाथ 

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