न्याय सेतु ऐप: क्या अब कोर्ट जाने की जरूरत कम हो जाएगी?

भारत में डिजिटल न्याय प्रणाली और e-Courts प्रोजेक्ट

भारत में डिजिटल न्याय प्रणाली और e-Courts प्रोजेक्ट
भारत में न्यायालयों के डिजिटलीकरण के तहत e-Courts प्रोजेक्ट न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुलभ बना रहा है।


भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में न्याय तक पहुँच को मौलिक अधिकार माना जाता है। हालांकि, भारत में न्याय व्यवस्था की वर्तमान चुनौतियाँ काफी जटिल हैं। 

स्रोतों के अनुसार, वर्तमान में न्यायपालिका पर मुकदमों का भारी बोझ है, जिसमें उच्च न्यायालयों में लगभग 6.38 मिलियन और जिला एवं तालुका न्यायालयों में 48.26 मिलियन मामले लंबित हैं ।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए, भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया मिशन के साथ न्याय प्रणाली को एकीकृत किया है। 

डिजिटल इंडिया पहल का उद्देश्य सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके नागरिक सेवाओं को पारदर्शी और सुलभ बनाना है। 

इसी दिशा में, न्याय विभाग और ई-समिति (उच्चतम न्यायालय) ने न्याय सेतु जैसी अवधारणाओं और e-Courts Services App को विकसित किया है ताकि "न्याय सबके द्वार" के सपने को साकार किया जा सके।

न्याय सेतु ऐप क्या है?

न्याय सेतु ऐप क्या है इसे समझने के लिए हमें सरकार की डिजिटल न्याय संरचना को देखना होगा। 

यह एक एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म है जिसका मुख्य उदेश्य नागरिकों को समयबद्ध और कुशल नागरिक-केंद्रित सेवाएँ प्रदान करना है ।

मंत्रालय/विभाग:

यह पहल विधि और न्याय मंत्रालय (Ministry of Law and Justice) के न्याय विभाग (Department of Justice) के अंतर्गत आती है ।

तकनीकी ढांचा:

इसका निर्माण और रख-रखाव राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा किया गया है।

यह ऐप और पोर्टल राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (NJDG)के साथ मिलकर काम करते हैं, जो केस प्रबंधन और निगरानी के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।

न्याय सेतु ऐप की Demand क्यों बढ़ रही है?

डिजिटल न्याय की मांग बढ़ने के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण हैं:

1.लंबित केस:

अदालतों में मुकदमों की बढ़ती संख्या (उच्च न्यायालयों में 6.38 मिलियन से अधिक) एक बड़ी चिंता है। e-Courts India जैसी प्रणालियाँ इन मामलों के प्रबंधन और निस्तारण की गति बढ़ाने में सहायक हैं ।

2.पारदर्शिता की आवश्यकता:

सूचना तक पहुँच में पारदर्शिता लाना न्याय प्रणाली का एक मुख्य लक्ष्य है । नागरिक अब घर बैठे अपने केस की स्थिति जान सकते हैं।

3.ग्रामीण क्षेत्र में न्याय पहुँच:

डिजिटल इंडिया के तहत देश भर में 5.67 लाख से अधिक कार्यात्मक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)उपलब्ध हैं । ये सेंटर ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को डिजिटल कानूनी सेवाओं से जोड़कर न्याय के अंतर को कम करने में मदद करते हैं ।

नागरिकों को होने वाले लाभ

न्याय सेतु ऐप और डिजिटल न्याय प्रणाली से नागरिकों को निम्नलिखित प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होते हैं:

ऑनलाइन केस ट्रैकिंग:

नागरिक अपने मामले की वर्तमान स्थिति (Case Status) को CNR नंबर के माध्यम से ऐप या एसएमएस (9766899899 पर SMS भेजकर) द्वारा ट्रैक कर सकते हैं ।

समय और खर्च में बचत:

वर्चुअल कोर्ट (Virtual Courts)की सुविधा से वादियों या वकीलों को भौतिक रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता कम हो जाती है, जिससे समय और यात्रा के खर्च की बचत होती है।

डिजिटल साक्ष्य और ई-फाइलिंग:

e-Filing एप्लिकेशन कानूनी दस्तावेजों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा करने की अनुमति देता है, जिससे कागजी कार्रवाई कम होती है।

पारदर्शिता और जवाबदेही:

वर्चुअल जस्टिस क्लॉक और ऑनलाइन आदेशों की उपलब्धता से न्यायिक प्रक्रियाओं में जवाबदेही बढ़ती है।

मुख्य बिंदु (Key Features):

इस डिजिटल पहल की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

1. ऑनलाइन केस स्टेटस और कॉज लिस्ट:

नागरिक उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों के केस स्टेटस, कॉज लिस्ट और निर्णयों/आदेशों तक पहुँच प्राप्त कर सकते हैं ।

2. ई-पे (ePay):

कोर्ट फीस, जुर्माना या अन्य न्यायिक शुल्कों का भुगतान बिना चेक या नकद के डिजिटल माध्यम से किया जा सकता है ।

3. डिजिटल डॉक्यूमेंट और ई-

फाइलिंग:कानूनी दस्तावेजों को ऑनलाइन जमा करने की सुविधा।

4.बहुभाषी सुविधा:

डिजिटल इंडिया की'भाषिणी' (BHASHINI) पहल के माध्यम से सेवाओं को स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे भाषा की बाधा दूर हो सके।

5. वर्चुअल कोर्ट:

ऑनलाइन मामलों के निपटान के लिए एक प्रभावी मंच।

संभावित चुनौतियाँ

स्रोतों के विश्लेषण से कुछ चुनौतियाँ भी उभर कर आती हैं जिन्हें संबोधित करना आवश्यक है:

डिजिटल साक्षरता:

हालांकि डिजिटल इंडिया का विस्तार हो रहा है, लेकिन अभी भी एक बड़े वर्ग को इन तकनीकी उपकरणों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता है ।

डेटा सुरक्षा:

कानूनी डेटा की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा सर्वोपरि है। सरकार ने इसके लिए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 और संबंधित नियम लागू किए हैं ताकि डेटा की गोपनीयता बनी रहे।

डिजिटल न्याय प्रणाली में साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण

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डिजिटल प्रणालियों के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण न्याय व्यवस्था की प्राथमिकता बन चुकी है।



डिजिटल न्याय और डिजिटल इंडिया: एक सांख्यिकीय झलक
श्रेणी (Category) महत्वपूर्ण आंकड़े (Key Statistics) स्रोत संदर्भ
न्यायिक लंबित मामले (उच्च न्यायालय) 6.38 मिलियन (6.38 Million) [1]
न्यायिक लंबित मामले (जिला एवं तालुका) 48.26 मिलियन (48.26 Million) [2]
निस्तारित मामले (जिला न्यायालय) 214.55 मिलियन (214.55 Million) [2]
कुल कार्यात्मक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) 5.67 लाख (5.67 Lakh) [3]
जारी किए गए डिजिटल दस्तावेज 859.95 करोड़ (859.95 Crore) [4]
पंजीकृत आधार (Aadhaar) संख्या 138 करोड़ (138 Crore) [4]
e-Courts ऐप डाउनलोड 10 लाख से अधिक (1M+) [3]
SMS सेवा नंबर (केस स्टेटस हेतु) 9766899899 [2]


स्रोत संदर्भ (References)
  1. Department of Justice (DOJ)
  2. e-Courts Portal
  3. Digital India Official Portal
  4. Press Information Bureau (PIB)
  5. India Justice Report (Official Portal)

डेटा का विश्लेषणात्मक महत्व (Analytical Insights)
  1. न्याय तक पहुँच (Access to Justice): स्रोतों के अनुसार, देश भर में 3,691 जिला एवं तालुका न्यायालय परिसरों का डिजिटलीकरण किया गया है, जो स्थानीय स्तर पर न्याय वितरण को सुगम बनाता है।
  2. डिजिटल सशक्तिकरण: 5.67 लाख कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की उपलब्धता यह सुनिश्चित करती है कि ग्रामीण नागरिक, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है, वे भी इन केंद्रों के माध्यम से डिजिटल कानूनी सेवाओं का लाभ उठा सकें।
  3. पारदर्शिता का प्रमाण: 214.55 मिलियन निस्तारित मामलों का डिजिटल रिकॉर्ड होना यह दर्शाता है कि ई-कोर्ट्स प्रणाली न केवल नए मामलों को दर्ज कर रही है, बल्कि पुराने रिकॉर्ड्स को भी पारदर्शी बना रही है।
  4. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: डिजिटल इंडिया मिशन की सफलता का प्रमाण यह भी है कि भारत ने 23 देशों के साथ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) पर सहयोग के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
  5. डेटा सुरक्षा की प्रतिबद्धता: बढ़ते डिजिटल डेटा को देखते हुए, सरकार ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) नियम, 2025 के मसौदे पर परामर्श शुरू किया है, ताकि न्यायिक और व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित रहे।


3,691 अदालत परिसरों का डिजिटलीकरण: डिजिटल न्याय की ओर कदम

भारत में 3691 अदालत परिसरों का डिजिटलीकरण और e-Courts डेटादेशभर में हजारों न्यायालय परिसरों का डिजिटलीकरण स्थानीय स्तर पर न्याय तक पहुंच को आसान बना रहा है।


साइबर सुरक्षा जोखिम:

डिजिटल प्रणालियों पर बढ़ती निर्भरता के साथ साइबर सुरक्षा खतरों से निपटना एक निरंतर चुनौती है, जिसके लिए सरकार कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही है।

निष्कर्ष

न्याय सेतु ऐप और इससे जुड़ी डिजिटल न्याय प्रणालीभारत की न्याय व्यवस्था में एक क्रांतिकारी सुधार है। भारत में ई- governance के माध्यम से न्याय को सस्ता, सुलभ और पारदर्शी" बनाने का लक्ष्य अब वास्तविकता बन रहा है । 

हालांकि डिजिटल साक्षरता और सुरक्षा जैसी चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन सरकार की नीतिगत पहलें और तकनीकी बुनियादी ढांचे (जैसे e-Courts Project) एक सशक्त और न्यायपूर्ण समाज की ओर इशारा करते हैं ।

यह प्रणाली न केवल लंबित मामलों को कम करने में मदद करेगी, बल्कि ऑनलाइन केस ट्रैकिंगऔर न्याय व्यवस्था सुधारके माध्यम से आम नागरिक का न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत करेगी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. न्याय सेतु ऐप क्या है?

न्याय सेतु ऐप एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो ई-कोर्ट्स और न्याय विभाग की विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं को जोड़ता है, जिससे नागरिक केस की स्थिति और न्यायिक जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं।

2. क्या डिजिटल न्याय प्रणाली से लंबित मामलों में कमी आएगी?

डिजिटलीकरण से केस ट्रैकिंग, रिकॉर्ड प्रबंधन और पारदर्शिता बेहतर होती है, जिससे लंबित मामलों के निस्तारण में गति आने की संभावना बढ़ती है।

3. e-Courts Project क्या है?

e-Courts Project भारत सरकार की पहल है जिसका उद्देश्य न्यायालयों को डिजिटल बनाना और न्यायिक प्रक्रियाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराना है।

4. क्या ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल न्याय सेवाएं उपलब्ध हैं?

हाँ, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से ग्रामीण नागरिक भी डिजिटल कानूनी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

5. डिजिटल न्याय प्रणाली में डेटा सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है?

सरकार डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) नियमों और साइबर सुरक्षा उपायों के माध्यम से न्यायिक डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है।

नोट:

यह लेख प्रदान किए गए आधिकारिक स्रोतों ] में उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।

न्याय सेतु शब्द का उपयोग यहाँ डिजिटल न्याय सेतु/पुल के संदर्भ में किया गया है जो न्याय विभाग की विभिन्न ई-सेवाओं को जोड़ता है।

लेखक 

प्रभु नाथ 

एक स्वतंत्र विश्लेषक 

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