पिछले कुछ वर्षों में भारत की आर्थिक नीति में एक अहम बदलाव देखने को मिला है—अंतरराष्ट्रीय व्यापार का निपटान भारतीय रुपये (INR) में करना। इसे आम तौर पर RBI INR Settlement Mechanism कहा जाता है। इस पहल को लेकर कई सवाल उठते हैं: क्या भारत डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहता है? क्या यह Dedollarization की दिशा में कदम है? और इसका आम व्यापारियों, आयात-निर्यात और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
इस लेख में हम RBI के आधिकारिक दस्तावेज़ों और नियमों के आधार पर INR Settlement की पूरी तस्वीर समझेंगे।
RBI INR Settlement का मतलब क्या है?
RBI INR Settlement का अर्थ है कि भारत कुछ देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार का भुगतान अमेरिकी डॉलर के बजाय भारतीय रुपये (INR) में कर सकता है।
SRVA के ज़रिए INR में आयात-निर्यात भुगतान की प्रक्रियायह व्यवस्था Reserve Bank of India द्वारा जुलाई 2022 में शुरू की गई थी, ताकि:
व्यापार को आसान बनाया जा सके
विदेशी मुद्रा (Dollar) की कमी के जोखिम को घटाया जा सके
भारतीय रुपये को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोगी बनाया जा सके
Special Rupee Vostro Account (SRVA) क्या है?
INR Settlement की रीढ़ है Special Rupee Vostro Account (SRVA)। SRVA एक पेमेंट मैकेनिज्म है जिसमें एक देश का बैंक भारतीय सेंट्रल बैंक में अपना SRVA खाता खोल सकते है।
आसान भाषा में:
विदेशी बैंक भारत में अपने भारतीय बैंक के साथ रुपये में खाता (Vostro Account) खोलते हैं
उसी खाते से आयात-निर्यात का भुगतान होता है,लेन-देन पूरी तरह INR में होता है
इसका फायदा:
Exporter को भुगतान जल्दी मिलता है
Dollar exchange risk कम होता है
Transaction cost घटती है
RBI ने INR Settlement क्यों शुरू किया?
1.वैश्विक अस्थिरता और डॉलर जोखिम
कोविड, युद्ध और प्रतिबंधों के कारण डॉलर आधारित भुगतान प्रणाली कई बार बाधित हुई। इससे देशों ने वैकल्पिक भुगतान तंत्र की जरूरत महसूस की।
2.भारत का बढ़ता व्यापार
INR Settlement से व्यापारियों को मिलने वाले संभावित लाभ और सीमाएंभारत का व्यापार कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं (एशिया, अफ्रीका) के साथ बढ़ रहा है, जहाँ डॉलर की उपलब्धता हमेशा आसान नहीं होती।
3.रुपये का अंतरराष्ट्रीयकरण
भारत धीरे-धीरे रुपये को International Trade Currency के रूप में स्थापित करना चाहता है लेकिन चरणबद्ध और संतुलित तरीके से।
भारत चीन की तरह दावा नहीं करता DEDOLLARIZATION का।
क्या यह Dedollarization का हिस्सा है?
RBI ने साफ किया है कि INR Settlement का उद्देश्य डॉलर को हटाना नहीं है। यह व्यवस्था optional है Dollar-based trade अब भी जारी है यह केवल risk diversification tool है, यानी, भारत का दृष्टिकोण टकराव नहीं, संतुलन का है।
किन देशों के साथ INR Settlement संभव है?
RBI के अनुसार, यह व्यवस्था उन देशों के साथ लागू हो सकती है:
जिनके साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार है जिनके बैंक भारत में SRVA खोलने को तैयार हों
हाल के वर्षों में रूस, कुछ एशियाई और अफ्रीकी देश इस मॉडल में रुचि दिखा चुके हैं।
आयात-निर्यात करने वालों पर इसका असर
Exporters के लिए
भुगतान में देरी कम होगी
Dollar volatility से राहत
नई मार्केट्स तक पहुँच आसान
Importers के लिए
वैकल्पिक भुगतान विकल्प
विदेशी मुद्रा दबाव कम
सीमाएँ
सभी देशों में INR की स्वीकार्यता नहीं, अभी धीरे धीरे कुछ देश INR को स्वीकार रहे हैं। बड़े कमोडिटी व्यापार (जैसे तेल) में डॉलर अभी भी प्रमुख है।
हालांकि भारत कुछ समय से रूस से अधिक तेल आयात कर रहा है जो INR में हो रहा है।
रुपये की स्थिति पर क्या असर पड़ेगा?
INR Settlement से रुपये की लेन-देन उपयोगिता बढ़ती है लेकिन यह रुपये को तुरंत Global Reserve Currency नहीं बनाता।
भविष्य में क्या हो सकता है यह भारत की सरकार और भारतीय डिप्लोमेसी द्वारा विश्व के अन्य देशों से संबंध पर निर्भर करता है।
IMF और वैश्विक संस्थाओं के अनुसार:
किसी मुद्रा को वैश्विक स्तर पर स्थापित होने में दशकों लगते हैं।इसलिए इसे long-term strategy के रूप में देखना चाहिए।
RBI और भारत की आधिकारिक स्थिति (Clear Stand)
RBI के FAQ और Circulars में साफ लिखा है कि यह व्यवस्था पूरी तरह market-driven है किसी भी पक्ष पर मजबूरी नहीं।
सभी नियम FEMA और RBI guidelines के तहत हैं यह भारत की आर्थिक स्थिरता और व्यापार सुविधा को ध्यान में रखकर बनाई गई नीति है।
Myth vs Fact: RBI INR Settlement
Myth 1:
भारत डॉलर छोड़ रहा है
Fact:
Dollar trade अब भी प्रमुख है
Myth 2:
यह केवल राजनीतिक फैसला है
Fact:
यह व्यापारिक सुविधा पर आधारित है
Myth 3:
सभी देश INR में व्यापार करेंगे
Fact:
यह केवल इच्छुक देशों के लिए है
Myth 4:
इससे रुपये की कीमत तुरंत बढ़ेगी
Fact:
असर धीरे-धीरे और सीमित होगा
निष्कर्ष:
RBI INR Settlement की असली भूमिका RBI INR Settlement कोई क्रांतिकारी झटका नहीं, बल्कि संतुलित और व्यावहारिक कदम है।
यह भारत को वैश्विक व्यापार में अधिक लचीलापन देता है, जोखिम कम करता है और भविष्य के लिए विकल्प तैयार करता है।
डॉलर आज भी वैश्विक अर्थव्यवस्था का केंद्र है, लेकिन भारत यह सुनिश्चित कर रहा है कि उस पर पूरी तरह निर्भर न रहना पड़े।
FAQs
Q1.
RBI INR Settlement Mechanism क्या है?
A.
यह व्यवस्था भारत को कुछ देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार का भुगतान अमेरिकी डॉलर के बजाय भारतीय रुपये (INR) में करने की अनुमति देती है।
Q2.
Special Rupee Vostro Account (SRVA) क्या होता है?
A
यह एक ऐसा खाता है जिसे विदेशी बैंक भारत में भारतीय बैंकों के साथ रुपये में खोलते हैं, जिससे INR में व्यापार निपटान संभव होता है।
Q3.
क्या INR Settlement Dedollarization का हिस्सा है?
A
नहीं। RBI के अनुसार यह डॉलर को हटाने का कदम नहीं, बल्कि जोखिम प्रबंधन और व्यापार सुविधा का विकल्प है।
Q4.
INR Settlement से Exporters को क्या फायदा होता है?
A
भुगतान में तेजी, डॉलर उतार-चढ़ाव से राहत और लेन-देन लागत
में कमी।
जनता से सवाल
आप क्या मानते है क्या आने वाले वर्षों में INR Settlement भारत के व्यापार को और मज़बूत बना पाएगा, या डॉलर का दबदबा बना रहेगा? अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए।
स्रोत (विश्वसनीय)
1. RBI FAQ – International Trade Settlement in INR (PDF)
2. RBI Circular – INR Trade Settlement Framework
3. RBI – Foreign Exchange Management (FEMA) Guidelines



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