Dollar vs Yuan: क्या युआन डॉलर को चुनौती दे सकता है? भारत पर असर



अमेरिकी डॉलर दशकों से वैश्विक वित्त का केंद्र रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में चीन का युआन (Renminbi) अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक दिखाई देने लगा है। 

तेल-गैस सौदे, द्विपक्षीय व्यापार समझौते और भुगतान प्रणालियों में युआन के उपयोग ने एक नई बहस छेड़ दी है—क्या डॉलर को चुनौती मिल रही है? और इससे भारत को क्या फायदा या जोखिम हो सकता है? 

इस लेख में हम तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर समझेंगे कि Dollar vs Yuan की यह प्रतिस्पर्धा भारत के लिए क्या मायने रखती है।

डॉलर की वर्तमान स्थिति, डॉलर को मजबूती के कारण?

डॉलर आज भी फॉरेन करेंसी एक्सचेंज में अन्य मुद्राओं की तुलना में अच्छी स्थिति में है। इसका कारण है दशकों से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में डॉलर की महत्वता।

1 रिज़र्व करेंसी का दर्जा

1970 के दशक में खड़ी देशों से समझवाता  जिसमे पेट्रोल का व्यापार डॉलर में होना था, होने के पश्चात डॉलर ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में रिजर्व करेंसी का रूप धारण कर लिया जो निरंतर आज भी जारी है।



वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा डॉलर में रखा आज भी रखा जाता है।  हालंकि ब्रिक्स देशों ने डॉलर की होल्डिंग कम कर दी है।

इससे डॉलर की विश्वसनीयता और तरलता (liquidity) बनी रहहुई है।

2 FX ट्रेडिंग में प्रभुत्व

दुनिया के अधिकांश विदेशी मुद्रा लेन-देन डॉलर के साथ आज भी हो रहे है।चाहे व्यापार अमेरिका से जुड़ा हो या नहीं। हालांकि प्रमुख ब्रिक्स देश अपनी मुद्रा में व्यापार करने लगे हैं।

3 गहरे वित्तीय बाज़ार

अमेरिका के बॉन्ड और पूंजी बाज़ार बड़े, खुले हुए हैं, जिसके कारण आज भी डॉलर वैश्विक मुद्रा के रूप में विश्वसनीय बना हुआ है।

युआन (Renminbi) क्यों चर्चा में है?

चीन द्वारा कुछ वर्षों  से कुछ देशों से युआन में व्यापार पर समझौता और चीन द्वारा डॉलर को रिजर्व करेंसी से रिप्लेस कर युआन को रिजर्व करेंसी बनाने के कारण युआन की चर्चा हो रही है। वर्तमान में वास्तविक कारण क्या है:

1 चीन का बढ़ता व्यापार

चीन जो की अभी तक मैन्युफैक्चरिंग का हब है से कई देशों ने युवान में व्यापार करने की सहमति दी है। देश अब युआन में इनवॉइसिंग पर सहमत हो रहे हैं।

2 द्विपक्षीय समझौते

कुछ देशों ने आपसी व्यापार में डॉलर की जगह युआन/स्थानीय मुद्रा अपनाने के समझौते किए हैं।

3 भुगतान प्रणालियाँ

चीन ने SWIFT के विकल्प के रूप में CIPS जैसी व्यवस्था विकसित की है, जिससे युआन-आधारित भुगतान आसान होते हैं।

जैसे भारत के RBI के द्वारा INR सेटलमेंट की व्यवस्था की गई है लेकिन ध्यान रहे—युआन अभी पूरी तरह मुक्त (fully convertible) नहीं है, जो इसकी सबसे बड़ी सीमा है।

Dollar vs Yuan: सीधी तुलना 

डॉलर :

1. वैश्विक रिजर्व में अभी भी बड़ा हिस्सा 
2 FX ट्रेडिंग प्रमुख सीमित
3 बाज़ार की गहराई बहुत गहरी
4 भरोसा/पारदर्शिता उच्च मध्यम

युआन

पहलू डॉलर युआन

छोटा, बढ़ता हुआ

बाज़ार की गहराई  अपेक्षाकृत कम

पूंजी नियंत्रण नहीं हैं

निष्कर्ष: डॉलर का प्रभुत्व अभी बरकरार है; युआन की प्रगति धीमी और चयनात्मक है।

भारत के लिए क्या मायने?

1. व्यापार भुगतान में विकल्प भारत के लिए विकल्प होना फायदेमंद है—डॉलर पर एकतरफा निर्भरता घटती है।

2. RBI का संतुलित रुख



Reserve Bank of India भारत में INR Settlement और वैकल्पिक भुगतान ढाँचों को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन डॉलर सिस्टम से टकराव नहीं चाहता।

3.जोखिम प्रबंधन

युआन-आधारित या स्थानीय मुद्रा समझौते जोखिम फैलाते हैं—खासकर प्रतिबंध/आपूर्ति-झटकों के समय।

4. निवेश और स्थिरता

भारत के विदेशी निवेश और कर्ज बाज़ार अभी भी डॉलर-केंद्रित हैं; इसलिए अचानक बदलाव व्यावहारिक नहीं।

क्या यह Dedollarization का संकेत है? आंशिक रूप से, हाँ लेकिन सीमित।

यह अधिकतर देशों के लिए risk diversification है, न कि डॉलर को हटाने की योजना। IMF और BIS जैसे संस्थान मानते हैं कि रिज़र्व करेंसी बदलना दशकों का काम होता है।

भारत को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?

बहु-मुद्रा विकल्प (INR settlement, चुनिंदा युआन सौदे)

डॉलर तरलता बनाए रखना

स्थिर, चरणबद्ध कदम—अचानक स्विच नहीं

नियम-आधारित ढांचा और पारदर्शिता

Myth vs Fact

Myth

युआन जल्द डॉलर को हटा देगा

Fact

डॉलर की बढ़त अभी बहुत बड़ी है

Myth:

 भारत को तुरंत युआन अपनाना चाहिए

Fact

भारत का रुख संतुलित और व्यावहारिक है

Myth

यह सिर्फ राजनीति है

Fact

इसमें अर्थशास्त्र और बाज़ार की भूमिका प्रमुख है

निष्कर्ष

Dollar vs Yuan की बहस में भारत के लिए सही रास्ता संतुलन है—डॉलर की स्थिरता बनाए रखते हुए, वैकल्पिक भुगतान और INR-आधारित ढाँचों को धीरे-धीरे मजबूत करना। यह रणनीति जोखिम घटाती है और भविष्य के लिए लचीलापन देती है।

FAQs 

Q1

Dollar vs Yuan का मतलब क्या है?

Dollar vs Yuan से आशय वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अमेरिकी डॉलर और चीन के युआन (Renminbi) की भूमिका और प्रभाव की तुलना से है।

Q2

क्या युआन अमेरिकी डॉलर को रिज़र्व करेंसी से हटा सकता है?

नहीं। फिलहाल युआन की प्रगति सीमित है। डॉलर का प्रभुत्व अभी भी बना हुआ है और रिज़र्व करेंसी बदलना दशकों की प्रक्रिया होती है।

Q3

Dollar vs Yuan की प्रतिस्पर्धा भारत को कैसे प्रभावित करती है?

भारत को व्यापार भुगतान में विकल्प मिलते हैं, लेकिन विदेशी निवेश और कर्ज़ बाज़ार अब भी डॉलर-केंद्रित हैं, इसलिए संतुलित रुख जरूरी है।

Q4

क्या यह Dedollarization का संकेत है?

आंशिक रूप से। यह ज़्यादातर देशों के लिए जोखिम-विविधीकरण (risk diversification) है, न कि डॉलर को हटाने की सीधी योजना।

आप से सवाल 

आप क्या सोचते हैं क्या भारत को बहु-मुद्रा रणनीति तेज़ करनी चाहिए, या डॉलर-केंद्रित व्यवस्था ही सुरक्षित है? अपनी राय कमेंट में साझा करें।

लेखक 

प्रभु नाथ

एक स्वतंत्र विश्लेषक 

🔗  Source Links

IMF – COFER (Reserve Currency Data)


BIS – FX Trading (Triennial Survey)

https://www.bis.org/statistics/rpfx22_fx.pdf

People's Bank of China – RMB Internationalization

http://www.pbc.gov.cn/en/

Res

erve Bank of India – INR Trade Settlement

https://www.rbi.org.in/commonman/Upload/English/FAQs/PDFs/ITSIR16012025.pdf


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