पिछले कुछ समय से वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक नया सवाल बार-बार उठ रहा है BRICS Currency क्या BRICS देश अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं?
क्या यह प्रस्ताव सिर्फ एक राजनीतिक बयान है, या भविष्य की किसी बड़ी आर्थिक रणनीति का संकेत? जब दुनिया में डॉलर का प्रभुत्व दशकों से बना हुआ है, तब किसी वैकल्पिक व्यवस्था की चर्चा स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचती है।
इस लेख में हम तथ्यों, आधिकारिक रिपोर्टों और मौजूदा नीतियों के आधार पर समझेंगे कि BRICS Currency असल में क्या है और इसकी वास्तविक क्षमता क्या हो सकती है।
BRICS Currency क्या है?
BRICS Currency का मतलब BRICS देशों (Brazil, Russia, India, China, South Africa और कुछ जुड़े नए देस) द्वारा ऐसी साझा या वैकल्पिक व्यवस्था की संभावना से है, जिससे वे आपसी व्यापार और वित्तीय लेन-देन में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम कर सकें।
यह जरूरी नहीं कि तुरंत कोई नई नोट या सिक्का मुद्रा आ जाए या डॉलर की जगह एक ही झटके में नई मुद्रा ले ले
अधिकतर चर्चाएँ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, क्लियरिंग मैकेनिज़्म, या भविष्य में किसी संयुक्त अकाउंट यूनिट को लेकर हैं।
BRICS देश डॉलर से दूरी क्यों चाहते हैं?
इसके पीछे कुछ व्यावहारिक कारण हैं:
1. अमेरिकी प्रतिबंधों का डर
कुछ देशों (जैसे रूस) ने अनुभव किया है कि डॉलर आधारित सिस्टम में रहने से भूराजनीतिक प्रतिबंधों का जोखिम बढ़ जाता है।
2. विनिमय दर (Exchange Rate) का जोखिम
डॉलर में व्यापार करने से स्थानीय कंपनियाँ डॉलर-रुपया या डॉलर-युआन के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होती हैं।
3. रणनीतिक आत्मनिर्भरता
BRICS देश चाहते हैं कि वैश्विक वित्तीय ढांचे में उनका निर्णय-निर्माण नियंत्रण बढ़े।
डॉलर इतना मजबूत क्यों है?
किसी भी वैकल्पिक मुद्रा को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि डॉलर आज भी इतना प्रभावशाली क्यों है:
वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा डॉलर में है
विदेशी मुद्रा व्यापार (FX Trading) में डॉलर सबसे अधिक उपयोग में है
अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बड़ी मात्रा डॉलर में इनवॉइस होती है
IMF और BIS जैसे संस्थानों के अनुसार, रिज़र्व मुद्राओं में बदलाव बहुत धीमी प्रक्रिया होती है।
BRICS Currency बनाम डॉलर: क्या तुलना संभव है?
डॉलर:
दशकों से स्थापित गहरे और तरल (liquid) वित्तीय बाज़ार वैश्विक विश्वास (trust) , जो अब धीरे धीरे कम होता प्रतीत हो रहा है।
BRICS Currency:
ब्रिक्स करेंसी अभी विचार है, प्रयोग होना अभी शुरू नहीं हुआ।अभी विचार और प्रयोग के स्तर पर अलग-अलग अर्थव्यवस्थाएँ और नीतियाँ साझा मौद्रिक नीति पर सहमति की चुनौती है।
इसलिए फिलहाल इसे डॉलर का विकल्प कहना व्यावहारिक नहीं, बल्कि पूरक व्यवस्था कहना ज्यादा सही है।
भारत और RBI का दृष्टिकोण:
भारत की नीति इस मामले में काफ़ी संतुलित है।Reserve Bank of India ने साफ किया है कि भारत स्थानीय मुद्रा (INR) में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा दे रहा है लेकिन डॉलर आधारित वैश्विक व्यवस्था से टकराव नहीं चाहता
INR Settlement और SRVA
भारत ने Special Rupee Vostro Account (SRVA) के ज़रिए कुछ देशों के साथ रुपये में व्यापार की सुविधा दी है। इसका उद्देश्य:
निर्यातकों का जोखिम कम करना
लेन-देन की लागत घटाना
डॉलर निर्भरता को सीमित करना
IMF और वैश्विक संस्थाएँ क्या कहती हैं?
International Monetary Fund के अनुसार:
डॉलर की हिस्सेदारी में मामूली उतार-चढ़ाव हुआ है लेकिन कोई तेज़ गिरावट नहीं दिखती IMF का मानना है कि रिज़र्व मुद्रा का चुनाव सिर्फ व्यापार से नहीं, बल्कि वित्तीय स्थिरता, बाज़ार की गहराई और भरोसे से तय होता है।
Myth vs Fact:
BRICS Currency को लेकर सच्चाई
Myth 1:
BRICS Currency जल्द लॉन्च होगी
Fact:
अभी कोई तय समय-सीमा नहीं है
Myth 2:
यह डॉलर को तुरंत कमजोर कर देगी
Fact:
डॉलर का प्रभुत्व अल्पकाल में बना रहेगा
Myth 3:
सभी BRICS देश एक-मत हैं
Fact:
सभी देशों की आर्थिक प्राथमिकताएँ अलग हैं
Myth 4:
यह सिर्फ आर्थिक फैसला है
Fact:
इसमें भू-राजनीति की बड़ी भूमिका है
Myth 5:
आम लोगों पर तुरंत असर पड़ेगा
Fact:
असर सीमित और धीरे-धीरे होगा
आम लोगों और भारत पर संभावित असर
सकारात्मक पहलू
निर्यातकों को स्थिरता, विदेशी मुद्रा जोखिम में कमी रुपये की अंतरराष्ट्रीय पहचान में धीरे-धीरे सुधार।
आपसी मुद्रा में व्यापार का कारण है रुपए की सस्वीकारता वैश्विकस्तर पर बढ़ाना।
सीमाएँ
आयात अब भी डॉलर पर निर्भर, वैश्विक निवेश डॉलर सिस्टम से जुड़ा हुआ अभी भी है।
निष्कर्ष:
BRICS Currency हकीकत या उम्मीद?BRICS Currency फिलहाल एक दीर्घकालिक विचार है, न कि तात्कालिक क्रांति।
यह डॉलर को चुनौती देने से ज्यादा, देशों को विकल्प और लचीलापन देने की कोशिश है।
भारत की रणनीति संतुलन पर आधारित है—जो आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी भी है। आने वाले वर्षों में दिशा स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल डॉलर का केंद्र में रहना लगभग तय है।
FAQs:
Q1.
BRICS Currency क्या है?
A.
BRICS Currency एक प्रस्तावित वैकल्पिक व्यवस्था है, जिसके तहत BRICS देश आपसी व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहते हैं।
Q2.
क्या BRICS Currency डॉलर को खत्म कर देगी?
A.
नहीं। फिलहाल यह डॉलर का विकल्प नहीं बल्कि एक पूरक व्यवस्था मानी जा रही है। डॉलर का प्रभुत्व निकट भविष्य में बना रहेगा।
Q3.
भारत का BRICS Currency पर क्या रुख है?
A.
भारत स्थानीय मुद्रा (INR) में व्यापार को बढ़ावा दे रहा है, लेकिन डॉलर आधारित वैश्विक व्यवस्था से टकराव नहीं चाहता।
Q4.
क्या BRICS Currency का आम लोगों पर असर पड़ेगा?
A.
अल्पकाल में नहीं। इसका असर सीमित और धीरे-धीरे दिखाई देगा, मुख्य रूप से व्यापार और वित्तीय लेन-देन तक।
आपकी राय क्या है?
क्या BRICS जैसे समूह भविष्य में वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को सच में बदल पाएँगे, या डॉलर का प्रभुत्व बना रहेगा? अपनी राय कमेंट में ज़रूर साझा करें।
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लेखक
प्रभु नाथ
एक स्वतंत्र विश्लेषक


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