भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। यह बजट 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर एक मजबूत कदम माना जा रहा है। सरकार ने इस बजट में राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline), बुनियादी ढांचे के विकास (Infrastructure) और विनिर्माण (Manufacturing) पर विशेष जोर दिया है।
सवाल यह है की क्या वास्तव में यह बजट विकसित भारत के लक्ष्यों को पूरा करता है । किन किन पैरामेरिट पर सरकार का फोकस है और क्या है सरकार का" प्लान ऑफ वर्क" । आइए जानते है एक विस्तृत विश्लेषण।
बजट 2026-27: मुख्य आर्थिक आंकड़े (Key Economic Indicators)
ऐसा लगता है कि सरकार विकास के लक्ष्यों को बनाए रखते हुए भी घाटों को कम करने की कोशिश की है। यह कबीले तारीफ है कि बंगाल चुनाव होते हुए भी सरकार ने कोई लुभावनी घोषणाएं नहीं किया।
बजट का दिशा केवल और केवल विकास रहा है यह सही भी है पिछले बजट में सरकार द्वारा जनता की मांगे, लोकप्रिय मुद्दों को ध्यान दिया परन्तु इस बजट में आवश्यकताएं और दूरदर्शिता का समावेश है।
विवरण | बजट अनुमान (2026-27)
कुल व्यय (Total Expenditure) _ ₹53.5 लाख करोड़
पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure)_ ₹12.22 लाख करोड़ (11.5% की वृद्धि)
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)_ GDP का 4.3%
नाममात्र GDP विकास दर_ (Nominal GDP Growth) 10% (अनुमानित)
शुद्ध कर प्राप्तियां (Net Tax Receipts)_ ₹28.7 लाख करोड़
प्रमुख घोषणाएं और मुख्य बिंदु
1. बुनियादी ढांचा और परिवहन (Infrastructure & Transport)
सरकार ने इस बार बुनियादी ढांचे पर रिकॉर्ड ₹12.22 लाख करोड़ खर्च करने का लक्ष्य रखा है। यह होना भी चाहिए किसी भी राष्ट्र को विकसित होने के लिए बुनियादी सुविधाओं का होना जरूरी है।
रेलवे:
रेलवे के लिए ₹2.81 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है, जो अब तक का सबसे अधिक है। इसमें 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और 'अमृत भारत' स्टेशनों का विस्तार शामिल है।
बुनियादी सुविधाओं में रेलवे infrastructure development किसी भी देश के लिए उतना ही जरूरी है, जीतना जीवन के लिए सांस।
भारत सरकार के द्वारा रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर एक बड़ा बजट का आवंटन कबीले तारीफ है । रेलवे के विकास से औद्योगिक विकास भी जुड़ा हुआ है।
सड़क और राजमार्ग:
सड़क परिवहन मंत्रालय को ₹3.10 लाख करोड़ दिए गए हैं। 'सूरत से दनकुनी' तक एक नए समर्पित फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की गई है।
सड़क निर्माण भी रेलवे के विस्तार मार्ग की तरह ही एक महत्वपूर्ण और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर है। सड़कों की जाल किसी भी देश का विकास के लिए एक जरूरी स्तंभ है।
सड़कों के निर्माण में खास ध्यान भाजपा पार्टी का पहले से ही कार्यप्रणाली का एक हिस्सा रहा हैं। चाहे वह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार हो या नरेंद्र मोदी जी का दोनों की सरकार में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास जरूर हुआ है।
जलमार्ग:
अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को क्रियाशील बनाने की योजना है।
इतिहास में झांके तो जिसका भी समुद्र या जल मार्ग पर आधिपत्य रहा है वह सुरक्षित और अजय होने के साथ ही सम्पन्नता के शिकार पर रहा है।
नरेन्द्र मोदी का सागर माला का सपना उसी दूरदर्शिता को दर्शाता है इस बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बजट का एक बड़ा हिस्सा प्रशंसनीय है और भरता को विकासशील देश के सपने को साकार करने वाला है।
2. विनिर्माण और MSME सेक्टर
भारत को 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब' बनाने के लिए 7 रणनीतिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा ही इस लिए किया जाता है, जिससे आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो। इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़े हो जाएं और गतिविधियों का गतिशीलता न हो तो वह" ऊंची दुकान फीके पकवान" के समान ही है।
अतः विनिर्माण क्षेत्र में इस बजट में विशेष आवंटन एक समझदारी भरा कदम है जो भारत के विकास के लिए मास्टर स्ट्रोक का काम करेगा। विनिर्माण में कुछ खास क्षेत्र:
Biopharma SHAKTI:
बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर क्षमता निर्माण के लिए ₹10,000 करोड़ का प्रावधान।
स्वास्थ्य एक ऐसा विषय है जो विकास के क्रम में प्रायः महत्वपूर्ण स्थानों में गिनती नहीं किया जाता। परंतु व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र का निर्माण होता है।
प्रारंभिक स्वास्थ्य व्यक्ति ही स्वास्थ भारत बना सकता है, सरकार का स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान स्वागत योग्य है। सरकार की मंशा आयुर्वेदिक विश्वविद्यालयों की स्थापना भी है जो प्राचीन ज्ञान की धरोहर है।
सेमीकंडक्टर मिशन (ISM 2.0):
इलेक्ट्रॉनिक घटकों के निर्माण के लिए परिव्यय को ₹40,000 करोड़ तक बढ़ाया गया है। इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्माण बिना सेमीकंडक्टर के सोचा भी नहीं जा सकता।
इस क्षेत्र में भारत सरकार काफी समय से ही प्रयासरत रही है, सेमीकंडक्टर के लिए बजट में आवंटन विकास को गति देगा।
MSMEs के लिए सहायता:
चैंपियन MSME' बनाने के लिए ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड और अतिरिक्त तरलता (Liquidity) सहायता दी गई है।
प्राचीन भारतीय अर्ध व्यवस्था में माध्यम आकर के व्यवसाय के कारण ही हम वर्षों तक विश्व के प्रमुख अर्थव्यवस्था में शामिल रहे हैं।
पश्चात् शक्तियों के उदय और कैपिटलाइजेशन के दौर में MSME पेशों को त्याग कर लोग नौकरी को आकर्षक मनाने लगे। MSME पर ध्यान सरकार की उसी सोच को दर्शाती है।
3. रक्षा क्षेत्र (Defence Sector)
बजट में भारतीय क्षेत्र की सुरक्षा हेतु 15 प्रतिशत की वृद्धि करना सरकार की रक्षा क्षेत्र में गंभीरता को दर्शाता है। विकास चाहे जितना भी हो परन्तु सुरक्षा नहीं तो उस विकास की उम्र ज्यादा नहीं होती।
बजट में रक्षा सौदों के साथ इंडिजनश हथियार निर्माण पर भी सरकार का फोकस प्रशंसनीय है।
4. कृषि और ग्रामीण विकास
किसानों की आय बढ़ाने और तकनीक के इस्तेमाल के लिए भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) नामक एक बहुभाषी AI टूल लॉन्च करने का प्रस्ताव है, जो किसानों को व्यक्तिगत सलाह देगा।
पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए भी विशेष क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजनाओं की घोषणा की गई है। ग्रामीण विकास के लिए ₹1.97 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं।
मध्यम वर्ग और आयकर (Income Tax Analysis)
बजट 2026 में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, जो वेतनभोगी वर्ग के लिए थोड़ा निराशाजनक हो सकता है। हालांकि 'नया आयकर अधिनियम 2025' इस साल 1 अप्रैल से लागू होगा, जिसका उद्देश्य कर प्रक्रिया को सरल बनाना है।
STT में वृद्धि: प्रतिभूति लेनदेन कर (Securities Transaction Tax) की दरों को बढ़ाया गया है।
MAT (Minimum Alternate Tax): मैट की दर को 15% से घटाकर 14% कर दिया गया है।
संशोधित रिटर्न: अब टैक्स रिटर्न संशोधित करने की समय सीमा को 9 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है।
शिक्षा और स्वास्थ्य (Education & Health)
शिक्षा: शिक्षा क्षेत्र को ₹1.39 लाख करोड़ मिले हैं। औद्योगिक क्षेत्रों के पास 5 'यूनिवर्सिटी टाउनशिप' बनाई जाएंगी। साथ ही, हर जिले में छात्राओं के लिए एक हॉस्टल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य मंत्रालय को ₹1.07 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं। कैंसर की दवाओं पर सीमा शुल्क (Customs Duty) कम किया गया है, जिससे इलाज सस्ता होगा। हर जिला अस्पताल में 'ट्रॉमा सेंटर' विकसित किए जाएंगे।
हरित ऊर्जा और भविष्य की तकनीक
सरकार ने Carbon Capture, Utilisation and Storage (CCUS) के लिए ₹20,000 करोड़ का निवेश करने का निर्णय लिया है। यह कदम भारी उद्योगों (सीमेंट, स्टील, बिजली) से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा।
निष्कर्ष:
बजट 2026 का सार यह बजट स्पष्ट रूप से 'विकास और अनुशासन' का मिश्रण है। जहाँ एक तरफ सरकार ने बुनियादी ढांचे पर भारी खर्च करके रोजगार पैदा करने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ राजकोषीय घाटे को 4.3% तक सीमित रखकर आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की है। हालांकि मध्यम वर्ग को टैक्स में राहत नहीं मिली, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह बजट भारत की उत्पादन क्षमता (Production Capacity) को बढ़ाने वाला नजर आता है।

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