राजनीति: बदलाव या भ्रष्टाचार? – कैसे जनता बदल सकती है भारत की राजनीतिक सोच?”

राजनीति में बदलाव क्यों जरूरी है? जनता की सोच ही भारत का भविष्य तय करेगी?

जहां तक भारत की राजनीति की बात है यह एक समृद्धिशाली इतिहास लिए हुए है। परंतु हम इतिहास में न जाकर आधुनिक भारत के इतिहास पर विचार करने वाले है। सदियों के गुलामी के पश्चात भारत 1947 ईसवी में स्वतंत्र हुआ कहने के तो यह स्वतंत्रता था परन्तु गुलामी के समय की व्यवस्था अनवरत जारी रहा है।

भारतीय राजनीति में बदलाव


हालांकि उस व्यवस्था को ढकने के लिए कई शब्दों और विचारों को स्थापित किय गया। परन्तु भारत में न्याय प्रणाली और भ्रष्टाचार हमेशा चर्चा का विषय रहा है।

सवाल यही है क्या राजनीति सच्चाई से काम कर रही है या कुकुरनीति बन चुकी है? आज हम चर्चा करेंगे कि जनता की सोच और भागीदारी कैसे बदल सकती है भारत का राजनीतिक परिदृश्य — ताकि हर व्यक्ति समझ सके कि लोकतंत्र सिर्फ वोट देने तक सीमित नहीं है। 

1. राजनीत का वास्तविक उद्देश्य क्या है?

राजनीति का उद्देश्य समाज में न्याय, विकास और समानता लाना है। हमारे संविधान ने इसे नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य के रूप में स्थापित किया है। लेकिन आधुनिक राजनीति की काया अक्सर लाभ-हानि से जुड़ी निर्णय-प्रक्रिया बन जाती है।

उदाहरणतः आज के परिवेश में तमाम राजनीतिक दल देश सेवा से ऊपर अपने व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता देने लगे हैं। यहां तक की दूसरे देशों में विरोधी दल को नीचा दिखाने के होड़ में उनका विरोध राष्ट्र से होने लगा। ये अपने आपको राष्ट्रीय संस्थान से भी संघर्ष के मंसूबे पले बैठे हैं। यह आप हालही के घटनाएं से देख सकते हैं।

 2.भ्रष्टाचार vs वास्तविक सेवा

जहां राजनीति का मकसद सेवा है, वहीं भारतीय नेताओं ने और पार्टियों के काम से यह मतदाता-हित से हटकर स्व-हित बन गया है।.

“क्या आपने भी कभी महसूस किया है कि आपने वोट देने के बाद सही बदलाव कहीं देखा?”

 3. बदलाव में जनता की भूमिका 

सिर्फ वोट देना ही काफी नहीं होता किसी भी समृद्धिशाली और पुरातन संस्कृति वाले देश की जनता को, देस वाशियो को चाहिए कि वह सामाजिक मुद्दों को समझे, नेताओं का विश्लेषण करें और समस्यायों के kaswati पर नेताओं को तौलें।

साथ ही एक ऐसे सामाजिक व्यवस्था का निर्माण करें जिसमें राजनीतिक व्यवस्था पर विचार विमर्श हो और नेतृत्व करने वाले नेताओं का मूल्यांकन हो। और सही गलत का निर्णयों संपादन हो नोट यह व्यवस्था कोई राजनीतिक दल या सरकार नहीं करने वाली इसे जनता को खुद करना होगा किसी न किसी को यह शुरुआत करना ही पड़ेगा।

4.कैसे बदल सकती है लोग की सोच?

जब सोच की बात आती है तो सबसे पहले हमे गुलामी के मानसिकता और व्यवस्था से उभरना होगा। कहने को तो हम आजाद है परंतु आज भी हम गुलामी वाले सोच और व्यवस्था पर चल रहे हैं कहने के लिए तो हम आधुनिकता और स्वतंत्रता जैसे भरी शब्दों का लबादा ओढ़े हुए हैं। परन्तु ये शब्द उन्हीं राष्ट्रों के गाढ़े गए हैं जिन्होंने ने हमें गुलाम बनाया था।सच्ची आधुनिकता तभी संभव है जब हम अपने सोच में पुरातन भारतीय संस्कृति का समावेश करेंगे।

यह तभी संभव होगा जब मैकाले की गुलामी के लिए तैयार की गई शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन कर के प्राचीन गुरुकुल व्यवस्था की तरफ़ लौटेंगे।

आपके हिसाब से राजनीति में सबसे बड़ा परिवर्तन क्या होना चाहिए?”

भारत की राजनीति सिर्फ नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। आज राजनीति को लेकर आम जनता के मन में निराशा और गुस्सा दोनों है। सवाल यह है कि क्या राजनीति वाकई भ्रष्ट हो चुकी है या फिर जनता की सोच और भागीदारी कमजोर हो गई है? इस लेख में हम समझेंगे कि राजनीति में बदलाव कैसे संभव है और जनता इसमें क्या भूमिका निभा सकती है।

भारत की राजनीति की सच्चाई

भारतीय लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, लेकिन आज राजनीति सत्ता, पैसे और प्रभाव तक सिमटती नजर आती है। कई बार जनता को लगता है कि चुनाव के बाद उनकी आवाज़ दब जाती है।

जनता की चुप्पी सबसे बड़ा कारण

राजनीति तब खराब होती है जब जनता सिर्फ शिकायत करती है लेकिन भाग नहीं लेती। सिर्फ वोट देना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि सवाल पूछना और जागरूक रहना भी जरूरी है।

 समाधान क्या है?

राजनीतिक बदलाव के लिए जो स्तम्भ महत्वपूर्ण है वे है ,राजनीतिक शिक्षा को बढ़ावा देना,सही उम्मीदवार को चुनना,सोशल मीडिया पर सच फैलाना,युवाओं को राजनीति में लाना

निष्कर्ष 

अगर जनता ठान ले, तो राजनीति जरूर बदलेगी। लोकतंत्र जनता से चलता है, नेताओं से नहीं।

आप क्या सोचते हैं? Comment में अपनी राय जरूर लिखें और इस लेख को शेयर करें।

लेखक_ अनजान 










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