ग्रेटर इजरायल मिथ या सच?2030 सऊदी अरब बनेगा यहूदी बाहुल्य!?

 अगर भू राजनीति की बात की जाए तो उसमें इतिहास और भूगोल का चर्चा न हो ये वैसा ही होगा जैसे रोटी बिना सब्जी या दाल की। जब आज के इजरायल की परिस्थितियों पर बात की जाय तो इजरायल की इतिहास में झांकना बहुत जरूरी हो जाता है।

इजरायल का इतिहास और भू राजनीति में उसका महत्व 

A . इजरायल का इतिहास 

इजराइल का इतिहास बहुत ही संघर्ष भरा रहा है प्राचीन काल में जाएं तो जब सनातन अर्थात मूर्ति पूजा जब पूरे संसार में होता था उस समय इजरायल में यहूदी धर्म के उदय हो रहा था। जिसमें मूसा नमक पैगम्बर प्रमुख थे।

Greater इजरायल



अगर देखा जाय तो यरूशलेम के धरती से तीन प्रमुख अब्राहमिक धर्म यहूदी , ईसाई और इस्लाम तथा जम्मू दियुप से चार धर्म सनातन, बौद्ध जैन, और सिख का उदय हुआ था।

यहूदी धर्म के विस्तार के पक्षात ईसा मसीह के द्वारा ईसाई धर्म का उदय हुआ गौर करने वाली बात यह है कि जब भी परिवर्तन होता है वह सरल नहीं होता संघर्ष भरा होता है। अतः ईसाई धर्म और यहूदी धर्म के बीच संघर्ष हुआ इसी प्रकार इस्लाम तथा यहूदी धर्म के बीच भी संघर्ष होता रहा। यहूदी लोगों का पलायन हुआ और एक समय जहां एक बड़े भू भाग पर यहूदी लोग रहते थे। मध्य पूर्व से पूर्ण पलायन हो गया द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात एक नए देश इजरायल के नाम से वर्तमान वैश्विक शक्तियों के द्वारा हुआ।

वर्तमान इजरायल की राह भी इतनी आसान नहीं थी, पड़ोसी देशों से संघर्ष इस देश के जन्म के कुछ दिनों के पक्षात ही होना शुरू हो गया। जिसमे इजराइल और इस्लामी देशों के बीच कुछ ही दिनों का संघर्ष प्रमुख है। जिसमें इजरायल का युद्ध में विजय प्राप्त हुई कारण यहूदी लोग जो संख्या में कम थे, संघर्ष किया था ने अपने को आर्थिक गतिविधियों में प्रमुख भूमिका स्थापित कर लिया था। साथ ही वैज्ञानिक गतिविधियों में भी इनकी भूमिका प्रमुख थी।

B . इजरायल का जियो इकनॉमी में महत्व 

इजरायल जिस भू भाग पर स्थित है वो प्राचीन काल से ही सप्लाई चेन का ट्रेड रूट का प्रमुख स्थल है। प्रमुख इकनॉमी गतिविधियों में यहूदी लोगों की प्रधानता तथा विशिष्ट भूभाग पर स्थित होना साथ ही वैज्ञानिक टेक्नोलॉजी में एकाधिकार होने के कारण इजरायल का भू राजनीत में, जियो इकॉनमी में महत्व बढ़ जाता हैं।

ग्रेटर इजरायल की मांग के कारण 

जैसा कि इसके इतिहास में जाते है मध्य पूर्व मे इजरायल एक विस्तृत राष्ट्र हुआ करता था जब वह कमज़ोर हुआ तो उसकी सीमाएं घटती गई और एक समय में यह खत्म भी हो गया । परंतु आज के समय में इजराइल आर्थिक ,टेक्नोलॉजी, सभी रूप से कई देशों से सक्षम है। द्वितीय विश्व युद्ध के पक्षात अमेरिकी डॉलर की बादशाहत जारी करने के लिए जो भी हॉट स्पॉट दुश्मनी दो देशों के बीच खड़े किए गए थे ओ अब रिवर्स होने है। डालर हॉट स्पॉट के बारे मैं विस्तार से जानने के लिए दोनों लिंक पर क्लिक करें 🔗 🔗। अतः ग्रेटर इजरायल की मांग गलत नहीं है।

सऊदी अरब बनेगा एक यहूदी बहुसंख्यक राष्ट्र 

जैसे कि इजरायल के इतिहास में झांकते हैं तो पता चलता है कि वर्तमान इजरायल एक वृहद राष्ट्र था और अब जबकि डेडलराइजेशन का समय है और दुश्मन देशों का रिवर्सल होना है तो ग्रेटर इजरायल को पूर्ण होने में सऊदी अरब का यहूदी बाहुल्य राष्ट्र होना अति आवश्यक है। यही वर्तमान शक्तिशाली व्यवस्थापकों का फैसला है। और नए व्यवस्था के लिए जरूरत।

भारत और इजरायल के संबंध 

हालांकि भू राजनीति में कोई भी किसी का परमानेंट दुश्मन या दोस्त नहीं होता परंतु भारत और इजरायल का संबंध बहुत पुराना है। प्राचीन भारत में भी जब भारत एक प्रमुख सुपर पवार राष्ट्र होता था तब के समय से ही इजरायल का भारत से सम्बन्ध प्रगाढ़ थे कारण भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र था और इजरायल एक विशिष्ट भू भाग पर स्थिति था। और जब इजरायल संघर्ष कर रहा था विश्व युद्ध से पहले भी और बाद मे भी भारत ने इजरायल का साथ दिया है। अब चाहें इजरायल के लोगों को शरण देना हो या सैन्य सहायता।

इजरायल भी भारत का साथ सैन्य टेक्नॉलॉजी देने से लेकर कई तरह से सहायता देता रहा है । चुकी प्राचीन व्यवस्था पुनः लागू हो रही है अतः ग्रेटर इजरायल होना और अखण्ड भारत होना दोनों ही निश्चित हैं। और भारत और इजरायल दोनों का अच्छा सम्बन्ध होना आवश्यक हैं।

प्रश्न उत्तर 

क्या भारत अखंड भारत बने गा?

हां परंतु सह अस्तित्व के साथ जिसमे कुछ राष्ट्र का विलय तथा कुछ राष्ट्र का कुछ नीतियां वे खुद लेंगे और कुछ नीतियां भारत निर्णय लेगा।

क्या ग्रेटर इजरायल बनेगा?

हां परंतु भारत की तरह सह अस्तित्व के साथ 

निष्कर्ष: 

इकनॉमी और टेक्नोलॉजी ही किसी भी लोग संस्था के भविष्य के कारण होता हैं। और यह दोनों ही इजरायल को ग्रेटर इजरायल बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। एक बात और जो भी लोग राष्ट्र अपने जड़ों से जुड़े रहते हैं। उनका समय वापस जरूर आता है अतः अपने इतिहास को भूलना नहीं चाहिए।

अंत मे इतना ही कहना चाहता हूं कि यह लेखक के अपने विचार है कमेंट में अपने विचार रखना न भूले

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