भारत की भू-राजनीतिक रणनीति: बदलती वैश्विक राजनीति में भारत

भारत की भू-राजनीतिक रणनीति

कोई भी देश भू राजनीति में अगर सही रणनीति की रूप रेखा तैयार नहीं करता तो उस राष्ट्र का पतन निश्चित है। वर्तमान समय अनिश्चितता का है बदलाव का। इस समय कोइ भी गलती का परिणाम दूरगामी होगा। वर्तमान समय में भारत की भू राजनीतिक ररणनीति भारत का भविष्य निर्धारित करेगा।

यह समय है अपने नीतियां, रणनीति पर दुबारा कार्य करना का दूरगामी परिणाम पर विचार का वर्तमान और भविष्य के चुनौतियों को समझने का।

वर्तमान में ये पूर्ण रूप से दृश्य हो चुका है कि यूनीपोलर विश्व का दरोगा अमेरिका के पास अब उतनी शक्ति नहीं रही की वह विश्व के सभी देशों को निर्देशित कर सके।

इस खाली पन्न को भारत कैसे भर सकता है यह आज चर्चा का विषय है। दुनिया को और खुद भारत को भी यह समझना होगा कि भारत मात्र एक तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था नहीं है बल्कि देश के पास नेतृत्व क्षमता भी है।

भू राजनीति क्या है और भारत के लिए इसका महत्व 

भू राजनीति का तात्पर्य , भूगोल, भू संसाधन सीमाएं, समुद्री व्यापारिक मार्ग और पड़ोसी और दूरस्थ महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थानों पर स्थिति देश के बारे मे किसी राष्ट्र का रणनीतिक, राजनैतिक सोचा और डिप्लोमिक संबंध का क्रियान्वयन।

Infographic showing India's geopolitical strategy in a multipolar world."


भारत के लिए भू रणनीति का महत्व 

1. सीमाएं 

भारत की सीमाओं की जटिलता महत्वपूर्ण कारण है रणनीतिक स्टैंड को पुनर्विचार का भारत लगभग 15000 किम. की भू सीमा तथा लगभग़ 7500 किमी. की समुद्री सीमा से घिरा हुआ देश है। अतः भारत की भू राजनीतिक रणनीति महत्वपूर्ण है सीमाओं के सुरक्षा हेतु।

भारत के लिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि कैसे अपनी समुद्री सीमा से व्यापारिक लाभ ले सकें जो कि भू इकनॉमी के एक महत्वपूर्ण स्थिति पर है। साथ ही ऐसे पीड़ोसी देश जिनसे सामान्यतः अच्छे सम्बन्ध नहीं रहते के बारे में भी पुनर्विचार करना होगा।

2 दो परमाणु हथियार सम्पन्न राष्ट्र पड़ोसी

भारत के दो पड़ोसी राष्ट्र चीन और पाकिस्तान एक परमाणु हथियार सम्पन्न राष्ट्र है। हालांकि चीन एक स्वायत्त और बड़ा देश है परंतु पाकिस्तान जैसे देश जो एक रोग देस है के साथ सम्बन्ध पर पुर्नविचार जरूरी है।

3 हिंद महासागर में सेंटल पोजीशन

हिंद महासागर में भारत की स्थिति बहुत ही महत्वपूर्ण है हालांकि हिंद महासागर में अमेरिका का एसीविटी काफ़ी समय से रहा है परंतु वर्तमान maltipolar विश्व व्यवस्था में इस रीजन को छोड़ कर जाना होगा। अतः इस खाली स्थान को भारत को ही भरना है।

भारत की भौगोलिक स्थिति उसके लिए चुनौती या शक्ति 

भारत भूगोल के उस स्थान पर स्थिति है जहां से प्राचीन समय से ही व्यापारिक मार्गों का केंद्र बिंदु रहा है यही कालांतर में भारत की सम्पन्नता का कारण रह है।

कुछ कमियों के कारण भारत की शक्तियां क्षरण हुई है जिसके कारण कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हीं चुनौतियों तथा शक्तियों की चर्चा करते हैं।

शक्तियों की बात की जाए तो 

1 भारत की भौगोलिक स्थिति 

भारत ऐसे स्थान पर है जिसके एक तरफ समुद्री सीमाएं इसको व्यापारिक समुद्री यात्राओं का बादशाह बनाता है। दूसरी तरफ पर्वत श्रृंखला इसको एक अभेद सीमा प्रदान करने के साथ ही बहुरंगी मौसम प्रदान करता है 

2 भारत की प्राचीन संस्कृति और सभ्यता 

भारत एक प्राचीन सभ्यता है जो पुरातन संस्कृति से परिपूर्ण है। जो भी राष्ट्र अपनी संस्कृति को नहीं भूलता वह कभी भी कमजोर नहीं हो सकता। संस्कृति वाहक है प्राचीन ज्ञान और विज्ञान की जो आसानी से सरल रूप से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जाती रहती है अतः मैं संस्कृति और सभ्यता को एक शक्ति के रूप में परिभाषित करता हूं।

चुनौतियां 

1 स्थल सीमाएं 

भारत की स्थल सीमाएं नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और चीन से मिलती है। भूटान हालांकि एक मित्र देश है।

परंतु चीन और पाकिस्तान साथ ही बंगला देस भारत को निरंतर चुनौती प्रदान कर रहे हैं। नेपाल जैसे राष्ट्र भी समय समय पर भारत को उकसाता रहा है। हालांकि नई सरकार आने के बाद नेपाल थोड़ा शांत रहा है 

2.समुद्री ट्रेड रूट 

भारत समुद्री राजनीति के केंद्र में स्थित है जहां से विश्व के व्यापार संचालन का 60 से 70 प्रतिशत भाग आता जाता है। ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से गुजरता है। इस कारण भारत की समुद्रीय रणनीति महत्वपूर्ण हो जाती है।

भारत की समुद्री रणनीति न केवल भारतीय रीजन को बल्कि सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित करेगी। एक बार दुबारा बताना जरुरी हो जाता है की इस रीजन में अमेरीका बहुत ही एक्टिव रहा है परंतु अपनी वर्तमान आर्थिक स्थिति के कारण वह पहले वाली भूमिका निर्वहन में असमर्थ है। इस कार्य को भारत को ही करना है ।

रणनीतिक स्वायत्तता ही भारत की मूल भू रणनीति 

1947 से लेकर काफी समय तक भारतीय विदेशी नीति वैश्विक शक्तियों के इर्द गिर्द घूमती रही है कहने को तो हम गुट निरपेक्षता को मानते थे परंतु क्रियावान ठीक विपरीत रहा है।

बिना समुचित लाभ के रूस का साथ देना और अमेरिका से शत्रुता, इजरायल और फिलिस्तीनी मामलों में इजरायल से तथाकथित दूरी इसका प्रमाण है।

परंतु अब स्थिति बदल गई है अब भारत पूर्ण स्वायत्त देस की तरह व्यवहार भी कर रहा है और अपनी रणनीति का प्रदर्शन भी। एक तरफ हम रूस से तेल का निर्यात भी कर रहे हैं तो दूसरी तरफ अमेरिका से भी हमारा संबंध अच्छा ही है। 

एक तरफ हम इजरायल से सम्बन्ध बड़ा रहे है तो दूसरी तरफ अरब के देशों से हमारा सम्बन्ध प्रगाढ़ है।हम किसी के साथ नहीं है और सब के साथ भी है। अब कुछ महत्वपूर्ण देशों के साथ भारत के रणनीति की चर्चा करते है।

चीन के साथ भारत की भू राजनीतिक रणनीति 

हालांकि अन्य विश्लेषकों का मत होगा कि चीन भारत का एक बड़ा चुनौती है परन्तु मेरे मत सर्वथा भिन्न है चीन से निम्नलिखित मुद्दे विवादित हो सकते हैं जैसे 

1 चीन भारत सीमा विवाद (LAC)

2 डोकलाम और गलवान विवाद

3 चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी)

आदि 

परन्तु वर्तमान समय में स्थितियों में काफी परिवर्तन हो चुका है। जिस पर विस्तार से चर्चा करेंगे अगले लेख में। हमरा मानना है कि न हम डरेंगे न डराएंगे मित्रता के हाथ बढ़ाने पर हाथ थामेंगे, शत्रुता निभाने में भी पीछे नहीं रहेंगे।

पाकिस्तान से निरंतर विरोध 

पाकिस्तान एक छोटा देसहै परन्तु पाकिस्तान का जन्म ही भारत से विरोध पर हुआ है। अतः पाकिस्तान सीमित ही सही परंतु निरंतर परेशान करता रहेगा

भारत की रणनीति 

1 भारत का ऑफिसियल मत है नो फॉरगेट नो फ़ॉरगिव अर्थात न भूलेंगे न माफ़ करेंगे 

2 अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग थलग करना आज पाकिस्तान जिसके समर्थन में अरब के देश थे आज भारत के साथ खड़े हैं।

3. भारत अब पाकिस्तान के परमाणु धमकियों को हल्का कर दिया है।

 बांग्लादेश एक नई समस्या 

हालांकि बांग्लादेश का निर्माण भारत के द्वारा ही हुआ है परंतु बदली हुई परिस्थितियों में बांग्लादेश द्वारा भी भारत को चुनौतियां प्रदान की जा रही है 

 भारत की नीति 

भारत की रणनीति बांग्लादेश के प्रति वेट एंड वॉच की है साथ ही डिप्लोमेटिक अलग थलग करना भी एक परमुख नीति है।

अमेरिका और भारत का सम्बन्ध 

भारत का अमेरिका का संबंध हालांकि स्वतंत्रता केपश्चात से ही है परन्तु समय दर समय सम्बन्ध ऊपर नीचे होते रहे है।

वर्तमान में भारत स्वायत्त के सिद्धांत पर आधारित विदेशी नीति को पालन कर रहा है।

अतः परस्पर लाभ के साथ दोनों देशों में सम्बन्ध अच्छा ही है कुछ वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति के व्यक्तव्यों को अलग थलग कर दिया जाय।

अमेरिका और भारत के साथ सहयोग के क्षेत्र 

1 सैन्य टेक्नोलॉजी का आदान प्रदान 

2 अमेरिका भारत ट्रेड डील 

3 इंडो पैसेफिक क्षेत्र में सहयोग 

भारत रूस सम्बन्ध 

भारत और रूस का सम्बन्ध बहुत पुराना है दोनों देस प्रायः एक दूसरे को टाइम टेस्टेड फ्रेंड के नामकरण से भी पुकारते हैं।

सम्बन्ध के क्षेत्र 

1 ब्रिक्स में साथ 

2 रक्षा उपकरणों में सहयोग 

3 बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में समर्थन 

4 ऊर्जा आपूर्ति में सहयोग 

इंडो पैसेफिक और QUAD 

एक तरफ भारत और चीन के सम्बन्धों में निरंतर सुधार हो रहा है साथ ही भारत इंडो पैसेफिक में अमेरिकन ग्रुप के साथ में एक अलग ही संगठन बनाया हुआ है।

हालांकि भारत इसे व्यापारिक संगठन मानता है परंतु चीन इसे सशंकित निगाहें से देखता है।

भारत का इस क्षेत्र में भूमिका 

1 समुद्री सुरक्षा 

2 मुक्त व्यापारिक आवागमन 

3 छोटे द्वीपीय देशों के साथ सहयोग 

पड़ोसी प्रथम नीति 

भारत की भू राजनीत रणनीति में सबसे महत्वपूर्ण और 2014 से ही ये रणनीति रही है कि पड़ोसी देशों को प्राथमिकता दी जाए।

पड़ोसी प्रथम नीति का कारण है की कोई भी देश शक्तिशाली नहीं हो सकता जब उसका पड़ोस अशांत हो। हिंदी में एक कहावत भी है की महिमा घटी समुद्र की रावण बसा पड़ोस।

जो दर्शाता है की पड़ोसी से सम्बन्ध कितना महत्वपूर्ण है। प्राचीन भारत में भी पड़ोसी राज्य से विवाह सम्बन्ध डिप्लोमेसी प्रेक्टिस की जाती थी। इस का उदाहरण है प्राचीन भारत के शासक विंबसर।

नीति का मुख्य उद्देश्य 

नेपाल,भूटान,अफगानिस्तान श्रीलंका जैसे छोटे पड़ोसी राज्यों से मित्रवत संबन्ध स्थापित करना 

चीन के प्रभाव को संतुलित करना हालांकि चीन ने भी इस क्षेत्र में निवेश कर के इनको डॉलर के इन्फ्लुएंस से दूर ही किया है परंतु भारत का पड़ोसी को भारत के इनफ्लुएंस में ही रहना होना चाहिए।

आर्थिक भू राजनीति: नई शक्तियों का उदय 

भू राजनीत में सैन्य शक्ति होना ही जरूरी नहीं होता है बल्कि आर्थिक शक्ति का होना भी जरूरी होता हैं ऐसा नहीं होता तो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद सोवियत रूस का पतन नहीं होता।

भारत की रणनीत 

1 सप्लाई चैन में भागीदारी 

2 आर्थिक निवेश के लिए खुला रास्ता 

3 डिजिटल और तकनीकी में शक्तिशाली प्रदर्शन 

4 देशों के साथ अलग अलग ट्रेड डील जिसका असर दूरगामी होगा इस पर एक अलग लेख होगा 

इन दूरगामी नीतियों से ही भारत एक आर्थिक शक्तियों के रूप में उभर रहा है।

ग्लोबल साउथ का नेतृत्व 

भारत ग्लोबल साउथ के नेतृत्व करने का दावा कर रहा है। ग्लोबल साऊथ की भौगोलिक स्थिति महत्वपूर्ण है। यह ध्यान देने वाली बात है की ग्लोबल साऊथ में भारत की भागीदारी विकास के मार्ग पर अग्रसित करेगा।

भारत का नेतृत्व का दवा यूं ही नहीं है 

जी 20 मैं इस का उदाहरण मिल चुका है।

विकासशील देशों के मुद्दों का उठाना 

वैक्सीन डिप्लोमेसी इन बात का उदाहरण रहा है 

अफ्रीकीय देशों के साथ सम्बन्ध 

2014 से पहले भारत की नीति में अफ़्रीकी देश में भारतीय इनफ्लुएंस न के बराबर था। जिसके कारण यूरोपीय और अमेरिका के बाद चीन का संबंध बढ़ रहा था।परंतु आज के समय में भारत ने जी20 में अफ़्रीकी देशों का प्रतिनिधित्व को देकर, साथ ही कुछ अफ्रीकी देशों के साथ परस्पर वस्तुओं के आदान प्रदान अर्थात batar व्यापार और तकनीक हस्तरण द्वारा भारत ने अपना इन्फ्लुएंस बढ़ाया है।

चुनौतियां 

भारत को क्षत्रिय शक्ति के रूप मे उभरने के लिए सैन्य साधन का तकनीकी विस्तार हालांकि भारत का इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

न्यायिक व्यवस्था और सिविल सेवाओं में सुधार 

स्थिर शासना व्यवस्था 

हालांकि सभी क्षेत्रों में भारत का प्रदर्शन संतोष जनक है।

निष्कर्ष 

वर्तमान परिस्थिति भारत के पक्ष में है अब भारत को इस समय का सदुपयोग करना है। भारत की भू रणनीति किसी विशेष विचाधारा पर निर्भर नहीं है अपितु स्वतंत्र जीयो और जीनों दो अर्थात वासुदेव कुटुंबकम् पर आधारित है।

आपके अनुसार भारत का आनेवाले वर्षों में क्या नीति रहेगी कॉमेंट में अपने विचार जरूर दर्ज करे शेयर और सब्सक्राइब करना न भूलें 

लेखक 

प्रभु नाथ 

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