यूरोप (EU) डॉलर निर्भरता क्यों घटाने की सोच रहा है? यूरो, ऊर्जा और रणनीतिक स्वायत्तता

 EU Dollar Dependency Analysis

EU dollar dependency euro energy trade

यूरोप डॉलर निर्भरता कम करने की रणनीति


पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के शक्ति केंद्रों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। विशेष रूप से यूरोपीय संघ (EU), जो पारंपरिक रूप से अमेरिकी डॉलर का सबसे बड़ा समर्थक रहा है।

अब अपनी डॉलर निर्भरता (Dollar Dependency) को कम करने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रहा है।

 इस बदलाव के पीछे केवल आर्थिक कारण नहीं हैं, बल्कि 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) की गहरी चाहत और ऊर्जा व्यापार की बदलती गतिशीलता भी शामिल है।

बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी अभी भी 88% पर स्थिर है, लेकिन यूरो की भूमिका और यूरोपीय संघ की नीतियों में एक नई तड़प दिखाई दे रही हैl


Data Snapshot: वैश्विक मुद्रा बाजार की वर्तमान स्थिति

डेटा स्नैपशॉट: वैश्विक मुद्रा परिदृश्य

Indicator Value Source
वैश्विक FX टर्नओवर (प्रति दिन) $7.5 ट्रिलियन BIS Triennial Survey 2022
अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी (FX Trades) 88% BIS Triennial Survey 2022
यूरो की हिस्सेदारी (FX Trades) 30.5% BIS Triennial Survey 2022
वैश्विक आरक्षित भंडार (USD Share) ~59% IMF COFER Data
वैश्विक आरक्षित भंडार (EUR Share) ~20% IMF COFER Data
चीनी युआन (CNY) की हिस्सेदारी (FX Trades) 7% BIS Triennial Survey 2022

नोट: FX ट्रेड शेयर “एक तरफ शामिल” (one-side share) के रूप में रिपोर्ट होते हैं, इसलिए कुल योग 100% से अधिक हो सकता है।

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Global FX Market Share 2022

Euro vs Dollar FX share BIS IMF data
BIS और IMF डेटा के अनुसार मुद्रा हिस्सेदारी


डॉलर dependent होने का अर्थ और यूरोप में इतिहास

अमेरिकी डॉलर पर निर्भर होने का अर्थ यह है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विशेष रूप से ऊर्जा और कमोडिटी का निपटान डॉलर में होता है।

इसके अलावा, दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का एक बड़ा हिस्सा डॉलर में रखते हैं। BIS के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2022 में विदेशी मुद्रा बाजार का दैनिक टर्नओवर $7.5 ट्रिलियन तक पहुँच गया, जिसमें 88% सौदों के एक तरफ डॉलर था।

यूरो की उत्पत्ति और ऐतिहासिक संदर्भ

यूरोपीय संघ ने 1999 में 'यूरो' को एक साझा मुद्रा के रूप में पेश किया था, जिसका एक मुख्य उद्देश्य डॉलर के वैश्विक वर्चस्व को संतुलित करना था।

यूरोपीय नेताओं का मानना था कि एक मजबूत मुद्रा के बिना यूरोप कभी भी पूर्ण 'रणनीतिक स्वायत्तता' प्राप्त नहीं कर सकता। 

हालांकि, शुरुआत में यूरो ने तेजी से विस्तार किया, लेकिन 2008 के वित्तीय संकट और उसके बाद के यूरोज़ोन ऋण संकट ने इसकी गति को कुछ हद तक धीमा कर दिया। 

यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरो की भूमिका अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन यह डॉलर के मुकाबले एक दूर के दूसरे स्थान पर है ।

क्या डॉलर से निर्भरता कम करना सरल है?

डॉलर से दूरी बनाना सुनने में जितना सरल लगता है, वित्तीय बाजारों की जटिलता के कारण यह उतना ही चुनौतीपूर्ण है। इसके कई तकनीकी और संरचनात्मक कारण हैं।

Financial Market Depth Comparison (EUR vs USD)

अमेरिकी ट्रेजरी बाजार दुनिया का सबसे गहरा और सबसे तरल (liquid) वित्तीय बाजार है। इसके मुकाबले, यूरोपीय बॉन्ड बाजार अभी भी खंडित है क्योंकि प्रत्येक सदस्य देश (जैसे जर्मनी, फ्रांस, इटली) अपने स्वयं के बॉन्ड जारी करता है। 

BIS 2022 की रिपोर्ट बताती है कि USD/EUR मुद्रा जोड़ी अभी भी दुनिया में सबसे अधिक ट्रेड की जाने वाली जोड़ी है, जिसकी हिस्सेदारी 22.7% है, जो 2019 के 24% से थोड़ी कम हुई है।

स्रोत 

 तरलता की यह कमी निवेशकों के लिए डॉलर को पहली पसंद बनाए रखती है।

FX Reserves Composition (IMF COFER)

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के 'Currency Composition of Official Foreign Exchange Reserves' (COFER) डेटा के अनुसार, 2023 की तीसरी तिमाही तक वैश्विक भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी लगभग 59% थी, जबकि यूरो की हिस्सेदारी 20% के आसपास स्थिर बनी हुई है

स्रोत 

भंडार में यह स्थिरता दर्शाती है कि केंद्रीय बैंक अभी भी डॉलर को एक 'सुरक्षित पनाहगाह' (Safe Haven) मानते हैं।

ऊर्जा व्यापार में यूरो की भूमिका: एक गेम चेंजर?

यूरोप के लिए डॉलर निर्भरता कम करने का सबसे महत्वपूर्ण मोर्चा ऊर्जा व्यापार है। ऐतिहासिक रूप से, 'पेट्रोडॉलर' व्यवस्था के कारण वैश्विक तेल और गैस का व्यापार डॉलर में ही होता आया है।

EU Energy Import Data और यूरो में सेटलमेंट

यूरोपीय संघ अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। यूरोपीय आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 2021 तक रूस यूरोपीय संघ के लिए प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था।

रोचक तथ्य यह है कि यूरोपीय संघ द्वारा आयात की जाने वाली ऊर्जा का लगभग 80% हिस्सा अभी भी डॉलर में चुकाया जाता है, भले ही वह आयात खुद यूरोपीय देशों के भीतर से या पड़ोसियों से हो ।

इस विसंगति को दूर करने के लिए यूरोपीय आयोग 'ऊर्जा के लिए यूरो' (Euro for Energy) पहल पर जोर दे रहा है।

Euro for Energy Initiative

Euro for Energy Initiative
ऊर्जा व्यापार में यूरो की भूमिका

Russia–Ukraine War Impact on Currency/Energy Trade

फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, स्थिति नाटकीय रूप से बदल गई। अमेरिका द्वारा रूस को SWIFT सिस्टम से बाहर करने और रूसी डॉलर भंडार को फ्रीज करने के फैसले ने यूरोपीय संघ को वित्तीय हथियारकरण'(Financial Weaponization) के जोखिमों के प्रति सचेत कर दिया। 

इसके जवाब में, रूस ने यूरोपीय देशों से गैस के बदले रूबल की मांग की, जिसने ऊर्जा बाजार में डॉलर के एकाधिकार को हिला दिया। हालांकि, यूरोप अब अमेरिकी LNG (Liquefied Natural Gas) पर अधिक निर्भर हो गया है, जो फिर से डॉलर में सेटल होता है, जिससे यह चुनौती और जटिल हो गई है।

 EU के रणनीतिक स्वायत्तता के drivers

रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) शब्द का अर्थ है कि यूरोपीय संघ अपनी सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली के निर्णय बिना किसी बाहरी दबाव (विशेषकर अमेरिका या चीन) के ले सके।

Economic Sovereignty और वित्तीय हथियारकरण

यूरोपीय संघ ने देखा है कि कैसे अमेरिका अपने प्रतिबंधों (Sanctions) के माध्यम से यूरोपीय कंपनियों को उन देशों के साथ व्यापार करने से रोकता है ।

जिनसे अमेरिका के राजनीतिक मतभेद हैं (जैसे ईरान)। जब अमेरिका ने 2018 में ईरान परमाणु समझौते से हटकर प्रतिबंध लगाए, तो यूरोपीय कंपनियां अपनी वैध व्यापारिक गतिविधियों के बावजूद डॉलर आधारित वित्तीय प्रणाली के कारण मजबूर हो गईं। 

इसी 'अतिरिक्त-क्षेत्रीय प्रभाव' (Extraterritoriality) को कम करने के लिए यूरोप यूरो के अंतरराष्ट्रीय उपयोग को बढ़ावा दे रहा है ।

स्रोत 

 H2: Myth vs Fact

Myth vs Fact: EU की डॉलर निर्भरता

संक्षेप में: नीचे दिए गए पॉइंट्स EU की डॉलर निर्भरता को लेकर फैले प्रमुख भ्रम और उनकी वास्तविकता को सरल भाषा में समझाते हैं।

भ्रम 1: डॉलर रातों-रात खत्म हो जाएगा।
तथ्य: डॉलर अभी भी FX ट्रेडिंग में प्रमुख भूमिका निभाता है; इसे विस्थापित होने में लंबा समय लग सकता है।
Source: BIS Triennial Survey 2022
भ्रम 2: यूरो बहुत कमजोर मुद्रा है।
तथ्य: यूरो दुनिया की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण मुद्राओं में है; अंतरराष्ट्रीय भुगतान/ट्रेड में इसकी बड़ी भूमिका रहती है।
Source: ECB / SWIFT (currency usage reports)
भ्रम 3: ऊर्जा व्यापार केवल डॉलर में ही हो सकता है।
तथ्य: व्यवहार में “pricing vs settlement” अलग हो सकते हैं; कुछ सौदों में वैकल्पिक सेटलमेंट विकल्पों/ढाँचों पर काम हुआ है।
भ्रम 4: डी-डॉलरइजेशन केवल चीन और रूस का एजेंडा है।
तथ्य: EU में भी “रणनीतिक स्वायत्तता” और वित्तीय जोखिम-विविधीकरण पर नीति-स्तर की चर्चा होती रही है।
Source: European Commission / ECB publications
भ्रम 5: डिजिटल यूरो का उद्देश्य डॉलर को खत्म करना है।
तथ्य: डिजिटल यूरो का प्राथमिक उद्देश्य घरेलू/क्षेत्रीय भुगतान प्रणाली को मजबूत करना और दक्षता बढ़ाना है।
Source: ECB – Digital Euro
भ्रम 6: रणनीतिक स्वायत्तता का मतलब अमेरिका का विरोध है।
तथ्य: इसका अर्थ अक्सर “विकल्प और लचीलापन” होता है—ताकि वित्तीय जोखिम/झटकों के समय विकल्प उपलब्ध रहें।


निष्कर्ष: यूरोप का लक्ष्य “डॉलर हटाना” नहीं, बल्कि जोखिम घटाकर विकल्प बढ़ाना है—यानी diversification.

क्या यूरो वास्तव में डॉलर को टक्कर दे सकता है?

यथार्थवादी दृष्टिकोण से देखें तो यूरो फिलहाल डॉलर को पूरी तरह से विस्थापित करने की स्थिति में नहीं है। 

BIS 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, जहां डॉलर की वैश्विक हिस्सेदारी 88% पर बनी हुई है, वहीं यूरो की हिस्सेदारी में 2019 के मुकाबले 2% की मामूली गिरावट आई है, जो अब 30.5% है ।

स्रोत

 

इसके अलावा, डॉलर का प्रभुत्व "Network Effects" पर आधारित है। जितना अधिक लोग इसका उपयोग करते हैं, यह उतना ही उपयोगी हो जाता है।

यूरोप को डॉलर को टक्कर देने के लिए एक एकीकृत राजकोषीय नीति (Unified Fiscal Policy) और एक साझा यूरोपीय सुरक्षित संपत्ति (Eurobonds) की आवश्यकता होगी, जिस पर अभी भी सदस्य देशों के बीच मतभेद हैं।

निष्कर्ष 

यूरोपीय संघ की डॉलर निर्भरता कम करने की कोशिशें केवल एक आर्थिक विकल्प नहीं, बल्कि एक **राजनीतिक आवश्यकता** बन गई हैं। 'रणनीतिक स्वायत्तता' के प्रति झुकाव यह सुनिश्चित करने के लिए है कि यूरोप की वित्तीय नियति वाशिंगटन की नीतियों के हाथों में न रहे।

मुख्य बिंदु:

वर्चस्व:

डॉलर अभी भी वैश्विक मुद्रा बाजार का राजा है (88% शेयर), लेकिन इसकी हिस्सेदारी में विविधता की मांग बढ़ रही है (Source: BIS 2022)।

ऊर्जा:

यूरोप अपनी ऊर्जा खरीद को यूरो में स्थानांतरित करने का प्रयास कर रहा है ताकि मुद्रा जोखिम (Currency Risk) को कम किया जा सके।

हथियारकरण:

वित्तीय प्रतिबंधों ने यूरोप को वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है।

चुनौती:

यूरो की तरलता और यूरोपीय बॉन्ड बाजार का खंडित होना डी-डॉलरइजेशन की राह में सबसे बड़ी बाधा है।

भविष्य:

हम 'एक-ध्रुवीय मुद्रा जगत' से 'बहु-ध्रुवीय मुद्रा जगत' की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ यूरो, युआन और डिजिटल मुद्राएं डॉलर के एकाधिकार को चुनौती देंगी।

FAQs :

प्रश्न 1: 

उत्पीय संघ डॉलर की जगह यूरो का उपयोग क्यों बढ़ाना चाहता है?

उत्तर:

इसका मुख्य कारण अपनी आर्थिक और राजनीतिक स्वायत्तता की रक्षा करना है। डॉलर के अत्यधिक उपयोग से यूरोपीय देश अमेरिकी प्रतिबंधों और डॉलर की विनिमय दर में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं ।

प्रश्न 2: 

क्या यूरो कभी डॉलर की जगह ले पाएगा?**

उत्तर: 

निकट भविष्य में यह मुश्किल है। डॉलर की वैश्विक हिस्सेदारी 88% है, जबकि यूरो की 30.5%। हालांकि, ऊर्जा व्यापार में यूरो की भूमिका बढ़ने से यह डॉलर के एकाधिकार को कम कर सकता है 

प्रश्न 3:

रूस-यूक्रेन युद्ध ने यूरो की भूमिका को कैसे प्रभावित किया?

उत्तर: 

युद्ध ने यूरोप को यह एहसास दिलाया कि डॉलर आधारित प्रणाली का उपयोग भू-राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा सकता है। इसके कारण यूरोप अब वैकल्पिक वित्तीय चैनलों और यूरो में ऊर्जा भुगतान पर अधिक ध्यान दे रहा है 

प्रश्न 4: 

ऊर्जा के लिए यूरो' (Euro for Energy) पहल क्या है?

उत्तर: 

यह यूरोपीय आयोग की एक योजना है जिसके तहत सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा अनुबंधों (तेल और गैस) के लिए डॉलर के बजाय यूरो में भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है 

स्रोत 

प्रश्न 5: 

क्या अन्य मुद्राएं भी डॉलर को चुनौती दे रही हैं?

उत्तर: 

हाँ, BIS 2022 सर्वे के अनुसार चीनी युआन (CNY) की हिस्सेदारी बढ़कर 7% हो गई है, जिससे यह दुनिया की 5वीं सबसे अधिक ट्रेड की जाने वाली मुद्रा बन गई है

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लेखक 

प्रभु नाथ 

एक स्वतंत्र विश्लेषक 



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