काफी समय से मीडिया हो या सोशल मीडिया कुछ लोगों का यही सवाल रहता है की सरकार महंगाई को कम क्यों नहीं कर रही है।
मंडिया या सोशल मीडिया की बातों को एक बार के लिए नजरअंदाज कर के इकॉनमी सर्वे आफ इंडिया और RBI के आंकड़ों को देखते है।
सब्ज़ियों, अनाज और रोज़मर्रा की चीज़ों के दामों में कुछ हद तक राहत ज़रूर दिख रही है, लेकिन इसे केवल बाज़ार की अस्थायी स्थिति मानना सही नहीं होगा।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से जुड़े आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि महंगाई में आई गिरावट कई नीतिगत फैसलों, वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू आपूर्ति सुधारों का परिणाम है।
इस लेख में हम इन्हीं तथ्यों के आधार पर समझेंगे कि भारत में महंगाई क्यों कम हो रही है ।
महंगाई की मौजूदा स्थिति क्या कहती है?
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत में मुद्रास्फीति (Inflation) अब “नियंत्रित और स्थिर” स्थिति में आ गई है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान औसत CPI महंगाई लगभग 1.7% के स्तर पर रही, जो हाल के वर्षों की तुलना में काफ़ी कम है।
खास बात यह है कि खाद्य महंगाई (Food Inflation) में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। जून 2025 के बाद कई महीनों तक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता या हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिसे तकनीकी रूप से डिफ्लेशन कहा जाता है। इससे आम परिवारों के मासिक खर्च पर सीधा सकारात्मक असर पड़ा।
Food Inflation और Core Inflation में अंतर
महंगाई को समझने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि Food Inflation और Core Inflation क्या होती हैं।
Food Inflation क्या है?
Food Inflation उन वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाती है, जिनका संबंध सीधे खाने-पीने से होता है, जैसे: अनाज दालें सब्ज़ियाँ दूध और दुग्ध उत्पाद
इन वस्तुओं की कीमतें मौसम, फसल, आपूर्ति और भंडारण जैसे कारकों से जल्दी प्रभावित होती हैं।
Core Inflation क्या है?
Core Inflation में खाने-पीने और ईंधन (Fuel) जैसी अस्थिर कीमतों वाली वस्तुओं को शामिल नहीं किया जाता। इसमें मुख्य रूप से: कपड़े,शिक्षा,स्वास्थ्य,परिवहन और सेवाएँ शामिल होती हैं। यह महंगाई की अधिक स्थिर तस्वीर दिखाती है।
आर्थिक सर्वेक्षण की तालिका 9.1 के अनुसार,नीति-निर्माताओं के लिए Food Inflation और Core Inflation को अलग-अलग देखना ज़रूरी है, ताकि सही मौद्रिक और राजकोषीय फैसले लिए जा सकें।
महंगाई कम होने की प्रमुख वजहें
1 वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता
पिछले वर्ष वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रहीं। चूँकि भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में स्थिरता से परिवहन लागत कम हुई उत्पादन लागत पर दबाव घटा ईंधनvआधारित महंगाई नियंत्रित रही
2 खाद्य आपूर्ति में सुधार
सरकार द्वारा भंडारण क्षमता बढ़ाने आवश्यक वस्तुओं की समय पर आयात-निर्यात नीति राज्यों के साथ बेहतर समन्वय
जैसे कदम उठाए गए, जिससे खाद्य आपूर्ति बेहतर हुई। इसका सीधा असर सब्ज़ियों और अनाज की कीमतों पर पड़ा।
3 RBI की मौद्रिक नीति की भूमिका
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए रेपो रेट और अन्य मौद्रिक उपकरणों का संतुलित उपयोग किया।जब ब्याज दरें नियंत्रित रहती हैं:बाज़ार में नकदी संतुलन बना रहता है मांग अत्यधिक नहीं बढ़ती कीमतों पर दबाव कम होता है
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, RBI का मौद्रिक प्रबंधन पहले की तुलना में अधिक परिष्कृत और प्रभावी हुआ है।
ब्याज दरों और महंगाई का आपसी संबंध
ब्याज दरें और महंगाई एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी होती हैं।उच्च
ब्याज दरें → कर्ज़ महँगा → खर्च कम → महंगाई पर लगाम
निचली ब्याज दरें → कर्ज़ सस्ता → खर्च बढ़ता → महंगाई बढ़ने की संभावना
RBI ने इस संतुलन को ध्यान में रखते हुए नीति अपनाई, ताकि न तो अर्थव्यवस्था की रफ्तार रुके और न ही महंगाई बेकाबू हो।
आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ा?
क्रय शक्ति में सुधार:
महंगाई के “नियंत्रित और स्थिर” रहने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि लोगों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) सुरक्षित रहती है। जब रोज़मर्रा की चीज़ें महँगी नहीं होतीं, तो परिवार का मासिक बजट संतुलित रहता है बचत की गुंजाइश बढ़ती है मध्यम और गरीब वर्ग को राहत
कम महंगाई का सीधा लाभ मध्यम और निम्न आय वर्ग को मिलता है।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, जब महंगाई कम होती है:
परिवार शिक्षा और स्वास्थ्य पर ज़्यादा खर्च कर पाते हैं आकस्मिक खर्च से निपटना आसान होता है। सीधे शब्दों में काहे तो महंगाई कम होने का लाभ सीधे तौर पर। माध्यम वर्ग पर ही पड़ता है।
ग्रामीण विकास पर असर
सर्वेक्षण में ग्रामीण विकास और सामाजिक प्रगति पर भी ज़ोर दिया गया है। खाद्य सुरक्षा और स्थिर कीमतों से ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर बेहतर होता है।
क्या यह राहत स्थायी है?
यह एक अहम सवाल है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक हालात स्थिर रहे मानसून सामान्य रहा और नीतिगत संतुलन बना रहा तो महंगाई पर काबू बनाए रखना संभव है।
हालाँकि, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, तेल की कीमतों में अचानक उछाल या मौसम संबंधी जोखिम भविष्य में चुनौती बन सकते हैं।
परन्तु गौर करने वाली बात यह है की तेल कीमतें नहीं बढ़ने वाली क्योंकि वभारत के पास तेल खरीद के ऑप्शन बहुत है।
माध्यम वर्ग के लिए सुझाव:
महंगाई भले ही कम हो, बचत और खर्चे के बीच संतुलन हमेशा बना रहना चाहिए।
F A Q
Q:
क्या महंगाई सच में कम हुई है?
A ;
हां इकनॉमी सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट यही बता रही है ।
Q :
क्या महंगाई कम होने से सारी वस्तुएं सस्ती हो जाती है
A:
नहीं, महंगाई कम होने का तात्पर्य यह है की जरूरत की वस्तुएं का मूल्य कम होना।
निष्कर्ष:
महंगाई कम होने का असली मतलब आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 और RBI के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत में महंगाई कम होने के पीछे संयोग नहीं, बल्कि नीतिगत संतुलन है।
खाद्य आपूर्ति में सुधार, वैश्विक कीमतों की स्थिरता और संतुलित मौद्रिक नीति ने मिलकर स्थिति को संभाला है। इसका सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिला है, जिनका दैनिक खर्च कुछ हद तक स्थिर हुआ है।
डाटा स्रोत
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CPI _🔗
इकनॉमी सर्व ऑफ इंडिया _🔗
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लेखक
एक स्वतंत्रता विश्लेषक

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