NCERT और भारत की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव
NCERT और नई शिक्षा नीति के तहत बदलती भारतीय शिक्षा व्यवस्थाभारत की शिक्षा व्यवस्था में NCERT का नाम अक्सर चर्चा में रहता है। स्कूल की किताबों से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक, NCERT की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। लेकिन हाल के वर्षों में NCERT में बदलाव और शिक्षा नीति में सुधार को लेकर बहस तेज हुई है।
NCERT क्या है?
एनसीईआरटी ('राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद')भारत सरकार का एक प्रमुख स्वायत्त संगठन था।NCERT की स्थापना 1961 हुआ था।
इस संस्थान का काम प्रमुखतः पाठयपुस्तकों का पाठ्यक्रम निर्धारण करना था। सीबीएसई और अन्य शिक्षा बोर्ड इस से ही प्रेरणा लेकर अपने पाठ्यक्रम का निर्धारण करते थे।
यही नहीं सरकारी संस्थाओं में प्रवेश हेतु परीक्षा के विषय वस्तु का मुख्य आधार NCERT के पाठ्यक्रम ही थे। इसका प्रमुख कार्य मुख्यतः रिसर्च के द्वारा सही डाटा प्रस्तुत करना था।
NCERT का महत्व
NCERT का उद्देश्य केवल किताबें प्रकाशित करना नहीं है, बल्कि शिक्षा को वैज्ञानिक, तार्किक और समावेशी बनाना है।
इसके द्वारा तैयार पाठ्यक्रम:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप होता है। पूरे देश में समान शैक्षिक आधार प्रदान करता है
सामाजिक, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित करने का प्रयास करता है
इसी कारण इसे भारतीय शिक्षा प्रणाली की रीढ़ माना जाता है।
क्या NCERT अपना कार्य सुचारू रूप से कर रही थी?
इस बात पर की क्या NCERT द्वारा प्रस्तुत DATA पूर्णतया प्रामाणिक है इस में कई लोग विरोध करते थे। कई लोगों का यह मानना था की NCERT जैसे संस्थानों पर वामपंथी विचारधारा का कब्जा है।
उनका कहना था की इतिहास जैसे विषयो पर NCERT पुस्तकों में मुगल साम्राज्य की प्रशंसा और विस्तृत कंटेंट की ?अधिकता है और भारतीय राजाओं का कंटेंट बिल्कुल भी नहीं दिखती हैं।
वर्तमान स्थिति और उसमें बदलाव
NCERT वर्तमान मे शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली एक स्वायत्त संस्थान है इसका कार्य उपरोक्त कथनों में बता दिया गया है परंतु अब इसकी स्थिति परिवर्तन होने वाला है।
भारत सरकार के अनुसार तीन प्रमुख शैक्षिक संस्थाओं को एक अंब्रेला के अंतर्गत लाना है इसका पूरा ड्राफ्ट पहले से ही तैयार हुआ पड़ा है।
जबतक नई संस्थान पूर्ण रूप से कार्यरत नहीं होती तब तक इन संस्थाओं के दिशा निर्देश लागू रहेंगे। नई संस्था के नए निर्देश आने पर इन पुरानी संस्थाओं के निर्देशों स्वतः ही समाप्त हो जाएगा।
कारण क्या है इन संस्थाओं में बदलाव का ?
किसी भी व्यवस्था जो पुरानी हो गई हो उस में कुछ समय अंतराल पर निरंतर बदलाव करते रहना चाहिए। NCERT जैसे संस्थान भी पुराना हो चुका था। उसका उद्देश्य भी। साथ ही कार्यप्रणाली भी प्रश्नवाचक हो चुका था।
सरकार के पिघले कार्यप्रणाली में भी जिन संस्थाओं पर प्रश्न उठे हैं उन में अमूल चामूल परिवर्तन दिखता रहा है। उसका प्रमाण योजना आयोग को परिवर्तित कर के नीति आयोग का निर्माण। परिवर्तन के बाद संस्थान के कार्यप्रणाली में भी परिवर्तन दिखा है और उसके उद्देश्य में भी
NCERT बदलाव में सरकार की मंशा क्या है?
NCERT में बदलाव में मंशा कई हो सकते हैं परंतु मेरा अवलोकन कहता है की NCERT और अन्य संस्थान की कार्यप्रणाली में परिवर्तन करके सरकार चाहती है।
भारतीय पुरातन व्यवस्था को पुनर्जीवन प्रदान करना इस से पहले IIT में गुरुकुल व्यवस्था से पढ़े हुए विद्यार्थियों को प्रवेश का रास्ता देकर संकेतन कर चुकी है।
शिक्षा में संतुलन क्यों जरूरी है?
शिक्षा केवल अतीत को समझने का माध्यम नहीं है, बल्कि भविष्य निर्माण का आधार है।
एक प्रभावी शिक्षा प्रणाली:
वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करती है। आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देती है।
सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराती है ,वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करती है।
इसलिए पाठ्यक्रम में बदलाव का उद्देश्य संतुलित और व्यापक दृष्टिकोण होना चाहिए।
निष्कर्ष
पुरानी व्यवस्था समाप्त होती है नई व्यवस्था जीवित होती है। हमे हर नई व्यवस्था का समर्थन करना चाहिए और साथ ही नजर बनाए रखना चाहिए। ताकि कमियों को दूर किया जा सके।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. NCERT की स्थापना कब हुई थी?
A. NCERT की स्थापना 1961 में की गई थी।
Q2. NCERT का मुख्य कार्य क्या है?
A. यह स्कूल पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों का विकास, अनुसंधान और शिक्षक प्रशिक्षण का कार्य करता है।
Q3. क्या NCERT केवल CBSE के लिए है?
A. नहीं। कई राज्य बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाएँ भी NCERT पाठ्यक्रम को आधार मानते हैं।
Q4. शिक्षा में बदलाव क्यों जरूरी होता है?
A. समय, तकनीक और समाज की आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा को अद्यतन करना जरूरी होता है।
Q5. क्या NCERT में बदलाव से शिक्षा पर प्रभाव पड़ेगा?
A. संभावित बदलाव शिक्षा के स्वरूप को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए उन्हें समझना और मूल्यांकन करना आवश्यक है।
जनता से सवाल
क्या NCERT के आधिकारों को सीमित करना चाहिए, अपना उत्तर कमेंट सेक्शन में आवश्य दें।
लेखक
प्रभु नाथ
एक स्वतंत्र विश्लेषक
Last update
28/02/2026


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