ईरान का तख्ता पलट क्यों
अंतरराष्ट्रीय राजनीत को लगभग 200से300 वर्षों से जो तत्व संचालित कर रहे हैं। उनको गहरा
राज्य या वैश्विक मार्केट संचालक तत्व या डीप स्टेट कह सकते है , जो अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के अपरोक्ष रूप से जिम्मेदार हैं।
वहीं तत्वों का निर्णय है जिसके कारण ईरान एक मुस्लिम राष्ट्र की पहचान खोकर एक क्रिश्चियन राष्ट्र के रूप मे प्रवर्तित हो जाएगा।
ईरान 40 साल पहले
ईरान चालीस साल पहले एक खुली विचारधारा वाला राष्ट्र था परंतु अंतर्राष्ट्रीय राजनीत में उठा पटक जारी रहता है। उस समय के आवश्यकता के अनुसार डीप स्टेट के लिए ईरान की कोई महत्ता न होने की वजह और उस समय के शासक का रूस के प्रति झुकाव कारण बना ईरान को एक मार्डन राष्ट्र से एक कट्टर मुस्लिम देश के रूप में परवर्ती होने में।
क्या कारण है क्रिश्चियन राष्ट्र मे प्रवृत्ति होने का?
मुस्लिम कट्टरपंथी नेता और मुस्लिम धार्मिक संगठन के अत्यधिक कठोरता और अन्याय पूर्ण शासन ही इसका कारण है दूसरा कारण है। पश्चिमी राष्ट्र के द्वारा आर्थिक सामरिक सहयोग।
दूसरा एक और कारण है इरान का इजराइल से दुश्मनी का व्यवहार। चुकी इजरायल एक शक्तिशाली राष्ट्र है और ईरान उसके लिए खतरा है। अतः इसराइल के पक्ष में है एक खुली विचारधार वाला ईरान।
तीसरा कारण है डेडोलरिजेशन जब डीप स्टेट द्वारा डॉलर को एक अंतर्राष्ट्रीय फिएट करेंसी बनानी थी,पेट्रोल जो उस समय के लिए एक आवश्यक तत्व था ऊर्जा के लिए। और अंतरराष्ट्रीय संचालन को नियंत्रित करने हेतु। यह जरूरी था कि जो भी राष्ट्र तुलनात्मक रूप से शक्तिशाली है उनके सामने एक दुश्मन राष्ट्र स्थापित किया गया।
इजरायल के लिए ईरान भी एक दुशमन राष्ट्र के रूप में था। साथ ही सऊदी अरब जो की एक सुनी बहुल देश है को भी संचालित किया जा सकता था।एक शिया बाहुल्य ईरान के द्वारा।
अब डिडॉलराइजेशन के दौर में उसकी आवश्यकता नहीं है। अतः कट्टरता को खत्म होना अवश्यक है। और चुकी क्रिस्चियन राष्ट्र के पास अभी करेंसी पवार है अतः वो ही अपने पंथ का प्रचार प्रसार करेंगे।
चौथा कारण है कि 40 वर्ष पहले जब ईरान आधुनिक था तब के लोगों का मानना है कि क्रिश्चियन ही अत्यधिक खुले विचार वाले होते हैं।
लेखक
प्रभु नाथ
एक स्वतंत्र विश्लेषक
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