भारत में चुनाव कैसे होते हैं? Election Process, EVM, और NOTA की पूरी जानकारी

भारत में चुनाव कैसे होते हैं? Election Process, EVM, VVPAT और NOTA

भारत में चुनाव प्रक्रिया, EVM, VVPAT और NOTA की जानकारी वाला इन्फोग्राफिक
भारत में चुनाव कैसे होते हैं? मतदाता सूची से लेकर मतदान, EVM-VVPAT, मतगणना और परिणाम तक पूरी चुनाव प्रक्रिया।


लोकतांत्रिक देशों में सबसे बड़ी जनसंख्या होने के कारण भारत दुनिया में सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राष्ट्र है। यहां की लोकतांत्रिक जड़ें इतनी गहरी है कि भारत में लोकतंत्र ग्राम पंचायत जैसे प्रथमिक लोकतंत्र से आरम्भ होती है।

इस लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण प्रक्रिया है चुनाव, अब चाहे राज्य की विधानसभा का चुनवा हो केंद्र का चुनाव भारत में इन चुनावों में करोड़ों लोग अपने प्रतिनिधि को चुनाव करने के लिए मतदान करते हैं।

लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर करोड़ों की जनसंख्या वाले इस देशभारत में चुनाव कैसे होते हैं, Election Commission of India चुनाव कैसे कराता है और EVM में आपका वोट आखिर कैसे दर्ज होता है?

अगर आप यह जानना चाहते हैं कि election process in India, EVM कैसे काम करता है, voting system India explained या भारत में चुनाव कैसे होते ?तो यह लेख आपके लिए है।

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भारत में चुनाव कैसे होते हैं?

भारत में चुनाव की प्रक्रिया मतदाता सूची तैयार करने से शुरू होती है। इसके बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित होता है, उम्मीदवार नामांकन दाखिल करते हैं, नामांकन की जांच और नाम वापसी होती है। फिर प्रचार अभियान, मतदान, EVM-VVPAT के जरिए वोट रिकॉर्ड करना, मतगणना और परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया पूरी होती है। इन चुनावों का संचालन Election Commission of India यानी भारत निर्वाचन आयोग करता है।

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मतदाता सूची
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चुनाव कार्यक्रम
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नामांकन
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प्रचार
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मतदान
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EVM-VVPAT
📊
मतगणना
🏆
परिणाम
संक्षेप में: मतदाता सूची → चुनाव कार्यक्रम → नामांकन → प्रचार → मतदान → EVM-VVPAT → मतगणना → चुनाव परिणाम

भारत में चुनाव कौन कराता है?

भारत में चुनाव संचालन की व्यवस्था Election Commission of India (ECI) द्वारा होता है। यह एक संवैधानिक और स्वायत्त संस्था है।

ECI द्वारा लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों की प्रक्रिया संपन्न कराई जाती है।

चुनाव आयोग केवल मतदान को ही संपन्न नहीं करता है बल्कि मतदाता सूची को बनना, चुनाव कार्यक्रम तैयार करना, उम्मीदवारों की नामांकन प्रक्रिया, चुनाव में मतदान केंद्र निर्धारण की व्यवस्था EVM-VVPAT  तैयार करना और मतदान से लेकर मतगणना तक की व्यवस्था सुचारू रूप से आयोजित करने की जिम्मेदारी ECI का ही है।

भारत में चुनाव की पूरी प्रक्रिया क्या है?

भारत में चुनाव की पूरी प्रक्रिया चरण दर चरण आसान शब्दों में निम्नलिखित है:

1. मतदाता सूची तैयार होती है:

चुनावों में मतदान से पहले मतदावों की सूची चुनाव आयोग द्वारा तैयार की जाती है, यह चुनाव आयोजन की पहलीमहत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में पात्र नागरिकों को मतदान करने के लिए Electoral Roll यानि मतदाता सूची में नामकरण किया जाता है।

जो भी नागरिक मतदान कराना चाहता है उसके लिए यह जरूरी होता है कि मतदान करने से पहले चुनाव आयोग के मतदाता सूची पोर्टल पर विजिट कर अपना नाम चेक कर ले कि उसका नाम सूची में है या नहीं।

2. चुनाव कार्यक्रम की घोषणा

भारत में चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूचि को जारी होने के बाद जो दूसरी प्रक्रिया होती है वह है चुनाव कार्यक्रम की घोषणा, अर्थात चुनाव कब किसक्षेत्र में होना है उसका समय निर्धारण।

चुनाव कार्यक्रम के साथ चुनावी प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ती है।

3. उम्मीदवारों का नामांकन:

मतदान कार्यक्रम घोषित होने के बाद जो अगला चरण आरम्भ होता है वह है प्रत्याशियों का नामांकन, अर्थात जो जन प्रतिनिधि अपने क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करने की इच्छा रखते हैं उनका नामकरण होता है।

इसके बाद Returning Officer यानी निर्वाचन अधिकारी नामांकन पत्रों की जांच करता है। नियमों के अनुसार योग्य उम्मीदवारों की सूची आगे बढ़ती है।

4. नामांकन वापस लेने का मौका:

नामांकन की जांच के बाद उम्मीदवारों को निर्धारित समय के भीतर अपना नाम वापस लेने का अवसर मिलता है।

इसके बाद चुनाव लड़ने वाले अंतिम उम्मीदवारों की सूची तैयार होती है।

5. चुनाव प्रचार

उम्मीदवार और राजनीतिक दल मतदाताओं के सामने अपने मुद्दे और घोषणाएं रखते हैं।

चुनाव प्रचार के दौरान चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित नियमों और Model Code of Conduct यानी आदर्श आचार संहिता का पालन करना होता है।

6. मतदान केंद्र तैयार किए जाते हैं

हर निर्वाचन क्षेत्र में मतदान केंद्र बनाए जाते हैं। वहां मतदान अधिकारी, EVM, VVPAT और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की जाती हैं।

मतदान केंद्र पर मतदाता की पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे वोट डालने की अनुमति मिलती है।

EVM कैसे काम करता है?

EVM यानी Electronic Voting Machine भारत के चुनावी सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

ECI के अनुसार EVM में मुख्य रूप से Control Unit और Ballot Unit होते हैं। Ballot Unit मतदान कक्ष में रहती है, जबकि Control Unit मतदान अधिकारी के पास रहती है।

मतदाता की पहचान और मतदान की अनुमति मिलने के बाद मतदान अधिकारी Control Unit से Ballot Button सक्रिय करता है।

इसके बाद मतदाता Ballot Unit पर अपने पसंदीदा उम्मीदवार के नाम या चुनाव चिह्न के सामने दिए गए बटन को दबाता है।

बटन दबाने के बाद मशीन वोट रिकॉर्ड करती है और एक बीप सुनाई देती है।

इस पूरी प्रक्रिया को बहुत सरल तरीके से ऐसे समझ सकते हैं:

मतदाता की पहचान → मतदान अधिकारी की अनुमति → उम्मीदवार के सामने बटन दबाना → EVM में वोट रिकॉर्ड → VVPAT से सत्यापन

VVPAT क्या है?

VVPAT का पूरा नाम Voter Verifiable Paper Audit Trail है।

जब मतदाता EVM पर बटन दबाता है, तो VVPAT के जरिए एक पेपर स्लिप दिखाई देती है। इस स्लिप पर उम्मीदवार का नाम, क्रमांक और चुनाव चिह्न दिखाई देता है। ECI के अनुसार यह स्लिप मतदाता को लगभग 7 सेकंड तक दिखाई देती है।

इसका उद्देश्य मतदाता को यह सत्यापित करने का अवसर देना है कि उसका वोट किस उम्मीदवार के लिए दर्ज हुआ।


VVPAT क्या है? EVM में वोट की पुष्टि कैसे होती है

VVPAT क्या है और EVM पर वोट डालने के बाद पेपर स्लिप कैसे दिखाई देती है
VVPAT मतदाता को EVM पर डाले गए वोट की पेपर स्लिप के जरिए पुष्टि करने का अवसर देता है।


EVM की सुरक्षा और जांच कैसे होती है?

EVM को सीधे मतदान के दिन इस्तेमाल नहीं किया जाता। चुनाव से पहले इन मशीनों की जांच और तैयारी के कई चरण होते हैं।

ECI के अनुसार EVM और VVPAT की First Level Checking यानी FLC की जाती है। इसके बाद EVM की दो बार Randomization यानी रैंडम तरीके से आवंटन की प्रक्रिया होती है।

पहली Randomization में मशीनों को विधानसभा क्षेत्र के स्तर पर आवंटित किया जाता है और दूसरी Randomization में उन्हें मतदान केंद्रों के लिए आवंटित किया जाता है।

इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी होती है।

चुनाव से पहले Mock Poll भी कराया जाता है ताकि मशीन और मतदान प्रक्रिया की जांच की जा सके।

ECI की जानकारी के अनुसार कुछ चुनी गई EVMs पर बड़े स्तर का Mock Poll भी किया जाता है और इलेक्ट्रॉनिक परिणाम का VVPAT स्लिप से मिलान किया जाता है।

मतदान के बाद EVM का क्या होता है?

मतदान समाप्त होने के बाद EVM को सील किया जाता है। इसके बाद मशीनों को निर्धारित Collection Centre और फिर Strong Room में रखा जाता है।

ECI के अनुसार उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों को Strong Room की सुरक्षा और सीलिंग प्रक्रिया को देखने की अनुमति होती है। Counting Day पर Strong Room उम्मीदवारों और संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में खोला जाता है।

इसके बाद Control Unit से उम्मीदवारों के वोटों की संख्या प्राप्त की जाती है और मतगणना की प्रक्रिया पूरी होती है।

EVM vs Ballot Paper: दोनों में क्या अंतर है?

पहले चुनावों में मुख्य रूप से Ballot Paper का इस्तेमाल होता था। इसमें मतदाता कागज पर अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने निशान लगाकर वोट देता था।

EVM में वोट इलेक्ट्रॉनिक तरीके से रिकॉर्ड होता है।

EVM के प्रमुख फायदे:

- वोट रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया तेज होती है।

- मतगणना में समय कम लग सकता है।

- कागज की जरूरत कम होती है।

- VVPAT के जरिए वोट का पेपर सत्यापन उपलब्ध होता है।

- EVM को Randomization और सुरक्षा प्रक्रियाओं के तहत इस्तेमाल किया जाता है।

Ballot Paper की विशेषता

Ballot Paper में मतदाता के सामने कागज पर उम्मीदवारों की सूची होती है और वोट कागज के जरिए दर्ज होता है।

इसलिए EVM vs Ballot Paper की बहस को समझते समय केवल मशीन की तुलना करना पर्याप्त नहीं है। चुनावी प्रक्रिया में सुरक्षा, पारदर्शिता, प्रशासनिक व्यवस्था, सत्यापन और मतगणना जैसे सभी पहलुओं को देखना जरूरी है।

NOTA क्या है?

NOTA का अर्थ है None of the Above, यानी इनमें से कोई नहीं।

यदि मतदाता को चुनाव लड़ रहे किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देना है, तो वह NOTA का विकल्प चुन सकता है।

EVM में उम्मीदवारों की सूची के साथ NOTA का विकल्प भी उपलब्ध होता है। ECI के EVM FAQ में भी NOTA को उम्मीदवारों के साथ VVPAT प्रक्रिया में शामिल बताया गया है।

NOTA का क्या असर होता है?

NOTA मतदाता को यह बताने का विकल्प देता है कि उसे दिए गए उम्मीदवारों में से कोई भी पसंद नहीं है।

लेकिन सामान्य चुनाव परिणाम के संदर्भ में NOTA को सबसे अधिक वोट मिलने का अर्थ यह नहीं है कि चुनाव रद्द हो जाता है या सभी उम्मीदवारों को दोबारा चुनाव लड़ने से रोक दिया जाता है।

इसलिए NOTA को मतदाता की असहमति दर्ज करने का विकल्प समझना अधिक सही है।

भारत में मतदान से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े

लोकसभा चुनाव 2024 में, Surat लोकसभा सीट को छोड़कर 542 निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 64.64 करोड़ वोट पड़े। कुल मतदाता संख्या लगभग 97.98 करोड़ थी और कुल मतदान प्रतिशत 66.10% रहा।

लोकसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत

2009 से 2024 तक कुल मतदाता मतदान

लोकसभा चुनाव मतदान प्रतिशत
2009 58.21%
2014 66.44%
2019 67.40%
2024 66.10%
क्या पता चलता है?
2009 के मुकाबले 2014 में मतदान प्रतिशत में बड़ी वृद्धि हुई। 2019 में यह 67.40% तक पहुंचा, जबकि 2024 में मतदान प्रतिशत 66.10% रहा।

स्रोत: Election Commission of India, Lok Sabha Elections Atlas 2024

इन आंकड़ों से पता चलता है कि 2009 के मुकाबले 2014 में मतदान में बड़ी वृद्धि हुई। 2019 में यह 67.40% तक पहुंचा, जबकि 2024 में मतदान प्रतिशत 66.10% रहा।


Graph Snippet: मतदान प्रतिशत का ट्रेंड


ऊपर दिए गए ग्राफ में 2009 से 2024 तक लोकसभा चुनावों के मतदान प्रतिशत को देखा जा सकता है। यह डेटा Election Commission of India के 2024 Atlas पर आधारित है।

लोकसभा चुनावों में मतदाता मतदान प्रतिशत

निर्वाचन आयोग के अनुसार 2009 से 2024 तक लोकसभा चुनावों में कुल मतदान प्रतिशत।

58.21%
2009
66.44%
2014
67.40%
2019
66.10%
2024
मतदाता मतदान: 2019 में 67.40% मतदान के साथ इस अवधि का उच्चतम स्तर दर्ज हुआ।

स्रोत: Election Commission of India, Lok Sabha Elections Atlas 2024


लोकसभा चुनावों में मतदाता मतदान प्रतिशत 2009 से 2024
2009 से 2024 तक लोकसभा चुनावों में मतदाता मतदान प्रतिशत का डेटा
2009 से 2024 तक लोकसभा चुनावों में कुल मतदाता मतदान प्रतिशत, जिसमें 2019 में 67.40% सबसे अधिक मतदान रहा।


क्या EVM इंटरनेट से जुड़ी होती है?

यह सवाल EVM को लेकर अक्सर पूछा जाता है।

ECI के अनुसार चुनाव में इस्तेमाल होने वाली EVM standalone मशीनें हैं और उन्हें किसी wired या wireless network से जोड़ा नहीं जाता। ECI अपने FAQ में यह भी बताता है कि EVM में सामान्य operating system का इस्तेमाल नहीं होता।

हालांकि, EVM की सुरक्षा को केवल तकनीकी डिजाइन से नहीं समझना चाहिए। मशीन की जांच, Randomization, Mock Poll, सीलिंग, Strong Room और मतगणना जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी चुनावी सुरक्षा का हिस्सा हैं।

भारत की चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता कैसे बढ़ाई जाती है?

चुनाव में केवल EVM ही महत्वपूर्ण नहीं है। पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर निगरानी और सत्यापन होता है।

मतदान केंद्र पर polling agents मौजूद रह सकते हैं। EVM की Randomization, Mock Poll, सीलिंग, परिवहन, Strong Room और Counting जैसी प्रक्रियाओं में उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों की भागीदारी के प्रावधान हैं।

मतदान के दौरान turnout data भी अलग-अलग समय स्लॉट में दर्ज और प्रकाशित किया जाता है। ECI के अनुसार voter turnout module में 9 बजे, 11 बजे, 1 बजे, 3 बजे, 5 बजे और 7 बजे जैसे समय स्लॉट में डेटा दर्ज किया जाता है तथा बाद में अंतिम रिपोर्ट तैयार होती है।

चुनाव परिणाम कैसे घोषित होता है?

मतदान पूरा होने के बाद EVM को सुरक्षित Strong Room में रखा जाता है।

Counting Day पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार Strong Room खोला जाता है। इसके बाद EVM की Control Unit से वोटों की संख्या प्राप्त की जाती है।

ECI के अनुसार मतगणना उम्मीदवारों और उनके अधिकृत counting agents की मौजूदगी में की जाती है।

हर उम्मीदवार को मिले वोटों की गणना के बाद परिणाम तैयार किया जाता है और Returning Officer परिणाम घोषित करता है।

भारत में चुनाव क्यों महत्वपूर्ण हैं?

चुनाव केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं है। यह नागरिकों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अधिकार देता है।

एक मतदाता का वोट उसके क्षेत्र के प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक व्यवस्था में भागीदारी का माध्यम है।

इसलिए चुनाव के बारे में सही जानकारी होना जरूरी है। EVM कैसे काम करती है, NOTA क्या है, मतदान कैसे होता है और वोटों की गिनती कैसे होती है—इन सवालों के जवाब समझने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

निष्कर्ष:

भारत का चुनाव प्रक्रिया कई चरणों में सम्पन्न होती है, इस चुनाव में जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात है वह यह है कि चाहे लोकसभा का चुनाव द्वारा प्रधानमंत्री को चुनना ही या ग्राम पंचायत के चुनाव द्वारा ग्राम प्रधान को इसमें मुख्य भूमिका जनता की ही होती है।

देखने लायक बात यह है कि करोड़ों की जनसंख्या होने के बावजूद चुनाव प्रक्रिया कुछ दिनों में ही संपन्न हो जाती है जिसका कारण है भारत के चुनाव में EVM का प्रयोग।

सबसे महत्वपूर्ण वाली बात है कि चुनावी प्रक्रिया मतदाता सूची, उम्मीदवारों का नामांकन,EVM द्वारा मतदान से होते हुए, मतगणना और परिणाम कुछ ही दिनों में घोषित होने तक चलती है।

EVM केवल इस पूरी व्यवस्था का एक हिस्सा है। इसके साथ VVPAT, Mock Poll, Randomization, Strong Room, उम्मीदवारों की निगरानी और मतगणना जैसी प्रक्रियाएं भी जुड़ी हैं।

भारत के चुनाव में एक विकल्प जो कुछ दशकों से प्रारम्भ हुआ है वह है NOTA अर्थात नागरिक को अगर कोई उमीदवार को मत देना नहीं चाहता है तो वह NOTA जैसे विकल्प को चुन सकता है।

FAQ: (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q.1. भारत में चुनाव कौन कराता है?

A. भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनावों का संचालन Election Commission of India (ECI) यानी भारत निर्वाचन आयोग करता है। यह एक संवैधानिक संस्था है।

Q.2. भारत में चुनाव कैसे होते हैं?

A. चुनाव प्रक्रिया मतदाता सूची से शुरू होती है। इसके बाद चुनाव कार्यक्रम, नामांकन, नामांकन की जांच, नाम वापसी, चुनाव प्रचार, मतदान, मतगणना और परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया होती है।

Q.3. EVM क्या है?

A. EVM यानी Electronic Voting Machine एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जिसका इस्तेमाल मतदाता का वोट रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से Ballot Unit और Control Unit होती हैं।

Q.4. EVM में वोट कैसे दर्ज होता है?

A. मतदान अधिकारी द्वारा वोटिंग की अनुमति मिलने के बाद मतदाता Ballot Unit पर अपने पसंदीदा उम्मीदवार के सामने बटन दबाता है। इसके बाद वोट EVM में रिकॉर्ड हो जाता है।

Q.5. VVPAT क्या है?

A. VVPAT का पूरा नाम Voter Verifiable Paper Audit Trail है। यह मतदाता को अपने वोट की पुष्टि करने के लिए एक पेपर स्लिप दिखाता है, जिसमें उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिह्न दिखाई देता है।

आप से सवाल :

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