Indian Political System: भारत की राजनीतिक व्यवस्था क्या है और लोकतंत्र कैसे काम करता है?

 Indian Political System Explained – भारत की राजनीतिक व्यवस्था

भारत की राजनीतिक व्यवस्था और भारतीय लोकतंत्र की प्रमुख विशेषताएं
भारत की राजनीतिक व्यवस्था को आसान भाषा में समझें—संविधान, संसद, सरकार, चुनाव और न्यायपालिका की भूमिका


भारत को विश्व में सबसे बड़ा लोकतंत्र का दर्जा प्राप्त है, लोकतंत्र की जड़ें भारत में इतनी गहरी है कि कुछ शास्त्रों और धार्मिक ग्रंथों में लोकतांत्रिक व्यवस्था का संदर्भ मिलता।

अतः जब बात indian politics की बात आती है तो लोकतंत्र का अर्थ केवल राजनीतिक दलों के बारे में जानने तक सीमित नहीं होता। बल्कि भारत के उन रणनीतिक व्यवस्था का अध्ययन होता है जहां लोकतंत्र और राजतंत्र दोनों शासन पद्धति काम करती थी।

वर्तमान Indian Political System Explained के अंतर्गत संविधान, संसद, कार्यपालिका, न्यायपालिका, चुनाव आयोग, केंद्र और राज्य सरकारें, राजनीतिक दल तथा नागरिक सभी का अध्ययन महत्वपूर्ण हो जाता है।

भारत के राजनीति में लोकतंत्र का अर्थ है भारत का शासन का अंतिम बागड़ोर जनता के हाथों में है, अर्थात जनता के द्वारा जनता के लिए जनता पर शासन।

अर्थात जनता द्वारा चुना गया प्रतिनिधि ही सरकार गठन करके भारत की जनता के लिए शासन व्यवस्था का संचालन करता है। इन प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने के लिए संविधान का गठन किया गया। जो भारत की शासन व्यवस्था को सुचारू ढंग से संचालित करने के लिए दिशा निर्देशित करता है।

यह संविधान सरकार की सीमाएं तय करता है, नागरिकों का अधिकार की रक्षा करता है और राज्य सरकार और केंद्र सरकार की शक्तियों का विभाजन भी करता है।



भारत में, संविधान क्या है ?


भारत में संविधान संग्रहित कानून और नियमों का वह लिखित आधार है जिससे भारत की शासनिक प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से गतिशील होती है।

संविधान शासनिक प्रशासनिक व्यवस्था का ढांचागत प्रारूप है। इस ढांचे के अंतर्गत राज्य की कानून और नियम निर्देशित होते हैं। संविधान द्वारा सरकार की संरचना, शक्तियां, नागरिकों के अधिकार और शासन और प्रशासन का अंतः संबंध स्थापित होता है।

भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। इसी दिन भारत एक गणराज्य बना।

संविधान की प्रस्तावना के अंतर्गत वर्णन किया गया है कि भारत एक संप्रभु, समाजवादी लोकतांत्रिक गणराज्य है। यह न्याय स्वतंत्रता समानता तथा बांधता जैसे मूल आदर्शों के स्तंभों पर खड़ा है।

संविधान की प्रतिलिपियों में नागरिको के मूल अधिकार, राष्ट्र और समाज के प्रति कर्तव्य, राज्य के नीति निर्देशक तत्व और मौलिक कर्तव्य का वर्णन किया गया है।

अतः जब प्रश्न यह किया जाता है कि भातर की राजनीतिक व्यवस्था क्या है तो उसके उत्तर संविधान से आरम्भ होता है। भारत का संविधान नियम और कानून के संगठित लिखित संरचना है।

भारत में लोकतंत्र कैसे काम करता है?

भारत का लोकतंत्र प्रतिनिधि आधारित राजनीतिक व्यवस्था है, जिसका मतलब है जनता खुद अपने ऊपर शासन नहीं करती बल्कि अपनी प्रतिनिधि का चुनाव करती है जो दल आधारित होती है यही दल मिलकर सरकार का गठन करता है।

उदाहरण के लिए, लोकसभा चुनाव में मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुनते हैं। जिस राजनीतिक दल या गठबंधन को लोकसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त होता है, वह सरकार बनाने की स्थिति में आता है।

सरकार के गठन के बाद सांसदों द्वारा अपना नेता चुना जाता है जो भारत का प्रधानमंत्री होता है। प्रधानमंत्री के चुनाव होने के बाद प्रधानमंत्री द्वारा सांसदों के सुझाव अनुसार मंत्रीप्रसाद का निर्माण किया जाता है । अर्थात प्रधानमंत्री अपने कार्यों का विभाजन अन्य चुने गए मंत्रियों में विभाजित करते हैं।


भारत में लोकतंत्र कैसे काम करता है? | जनता से सरकार तक

भारत में लोकतंत्र की प्रक्रिया दर्शाता इंफोग्राफिक, जिसमें जनता, मतदान, प्रतिनिधि, संसद या विधानसभा, सरकार, नीतियां और कानून के बीच संबंध दिखाया गया है।
भारत में लोकतंत्र की प्रक्रिया: जनता → मतदान → प्रतिनिधि → संसद/विधानसभा → सरकार → नीतियां और कानून → जनता।


लोकतंत्र की प्रक्रिया को सरल रूप में इस तरह समझ सकते हैं:

🇮🇳 भारत में लोकतंत्र कैसे काम करता है?
👥 जनता
🗳️ मतदान
👤 प्रतिनिधि
🏛️ संसद / विधानसभा
⚙️ सरकार
📜 नीतियां और कानून
👥 जनता
लोकतंत्र की मजबूत नींव: स्वतंत्र चुनाव राजनीतिक प्रतिस्पर्धा कानून का शासन नागरिक अधिकार


भारतीय राजनीतिक व्यवस्था के प्रमुख अंग

भारतीय राजनीतिक प्रणाली को समझने के लिए इसके प्रमुख संस्थानों को समझना आवश्यक है।

1. राष्ट्रपति

भारत का राष्ट्रपति एक संवैधानिक पद है। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह भारत का संवैधानिक प्रमुख है। इस व्यवस्था में सांसदों के द्वारा नियमप्रस्तावित किया जाता है परंतु राष्ट्रपति के राय के बाद ही वह नियम संवैधानिक प्रक्रिया में मान्य होता है।

राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं, बल्कि एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति संविधान के अनुसार विभिन्न संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हैं।

2. प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद

भारतीय नागरिकों के द्वारा चुना गया दल के सांसदों द्वारा चुना गया प्रमुख नेता भरता का प्रधानमंत्री होता है। यह केंद्र सरकार का प्रमुख भी होता है।

प्रधानमंत्री द्वारा मंत्रिपरिषद का गठन किया जाता है जो सरकार के प्रतिदिन के कार्य में सहयोग करते हैं।

लोक सभा में प्रधानमंत्री का पद की स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार गठन में शामिल दल का बहुमत होना और बहुमत वाले दल के प्रधानमंत्री को समर्थन होना जरूरी होता है 

3. संसद

सांसद का तात्पर्य है कि वह कार्य स्थल जहां जनता के प्रतिनिधि मिलकर नियमों पर चर्चा या नियमों को पारित करते हैं।

भारत का शासनिक व्यवस्था संसद आधारित है, जिसमें दो सदन होते हैं लोक सभा और राज्य सभा।

लोक सभा अर्थात जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों का सदन है, राज्य सभा में राज्य और केंद्र आधारित विधायिका द्वारा और कुछ मनोनीत सदस्यों का सदन है।

संसद का प्रमुख कार्य कानून बनाना, बजट और वित्तीय मामलों पर विचार करना तथा सरकार से जवाब मांगना है।

4. न्यायपालिका

भारत के शासन व्यवस्था के तीन स्तंभ विधायिका कार्यपालिका और स्वतंत्र न्यायपालिका प्रशासनिक कार्यों की विभिततापूर्ण विभाजन को दर्शाता है।

स्वतंत्र न्यायपालिका संविधान में वर्णित प्रमुख स्तंभ है, न्यायपालिका में सर्वोच्च स्थान उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) का है इसके नीचे राज्यवर उच्च न्यायालय, और जिला न्यायालय दीवानी और फौजदारी न्यायालय आते हैं।

न्यायपालिका संविधान की व्याख्या करती है और नागरिकों के कानूनी अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। न्यायिक समीक्षा के माध्यम से अदालतें यह भी जांच सकती हैं कि सरकारी कार्रवाई या कानून संवैधानिक सीमाओं के अनुरूप है या नहीं।

केंद्र और राज्य सरकारों की भूमिका:

भारत में शासन व्यवस्था केवल केंद्र सरकार के द्वारा ही संचालित नहीं होता बल्कि संविधान ने राज्य सरकार को भी पर्याप्त और स्पष्ट अधिकार दिया हुआ है।

राज्यों में भी लोकतांत्रिक सरकार होती है। राज्य स्तर पर राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जबकि मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद सरकार के दैनिक कामकाज का नेतृत्व करते हैं।

राज्य विधानसभाएं राज्य के विषयों से संबंधित कानून बनाती हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, कृषि और स्थानीय प्रशासन जैसे अनेक विषयों में राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, हालांकि अलग-अलग विषयों पर केंद्र और राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारियां अलग होती हैं।

इसके अतिरिक्त पंचायत और नगर निकाय जैसे स्थानीय स्वशासन संस्थान लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुंचाते हैं।

चुनाव आयोग की भूमिका:

भारत में चुनाव कराने की संवैधानिक जिम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग की है। आयोग लोकसभा, राज्य विधानसभाओं तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों से संबंधित निर्वाचन प्रक्रिया का प्रशासन करता है।

चुनाव भारतीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक हैं। मतदाता मतदान के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों को चुनते हैं और राजनीतिक दल जनता के सामने अपनी नीतियां और कार्यक्रम रखते हैं।

केंद्र और राज्य सरकारों की भूमिका

भारत में शासन केवल केंद्र सरकार द्वारा नहीं चलता। भारत एक संघीय व्यवस्था वाला देश है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संवैधानिक विभाजन है।

राज्यों में भी लोकतांत्रिक सरकार होती है। राज्य स्तर पर राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख होते हैं, जबकि मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद सरकार के दैनिक कामकाज का नेतृत्व करते हैं।

राज्य विधानसभाएं राज्य के विषयों से संबंधित कानून बनाती हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, कृषि और स्थानीय प्रशासन जैसे अनेक विषयों में राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, हालांकि अलग-अलग विषयों पर केंद्र और राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारियां अलग होती हैं।

इसके अतिरिक्त पंचायत और नगर निकाय जैसे स्थानीय स्वशासन संस्थान लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुंचाते हैं।

भारतीय चुनावों के महत्वपूर्ण आंकड़े

📊
भारतीय लोकतंत्र के प्रमुख आंकड़े
लोकसभा चुनाव 2024 और पिछले चुनावों के महत्वपूर्ण आंकड़े
आंकड़ा
संख्या / प्रतिशत
2024 लोकसभा चुनाव में कुल पंजीकृत मतदाता
97,97,51,847
2024 लोकसभा चुनाव में महिला मतदाता
47,63,11,240
2024 लोकसभा चुनाव में महिला मतदाताओं का हिस्सा
48.62%
2024 लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत
66.10%
2019 लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत
67.40%
2014 लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत
66.44%
2024 में लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र
543

भारतीय चुनावों के महत्वपूर्ण आंकड़े | लोकसभा चुनाव 2024
भारतीय चुनावों के महत्वपूर्ण आंकड़े, लोकसभा चुनाव 2024 में मतदाता संख्या, महिला मतदाता, मतदान प्रतिशत और 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की जानकारी
लोकसभा चुनाव 2024 और पिछले चुनावों के प्रमुख आंकड़े — स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग (ECI)

📊 भारत में लोकतांत्रिक भागीदारी
लोकसभा चुनावों में मतदाता मतदान प्रतिशत
1951-52
45.67%
1977
60.49%
2004
58.07%
2014
66.44%
2019
67.40%
2024
66.10%
📌 मुख्य आंकड़ा: 2024 में लोकसभा चुनाव का मतदान प्रतिशत 66.10% रहा।
स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग (ECI), Lok Sabha Elections 2024 Atlas

यह आंकड़े बताते हैं कि भारतीय लोकतंत्र में करोड़ों नागरिक चुनावी प्रक्रिया में भाग लेते हैं।

राजनीतिक दलों की भूमिका

भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक दल जनता और सरकार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं।

राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं, उम्मीदवार खड़े करते हैं, घोषणापत्र जारी करते हैं और विभिन्न नीतियों के बारे में जनता के सामने अपना दृष्टिकोण रखते हैं।

चुनाव के बाद बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन सरकार बना सकता है। दूसरी ओर, विपक्षी दल सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं और वैकल्पिक नीतियां प्रस्तुत करते हैं।

इसलिए मजबूत लोकतंत्र के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि सशक्त विपक्ष और सक्रिय नागरिक समाज भी महत्वपूर्ण हैं।

मौलिक अधिकार और नागरिकों की भूमिका

भारतीय संविधान नागरिकों को कई मौलिक अधिकार प्रदान करता है। इनमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता तथा संवैधानिक उपचार का अधिकार जैसे महत्वपूर्ण अधिकार शामिल हैं।

लेकिन लोकतंत्र केवल अधिकारों पर आधारित नहीं है। नागरिकों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।

मतदान करना, कानून का सम्मान करना, सार्वजनिक मुद्दों पर जागरूक रहना, तथ्यों की जांच करना और लोकतांत्रिक संवाद में भाग लेना एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका का हिस्सा है।

आज सोशल मीडिया के दौर में नागरिकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। राजनीतिक जानकारी तेजी से फैलती है, लेकिन गलत सूचना भी तेजी से फैल सकती है। इसलिए लोकतांत्रिक भागीदारी के साथ सूचना की विश्वसनीयता की जांच करना आवश्यक है।

भारत की राजनीतिक व्यवस्था की विशेषताएं

भारतीय राजनीतिक प्रणाली की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

संविधान की सर्वोच्चता:

भारतीय राजनीति में भारतीय संविधान को सर्वोच्च शक्ति प्राप्त है, विधायिका, न्यापालिका और कार्यपालिका तीनों को संविधान का अनुसरण करना पड़ता है।

प्रतिनिधि लोकतंत्र:

भारतीय शासन व्यवस्था में जनता के द्वारा चुना गया प्रतिनिधि ही ससरकार का गठन करता है।

संसदीय शासन प्रणाली:

भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली में संसद के द्वारा सरकार का गठन किया जाता है जो भारत की शासन व्यवस्था का संचालन करता है।

संघीय ढांचा और केंद्र-राज्य संबंध:

भारत के लोकतांत्रिक प्रणाली में केंद्र और राज्य सरकार के शक्तियां अलग अलग प्रदान किया गया है संविधान के सीमावर्ती सूची में केंद्र और राज्य सरकार के शक्तियां स्पष्ट रूप से विभाजित की गई है।

स्वतंत्र न्यायपालिका:

भारत के संविधान के तीन स्तंभ विधायिका कार्यपालिका और न्यायपालिका में न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से कार्य करती है।

नियमित चुनाव:

भारतीय संसदीय कार्यप्रणाली में हर 5 वर्षों के बाद वर्तमान सरकार का कार्यकाल समाप्त हो जाता है और नए चुनावी प्रक्रिया के तहत चुनाव बाद नई सरकार का गठन होता है ।

बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था:

भारतीय राजनीतिक चुनावी प्रक्रिया बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था पर आधारित है। अर्थात भारत में चुनावी प्रक्रिया में दो से अधिक दल समलित होते हैं।

मौलिक अधिकारों की संवैधानिक सुरक्षा:

भारत के नागरिकों को संविधान द्वारा मौलिक अधिकार और सुरक्षा प्रदान किया गया है ।

स्वतंत्र निर्वाचन व्यवस्था:

भारत के संविधान द्वारा निर्वाचन आयोग को निर्वाचन प्रक्रिया को संचालित करने का स्वतंत्र शक्ति प्रदान किया गया है।

स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था:

भारत के संविधान में स्थानिक विकास हेतु नगरपालिका और ग्राम पंचायत जैसे स्थानीय शासन व्यवस्था का प्रवधान है।

इन विशेषताओं के कारण भारतीय लोकतंत्र एक विशाल और बहुस्तरीय राजनीतिक व्यवस्था के रूप में काम करता है।

भारतीय लोकतंत्र के सामने प्रमुख चुनौतियां:

भारतीय लोकतंत्र के कुछ विशेषताएं के साथ कुछ चुनौतियां भी है।
चुनावी प्रक्रिया में बहुत खर्च , चुनावी ध्रुवीकरण, फेक न्यूज, मुफ्त योजनाएं जैसे अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाले चुनावी वादें, बाहुबलियों को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर प्रश्न चिन्ह खड़े करते हैं।

इन चुनौतियों का निवारण केवल सरकार या प्रशासनिक संस्थाओं द्वारा नहीं किया जा सकता, इन कमियों को दूर करने के लिए नागरिकों को स्वयं आगे आना होगा।

लोकतंत्र के मूल्यों का सुरक्षा तभी संभव है जब शासन और प्रशासन को पोषित करने वाली संस्थाएं भ्रष्टाचार रहित हों। नागरिक जितना जागरूक होंगे इन संस्थाओं की मजबूती उतनी बढ़ती जाएगी।

भारत के लोकतंत्र का सांख्यिकीय चित्र

भारतीय चुनावी इतिहास में  चुनावी प्रकिया में मतदाताओं की भागीदारी में लसमय समय पर निरंतर बदलाव देखने को मिला है। 

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार 1951-52 के पहले लोकसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत 45.67% था। 2014 में यह 66.44%, 2019 में 67.40% और 2024 में 66.10% रहा।

इसी अवधि में मतदाताओं की संख्या में भी बहुत बड़ा विस्तार हुआ। 1951-52 में लगभग 17.32 करोड़ मतदाता थे, जबकि 2024 में यह संख्या लगभग 97.98 करोड़ हो गई।

इन आंकड़ों की वृद्धि केवल जनसांख्यिकी विस्तार भर नहीं है, बल्कि यह अकड़े भारत के चुनावी प्रक्रिया के विस्तार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के भागीदारी का पैमाने को भी दर्शाता है।

📊
भारतीय चुनावी इतिहास के प्रमुख आंकड़े
मतदान प्रतिशत और पंजीकृत मतदाताओं की संख्या
🗳️ लोकसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत
1951-52
45.67%
2014
66.44%
2019
67.40%
2024
66.10%
👥 पंजीकृत मतदाताओं की संख्या
1951-52
17.32 करोड़
पहले लोकसभा चुनाव
2024
97.98 करोड़
लगभग 5.7 गुना विस्तार
📈
मुख्य निष्कर्ष

1951-52 में लगभग 17.32 करोड़ मतदाताओं से बढ़कर 2024 में संख्या लगभग 97.98 करोड़ हो गई। इसी अवधि में मतदान प्रतिशत भी 45.67% से बढ़कर 2024 में 66.10% रहा।

स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के चुनावी आंकड़े


निष्कर्ष:

भारत में संविधान, संसद, कार्यपालिका, न्यायपालिका, चुनाव आयोग, राजनीतिक दल और नागरिकों की भूमिका या सारे तत्व मिलकर Indian Political System का निर्माण करते हैं 

इस political System में नागरिकों की भूमिका अहम है क्योंकि नागरिकों के द्वारा चुना गया प्रतिनिधि ही भारतीय राजनीति में सरकार का गठन करता है।

इस शासन व्यवस्था में सांसद द्वारा कानून का निर्माण होता है, यही कानून सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाता है। प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद द्वारा शासन का संचालन होता है।

वहीं न्यायपालिका संसद द्वारा निर्मित कानून का व्याख्या करती है और चुनाव आयोग समय समय पर चुनावी प्रक्रिया का आयोजन करता है।

सरल शब्दों में कहें तो भारत की राजनितिक व्यवस्था संविधान आधारित ल 9लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था है।

जिसमें जनता द्वारा चुनी गई सरकार के द्वारा संविधान का निर्माण होता है, जिसका अनुसरण संसद, कार्यपालिका, न्यायपालिका और संसदीय मंत्रिपरिषद को करना होता है।


FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

Q.1. भारत की राजनीतिक व्यवस्था क्या है?

A. भारत की राजनीतिक व्यवस्था एक संवैधानिक लोकतांत्रिक, संसदीय और संघीय व्यवस्था है। देश का शासन भारतीय संविधान के अनुसार चलता है और नागरिक चुनावों के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।

Q.2. भारत में लोकतंत्र कैसे काम करता है?

A. भारत में नागरिक मतदान करके अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। निर्वाचित प्रतिनिधि संसद या विधानसभा में कानून और नीतियों से जुड़े निर्णय लेते हैं। सरकार इन कानूनों और नीतियों को लागू करती है तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जवाबदेह रहती है।

Q.3. भारत के राजनीतिक तंत्र के प्रमुख अंग कौन-कौन से हैं?

A. भारत की राजनीतिक व्यवस्था के प्रमुख अंगों में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका शामिल हैं। इसके अलावा चुनाव आयोग और केंद्र-राज्य सरकारें भी लोकतांत्रिक शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

Q.4. भारत के संविधान का राजनीतिक व्यवस्था में क्या महत्व है?

A.भारतीय संविधान देश का सर्वोच्च कानूनी ढांचा है। यह सरकार की शक्तियों, नागरिकों के अधिकारों, केंद्र और राज्यों के संबंधों तथा शासन की संस्थाओं की भूमिका निर्धारित करता है।

Q.5. भारत में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की क्या भूमिका है?

A. राष्ट्रपति भारत के संवैधानिक प्रमुख होते हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद केंद्र सरकार के दैनिक शासन और नीतिगत कार्यों का संचालन करती है।

आप से सवाल 

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