प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2026: किसानों को कैसे मिलेगा लाभ, सब्सिडी, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया

PMKSY Irrigation Scheme India 2026

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रिप सिंचाई करते किसानq
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाने में मदद करती है।

भारत जैसे कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में भारतीय किसान आज भी सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर है। पानी कृषि का सबसे पहतवपूर्ण घटक है। और मानसून की प्रतिकूलता कृषि के उत्पादन को एकदम से गिरा देती है ।

इस समस्या को दूर करने के लिए भारत सरकार द्वारा 1 जुलाई 2015 से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) की शुरुआत किया गया।

इस योजना का लाभ 2026 आते आते धरातल पर दिखना शुरू हो गया है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि PMKSY योजना क्या है, इसके घटक क्या हैं, और 2026 में किसान इस योजना के तहत ड्रिप सिंचाई सब्सिडी और अन्य लाभ कैसे प्राप्त कर सकते हैं।

Data Snippet: PMKSY Overview

विवरण तथ्य/आंकड़े
लॉन्च तिथि 1 जुलाई 2015
मुख्य नारा Har Khet Ko Pani & Per Drop More Crop
बजट आवंटन (2025-26) ₹8,259.85 करोड़
माइक्रो-इरिगेशन कवरेज 96.83 लाख हेक्टेयर (अगस्त 2025 तक)
लाभार्थी किसान 50 लाख से अधिक


प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना क्या है?

प्रधानमंत्री कृषि योजना सिंचाई संबंधित विभिन्न योजनाओं के समुह है जिसमें वर्तमान में प्रारंभ की गईं योजनाएं भी समलित है।

इसमें त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP), एकीकृत वाटरशेड प्रबंधन कार्यक्रम (IWMP) और ऑन-फार्म जल प्रबंधन (OFWM) जैसी योजनाओं का समावेश किया गया है ।

यह योजना केवल पानी को खेतों तक पहुंचाने मात्र तक समिति नहीं है बल्कि पानी का उचित उपयोगिता दक्षता और प्रबंधन की क्षमता बढ़ाना भी है।

यह जल संचय और जल सिंचन के माध्यम से सूक्ष्म स्तर पर वर्षा जल के दोहन पर ध्यान केंद्रित करती है ।

भारत सरकार का ध्यान 2026 में सिंचाई इन्फ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और नए उपकरणों का प्रयोग पर है।

योजना के मुख्य घटक

PMKSY योजना के चार मुख्य स्तंभ हैं, जो सिंचाई के विभिन्न पहलुओं को कवर करते हैं:

1. हर खेत को पानी (Har Khet Ko Pani - HKKP)

हर खेत को पानी योजना का लक्ष्य देश के प्रत्येक कृषि क्षेत्र को सिंचाई का सुनिश्चित स्रोत प्रदान करना है । इसके अंतर्गत सतही लघु सिंचाई, जल निकायों की मरम्मत, बहाली और नवीनीकरण (RRR) तथा भूजल विकास जैसे कार्य किए जाते हैं ।

अर्थात भू जल से सिंचाई, पुराने और प्रयोग में न आने वाले सिंचाई के माध्यम को पुनर्जीवित करना आदि कार्य इसके अंतर्गत आते हैं।

2. Per Drop More Crop (PDMC)

यह घटक "सूक्ष्म सिंचाई पर केंद्रित है। Per Drop More Crop के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाता है ।

इसका उद्देश्य कम पानी में अधिक फसल उत्पादन सुनिश्चित करना और पानी की बर्बादी को 40-50% तक कम करना है ।

3. त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (AIBP)

इसका मुख्य उद्देश्य अधूरी पड़ी बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना है । वर्ष 2021-26 के दौरान सरकार ने इसके तहत 60 प्रमुख परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

4. वाटरशेड विकास (Watershed Development)

यह वर्षा आधारित क्षेत्रों में मिट्टी और नमी संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करता है। इसमें वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं ।

किसानों को मिलने वाले लाभ

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से किसानों को बहुआयामी लाभ प्राप्त होते हैं:

बढ़ी हुई फसल पैदावार: 

सुनिश्चित सिंचाई से फसलों की गुणवत्ता और पैदावार में 20-50% तक की वृद्धि होती है।

पानी की बचत:

बढ़ती हुई जनसंख्या और औद्योगिकरण ने पानी की खपत को बड़ा दिया है। जिससे भू जल की कमी कई जगहों पर महसूस की जाने लगी है।

इसी को ध्यान में रखते हुए जो पारंपरिक सिंचाई की तुलना में सूक्ष्म सिंचाई तकनीकें 50% तक पानी बचाती हैं उसका उपयोग किया जा रहा है।

लागत में कमी:

सिंचाई के आधुनिक उपकरणों और तकनीकी से लगत और श्रम दोनों की बचत होती है, साथ ही उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होती है 

आय में वृद्धि:

बेहतर उत्पादन और कम लागत के कारण किसानों की शुद्ध आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है ।

जलवायु लचीलापन:

यह योजना किसानों को सूखे जैसी स्थितियों से निपटने और बदलती जलवायु के प्रति अनुकूल होने में मदद करती है।

ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तकनीक

PMKSY योजना के तहत आधुनिक तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया है:

ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation)

इसमें पानी को पाइपों के माध्यम से सीधे पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद करके पहुँचाया जाता है । यह तकनीक बागवानी फसलों और सब्जियों के लिए अत्यंत प्रभावी है । इसमें वाष्पीकरण और पानी का बहाव कम से कम होता है।

स्प्रिंकलर सिंचाई (Sprinkler Irrigation)

इसमें पानी को हवा में छिड़का जाता है, जो प्राकृतिक वर्षा की तरह फसलों पर गिरता है । यह तकनीक उन फसलों के लिए उपयुक्त है जहाँ पानी की आवश्यकता मध्यम होती है और जमीन ऊबड़-खाबड़ होती है।

2026 में सिंचाई क्षेत्र में नई तकनीक और विकास

Smart Irrigation Technology in India 2026

smart irrigation technology and fertigation system in Indian agriculture 2026
नई तकनीकों जैसे स्मार्ट फर्टिगेशन, ड्रिप सिंचाई और डिजिटल मॉनिटरिंग से भारत में सिंचाई प्रणाली अधिक कुशल बन रही है।


2026 में सिंचाई क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रगति देखी गई है:

1. कमांड एरिया आधुनिकीकरण (M-CADWM):

अप्रैल 2025 में, कैबिनेट ने कमांड क्षेत्रों में जल प्रबंधन में सुधार के लिए ₹1,600 करोड़ की मंजूरी दी ।

2.डिजिटल मॉनिटरिंग:

सरकार ने मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किए हैं जो किसानों को सिंचाई कार्यों की रीयल-टाइम जानकारी प्रदान करते हैं।

3.बड़े प्रोजेक्ट्स का समय पर पूरा होना:

उत्तराखंड में  जमराणी बांध बहुउद्देशीय परियोजना जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम तेजी से चल रहा है, जिससे 2028 तक 57,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी ।

4.स्मार्ट फर्टिगेशन:

अब सिंचाई प्रणालियों के साथ उर्वरकों को सीधे जड़ों तक पहुँचाने की उन्नत मशीनों का उपयोग बढ़ रहा है ।

योजना के लिए पात्रता

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लाभ लेने के लिए निम्न पात्रता शर्तें पूरी होनी चाहिए:

नागरिकता:

आवेदक अनिवार्य रूप से भारतीय नागरिक होना चाहिए ।

किसान की श्रेणी: 

सभी श्रेणियों के किसान (लघु, सीमांत और अन्य) इस योजना के पात्र हैं।

स्वयं सहायता समूह और समितियाँ: 

सहकारी समितियाँ, स्वयं सहायता समूह (SHG), और ट्रस्ट भी योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं ।

भूमि स्वामित्व: 

किसान के पास कृषि योग्य भूमि होनी चाहिए (चाहे वह स्वयं की हो या पट्टे पर ली गई हो) ।

पानी का स्रोत: 

किसान के पास सिंचाई के लिए एक सुनिश्चित जल स्रोत (बोरवेल, कुआं या नहर कनेक्शन) होना आवश्यक है ।

आवश्यक दस्तावेज

आवेदन के समय किसानों को निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होगी :

1. आधार कार्ड:

पहचान सत्यापन और DBT लाभ के लिए अनिवार्य।

2. भूमि के दस्तावेज:

खतौनी या पट्टा (Revenue Records) का दस्तावेज होना आवश्यक है।

3. बैंक खाता विवरण:

सब्सिडी सीधे खाते में जमा करने के लिए।

4. पासपोर्ट साइज फोटो:

आवेदन करने के लिए आवेदक के पास अपना पासपोर्ट साइज फोटो होना चाहिए।

5. जाति प्रमाण पत्र: 

यदि लागू हो (SC/ST किसानों को प्राथमिकता मिलती है) ।

6. निवास प्रमाण पत्र:

आवेदक जहां का रहने वाला है वहां का निवास प्रमाण पत्र होना चाहिए।

7. जल स्रोत का प्रमाण

आवेदक के पास उस जल स्रोत का प्रमाण पत्र होना चाहिए जिसके लिए इस योजना में आवेदन कर रहा है।

आवेदन प्रक्रिया

PMKSY योजना के लिए आवेदन करने के चरण निम्नलिखित हैं :

1. निकटतम कार्यालय से संपर्क: 

किसान अपने ब्लॉक या जिला कृषि कार्यालय, या ग्राम पंचायत से संपर्क कर सकते हैं ।

2.ऑनलाइन पोर्टल:

किसान अपने राज्य के विशिष्ट कृषि पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं।

3. फॉर्म भरना: 

योजना का आधिकारिक फॉर्म भरें और आवश्यक दस्तावेजों को स्व-प्रमाणित करके संलग्न करें ।

4. क्षेत्र सत्यापन (Field Verification):

आवेदन के बाद, कृषि विभाग के अधिकारी भूमि और जल स्रोत का भौतिक सत्यापन करेंगे ।

5. तकनीकी अनुमोदन और स्थापना:

सत्यापन के बाद, सूचीबद्ध वेंडरों के माध्यम से सिंचाई प्रणाली स्थापित की जाएगी ।

6. सब्सिडी हस्तांतरण:

प्रणाली की स्थापना और अंतिम जांच के बाद, ड्रिप सिंचाई सब्सिडी सीधे किसान के बैंक खाते में (DBT के माध्यम से) जमा कर दी जाएगी ।

नोट: किसान अधिक जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटर के टोल-फ्री नंबर 1800-180-1551 पर भी कॉल कर सकते हैं ।

PMKSY में किसानों को कितनी सब्सिडी मिलती है

सब्सिडी और फंडिंग संरचना (Subsidy Structure)

PMKSY के तहत किसानों को मिलने वाली वित्तीय सहायता इस प्रकार है:

  • लघु एवं सीमांत किसान: कुल लागत का 55% सब्सिडी।
  • अन्य किसान: कुल लागत का 45% सब्सिडी।
  • फंडिंग शेयर (केंद्र : राज्य):
    • सामान्य राज्य: 60:40
    • उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्य: 90:10
    • केंद्र शासित प्रदेश: 100% केंद्र सरकार द्वारा
  • अधिकतम सीमा: सब्सिडी प्रति लाभार्थी अधिकतम 5 हेक्टेयर भूमि के लिए दी जाती है।
 

भारत में सिंचाई का महत्व

भारत में सिंचाई केवल फसल उगाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है । 54% से अधिक कृषि भूमि ऐतिहासिक रूप से असिंचित रही है, जिससे किसान मानसून पर निर्भर रहते थे ।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना ने इस निर्भरता को कम किया है। उचित सिंचाई से न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करती है, जैसे सिंचाई प्रणालियों की स्थापना और रखरखाव ।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री मंत्री कृषि सिंचाई योजना 2026 ने किसानों को आधुनिक खेती की ओर बढ़ने और किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Per drop More crops अर्थात हर बूंद उत्पादन को बढ़ाने में मददगार हो योजना ने एक प्रेरणा का काम कर रहा है कि पानी की बर्बादी न हो और पानी की हर बूंद फसल उत्पादन को बढ़ाए।

यदि आप एक किसान हैं और अभी तक इस योजना से नहीं जुड़े हैं, तो आज ही आवेदन करें और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाकर अपनी खेती को लाभप्रद बनाएं।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q.1. PMKSY योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

A.इसका मुख्य उद्देश्य "हर खेत को पानी" पहुँचाना और सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से जल उपयोग दक्षता में सुधार करना है।

Q.2. ड्रिप सिंचाई सब्सिडी कितनी मिलती है?

A.लघु और सीमांत किसानों को 55% और अन्य किसानों को 45% तक सब्सिडी मिलती है।

Q.3. क्या किराए की जमीन पर खेती करने वाले किसान भी पात्र हैं?

A.हाँ, खेती करने वाले किसान (चाहे मालिक हों या पट्टेदार) योजना के पात्र हैं ।

Q.4. योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड क्यों जरूरी है?

A.सब्सिडी राशि सीधे बैंक खाते में जमा (Direct Benefit Transfer - DBT) करने के लिए आधार अनिवार्य है ।

Q.5. क्या मैं योजना के तहत अधिकतम कितनी भूमि कवर कर सकता हूँ?

A.एक लाभार्थी किसान अधिकतम 5 हेक्टेयर भूमि के लिए सब्सिडी प्राप्त कर सकता है ।

विश्वसनीय स्रोत 

आईबीएफ

Micro Irrigation & Scheme Components

Irrigation Benefits & Water Efficiency

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