जूनून क्या है
जूनन मन का एक भावनात्मक अवस्था है जो व्यक्ति को किसी कार्य को किसी भी अवस्था में परिणाम कल्पना किये बीना बार बार करने को प्रेरित करता है। जूनून को सेल्फ मोटीवेशन की अवस्था भी कहा जा सकता है।
जब किसी अच्छे उदेश्य हेतु जूनून की भावना हो तो जूनून एक पॉज़िटिव परीणाम प्रदान करता है।जब जूनून गलत कार्य के लिए हो तो ग़लत परिणाम देता है।
कहने को अर्थ है जूनून एक मानसिक विकृत है मन की भावना है।मन की भावना का परिणाम विकिरित फल प्रदान करता है। अध्यात्म में मन एक बाधक है संप्रुनता को प्राप्त करने में अतः मन के द्वरा जन्म लेने वाली भानवों का भी सक्रत्मक परिणाम नहीं है।
परन्तु सामाजिक जीवन में जोनून का उपयोग किया जा सकता सक्रत्मक कार्य हेतु। अध्यात्मिक की पूर्णता प्राप्त होने के पश्चात मन विलुप्त हो जाता है।मन के अनुपस्थित में भी परिर्णम की कल्पना किए बिना भी कार्य किया जा सकता है। परंतु वह जूनून ना हो कर सेल्फ मोटीवेशन है अर्थात आत्मा द्वारा निर्देशित कार्य।
जूनून एक मानसिक विकार
जूनून एक नकारात्मक ऊर्जा है जिसमें अस्थिरता के भाव,अपूर्ण होने के भाव होता है जिसके परणामस्वरूप व्यक्ति हठ धर्मी हो कर किसी कार्य को करता है जिसे हम जूनून का नाम दे सकते है।जूनून में हमेशा नकारात्मक कार्य होता है जिसका परिणाम नकारात्मक होता है हो सकता है व्यक्ति सफल हो कार्य में जो उसके लिए लाभकारी हो परन्तु अंततः परिणाम नकारात्मक ही होगा।
सेल्फ मोटीवेशन प्रेरक तत्व
सेल्फ mitiveton एक सरत्मक ऊर्जा है जिसमे व्यक्ति पूरे होश में स्थीर मानसिक अवस्था में लगन पूर्वक कार्य को निस्पदित करता है। बीना परीणाम के डर के जो कार्य होश पूर्वक निष्पादित किया जाता है वो सेल्फ मोटीवेशन के द्वारा ही निस्पादीत होता है। सेल्फ मोटीवेशन आध्यात्मिकता का लक्षण है।
ध्यान की चरम स्थिति प्राप्त करने के बाद न डर होता है ना चिंता मात्र कार्य को निष्पादित करने का लगन शेष रहता है।ध्यान की चरम अवस्था में मन स्थीर हो जाता है अतः व्यक्ति जीवन को एक नाटक के पात्र के रूप में जीता है।अर्थात व्यक्ति करता ना हो कर साधन होता है पात्र होता है कर्म का घटनाओं का।
सेल्फ मोटीवेशन को कैसे बड़नए
संकल्प के द्वारा सेल्फ मोटीवेशन को बढ़ाया जा सकता है। संकल्प अर्थात किसी कार्य को निष्पादित करने को पूर्व निर्धारण तपश्चात किसी भी अवस्था में उस कार्य को निष्पादित करना संकल्प कहलाता है।।
जरूरी नहीं की संकल्प बड़े लिए जाय छोटे छोटे संकल्प के द्वारा भी शुरुआत की जा सकती है। आप संकल्प कर सकते है की 10 मिनट तक शीशे में देखते रहेंगे और इस कार्य को पूरा कर सकते है।
यकीन मनीये ये 10 मिनट भी आप के लिए कठिन हो जाएगा।कारण यह है की मन अस्थीर होता है और10 मिनट स्थीर होना कठीन कर देगा मन ,मन की यही पविर्ती है । परन्तु ये कार्य किया जा सकता है। धीरे धीरे बड़े संकल्प ले सकते है और उसको पूरा कर सकते है।
संकल्प के द्वारा ही सेल्फ मोटीवेशन को प्राप्त किया जा सकता है। संकल्प ध्यान की एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा ध्यान में जय जा सकता है।
जूनून वाले व्यक्तियों के लक्षण
जोनूनी व्यक्ति को पहचाना मुश्किल है साधारण व्यक्ति भी जुनूनी हो सकता है। जूनून वाले व्यक्ति प्रयह एकाग्रचित्त, एकाकी व्यक्तित्व वाले होते है।सेल्फ मोटिवेटेड व्यक्ति भी जुनूनी व्यक्ति जैसे ही होता है।
जूनून और सेल्फ मोटीवेशन समान अर्थ वाले शब्द है अन्तर मात्र इतना है की सेल्फ मोटीवेशन होश पूर्वक होता है। जूनून अस्थिर चीत के द्वरा होता है।
जूनून के लाभ
थका देने वाला आजकल की दौड़ भरी जिंदगी में सेल्फ मोटीवेशन ही वह तत्व है जो व्यक्ति को निरन्तर कार्य करने की ऊर्जा प्रदान करता है। सेल्फ मोटीवेशन व्यक्ति को अपने कार्य के प्रति ईमानदार होने की प्रेरणा श्रोत है।
सेल्फ मोटीवेशन वह जूनून ही है जो सभी कार्य में असफल अब्राहम लिंकन को एक दिन अमेरिका के सफ़ल राष्ट्रपति के रूप में मान्यता प्रदान किया है।सेल्फ मोटिवेटेड व्यक्ति असंभव कार्य को भी आसानी से कर देता है।
अंत में बस इतना कहना सही होगा की जूनून एक विचारों का बार बार होने वाला प्रवाह है जिसमे व्यक्ति उस विचार को क्रियावनित होने के प्रति उद्वेलित होता है
जूनून की प्राथमिक लक्षण है चिंता किसी कार्य को करने की चिंता विचारों को मन में बार बार प्रवाहित करता है जो मन में जोनून को जन्म देती है। अतः सेल्फ मोटिवेटेड बने जुनूनी नहीं।
लेखक
प्रभु नाथ।
एक स्वतंत्र विश्लेषक
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