Semiconductor Supply Chain में भारत की भूमिका 2026
Semiconductor Supply Chain में भारत की बढ़ती भूमिका Chip Design, Manufacturing, Packaging और Testing से Global Supply Chain तक।क्या आप जानते है जो सेमीकंडक्टर आज की तकनीकी का प्रमुख तत्व है भारत सरकार के द्वारा इस उद्योग के उन्नति लिए विशेष प्रावधान किया गया है?
बात जब कंप्यूटर या हवाई जहाज की की जाय सेमीकंडक्टर का बहुत बड़ा महत्व होता है। इस सेमीकंडक्टर पर ताईवान जैसे देशों का एकाधिकार रहा है।
परन्तु जब दुनिया में भू आर्थिक व भू राजनीतिक उथल पुथल का दौर है भरता इस विशेष तत्व के लिए आत्म निर्भर होने के लिए प्रयासरत है।Semiconductor Supply Chain में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण होने वाली है।
Semiconductor Supply Chain क्या है और इसमें भारत की क्या भूमिका है?
Semiconductor Supply Chain सिलिकॉन शोधन से लेकर चिप डिज़ाइन, वेफर फैब्रिकेशन (Fab), असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग (ATMP/OSAT) तथा अंतिम वितरण की एक अति-जटिल और वैश्विक प्रक्रिया है।
भारत की भूमिका: भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर डिज़ाइन में 20% कार्यबल के साथ अग्रणी भूमिका निभा रहा है [3-5]।
India Semiconductor Mission (ISM) के तहत ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के 12 विनिर्माण प्रोजेक्ट्स स्वीकृत किए गए हैं।
वहीं ₹1,27,500 करोड़ के Semicon 2.0 प्रोग्राम के जरिए भारत वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प के रूप में उभर रहा है।
सेमीकंडक्टर और ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) क्या है?
"ग्लोबल सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन दुनिया की सबसे जटिल और अत्यधिक विशिष्ट औद्योगिक प्रणालियों में से एक है। इसमें कोई भी एक देश पूरी वैल्यू चेन पर एकाधिकार नहीं रखता:
चिप डिज़ाइन:
अमेरिका और भारत का वर्चस्व है।
हाई-एंड फैब्रिकेशन (Fabs):
ताइवान (TSMC) और दक्षिण कोरिया (Samsung) आगे हैं।
इक्विपमेंट और लिथोग्राफी:
नीदरलैंड (ASML), जापान और अमेरिका का नियंत्रण है।
कच्चा माल व केमिकल्स:
जापान और चीन का प्रभुत्व है।
पैकेजिंग और टेस्टिंग (ATMP/OSAT):
ताइवान, चीन, और दक्षिण-पूर्व एशियाई देश केंद्रित हैं।
हालिया वैश्विक संकटों और भू-राजनीतिक तनावों ने इस सप्लाई चेन की संवेदनशीलता को उजागर किया है, जिससे भारत जैसे विश्वसनीय लोकतांत्रिक देशों के लिए नए द्वार खुले हैं।
चिप निर्माण की पूरी प्रक्रिया: Design से Distribution तक:
एक सेमीकंडक्टर चिप के बनने की प्रक्रिया अत्यधिक उन्नत और बहु-चरणीय होती है, जिसे मुख्य रूप से निम्नलिखित चरणों में बांटा जाता है:
1.चिप डिजाइन (Chip Design):
इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन ऑटोमेशन (EDA) सॉफ़्टवेयर का उपयोग करके चिप का आर्किटेक्चर और लॉजिक तैयार किया जाता है।
2.वेफर फैब्रिकेशन (Wafer Fabrication):
अति-शुद्ध सिलिकॉन से बेलनाकार 'इंगोट' बनाए जाते हैं, जिन्हें पतली वेफर्स (Wafers) में काटा जाता है।
फैब्रिकेशन प्लांट (Fab) के भीतर क्लीनरूम वातावरण में फोटोलिथोग्राफी (Photolithography), इचिंग (Etching) और आयन इम्प्लांटेशन के सैकड़ों चरणों के माध्यम से अरबों ट्रांजिस्टर उकेरे जाते हैं।
3.असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग (ATMP / OSAT):
निर्मित वेफर्स को व्यक्तिगत डाइस (Dies) में काटा जाता है। पैकेजिंग चिप को बाहरी क्षति से बचाती है और सर्किट बोर्ड से जोड़ती है। इसके बाद गुणवत्ता और प्रदर्शन की सटीक जांच (Testing) की जाती है।
4.वितरण और उपयोग (Distribution & Integration):
तैयार चिप्स को ऑटोमोटिव, स्मार्टफोन, डेटा सेंटर, रक्षा और चिकित्सा उपकरणों में असेंबल करने के लिए भेजा जाता है।
भारत की वर्तमान सेमीकंडक्टर भूमिका और India Semiconductor Mission (ISM):
भारत लंबे समय से वैश्विक चिप डिजाइनिंग का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन विनिर्माण क्षेत्र में भारत की उपस्थिति सीमित थी। इस स्थिति को बदलने और रणनीतिक आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए भारत सरकार ने नीतिगत कदम उठाए हैं:
Semicon India Programme 1.0 (Semicon 1.0)
दिसंबर 2021 में ₹76,000 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ "Semicon India Programme" लॉन्च किया गया।
इसके तहत भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर फैब्स, डिस्प्ले फैब्स, कंपाउंड सेमीकंडक्टर/OSAT इकाइयों और चिप डिज़ाइन के लिए 50% तक वित्तीय सहायता (Fiscal Support) देने का प्रावधान किया।
Semicon India Programme 2.0 (Semicon 2.0)
जुलाई 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹1,27,500 करोड़ के परिव्यय के साथ Semicon 2.0 को मंजूरी दी।
इसके अलावा, केंद्रीय बजट 2026–27 में ISM 2.0 के लिए शुरुआती ₹1,000 करोड़ का आवंटन किया गया।
Semicon 2.0 के 6 मुख्य स्तंभ (Pillars):
1.डिजाइन (Design):
स्वदेशी IP Cores और फुल-स्टैक चिप डिजाइन का विकास।
2.मशीनें और सामग्री (Machines & Materials):
उपकरण, स्पेशलिटी केमिकल्स और गैसों का स्वदेशी विनिर्माण।
3.नए फैब्स (Setting up Fabs):
4.उन्नत पैकेजिंग (Advanced ATMP/OSAT):
3D और एडवांस्ड पैकेजिंग तकनीकों को बढ़ावा देना।
5.अनुसंधान और विकास (R&D):
28nm से आगे 3nm/2nm उन्नत नोड्स पर वैश्विक केंद्रों के साथ शोध।
6. प्रतिभा विकास (Talent Development):
1 लाख से अधिक कुशल इंजीनियर्स का निर्माण।
भारत की सेमीकंडक्टर भूमिका और India Semiconductor Mission (ISM) – Semicon 2.0
भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति: Semicon India Programme 1.0 से Semicon 2.0 तक और आत्मनिर्भर चिप निर्माण की दिशा में भारत की पहल।भारत में प्रमुख सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स, निवेश और विनिर्माण क्षमता:
India Semiconductor Mission (ISM) के तहत अब तक ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के कुल निवेश वाले 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से कई में वाणिज्यिक उत्पादन (Commercial Production) शुरू हो चुका है :
1.Tata Electronics Fab (धोलेरा, गुजरात):
₹91,526 करोड़ के निवेश से ताइवान की PSMC के साथ साझेदारी में भारत का पहला वाणिज्यिक सिलिकॉन फैब स्थापित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता 50,000 वेफर स्टार्ट प्रति माह (WSPM) होगी।
2.Tata Electronics Packaging (मोरीगांव, असम):
स्वदेशी पैकेजिंग तकनीकों के साथ ₹27,120 करोड़ के निवेश से OSAT प्लांट, जिसकी क्षमता 48 मिलियन यूनिट्स प्रति दिन होगी।
3.Micron Technology (साणंद, गुजरात):
₹22,516 करोड़ के निवेश से DRAM और NAND प्रोडक्ट्स के लिए ATMP यूनिट (क्षमता: 14 मिलियन यूनिट्स प्रति सप्ताह)। यहां वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो चुका है।
4.CG Power OSAT (साणंद, गुजरात):
Renesas (USA/Japan) और STARS Microelectronics (Thailand) के साथ जॉइंट वेंचर में ₹7,584 करोड़ का निवेश (क्षमता: 15.07 मिलियन यूनिट्स प्रति दिन)। वाणिज्यिक उत्पादन शुरू।
5.Kaynes Semicon (साणंद, गुजरात):
₹3,307 करोड़ के निवेश से वायर बॉन्ड और सबस्ट्रेट आधारित पैकेजिंग यूनिट (क्षमता: 6.33 मिलियन चिप्स प्रति दिन)। वाणिज्यिक उत्पादन शुरू।
6.VSIPL / Foxconn (उत्तर प्रदेश):
₹3,706 करोड़ के निवेश से डिस्प्ले ड्राइवर ICs (DDIC) हेतु यूनिट (क्षमता: 20K वेफर्स/माह या 36 मिलियन चिप्स/माह)।
7.3D Glass Solutions (ओडिशा):
₹1,943 करोड़ का निवेश, 3D हेटेरोजेनियस इंटीग्रेशन और ग्लास इंटरपोजर तकनीक।
8.SiCSem (ओडिशा):
Clas-SiC Wafer Fab के साथ ₹2,066 करोड़ का निवेश, सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) फैब व पैकेजिंग (5,000 वेफर्स/माह।
9.CDIL (मोहाली, पंजाब):
₹117 करोड़ के विस्तार से हाई-पावर डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर डिवाइसेस (158.38 मिलियन यूनिट्स/वर्ष) का उत्पादन शुरू ।
10.ASIP Technologies (आंध्र प्रदेश):
APACT Co. Ltd (दक्षिण कोरिया) के साथ ₹480 करोड़ का OSAT प्लांट ।
11.Crystal Matrix (धोलेरा, गुजरात) एवं Suchi Semicon (सूरत, गुजरात):
नए स्वीकृत कंपाउंड फैब एवं OSAT प्रोजेक्ट्स।
Semiconductor Design, Packaging, R&D और Talent Development में भारत की भूमिका:
Semiconductor Design, Packaging, R&D और Talent Development में भारत की निम्नलिखित भूमिका है:
चिप डिजाइन में नेतृत्व (Design Leadership):
भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन कार्यबल के लगभग 20% हिस्सा का प्रतिनिधित्व करता है और दुनिया के 7% सेमीकंडक्टर Global Capability Centres (GCCs) की मेजबानी करता है।
स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर (Indigenous Microprocessors):
Digital India RISC-V (DIR-V) प्रोग्राम के तहत भारत ने स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर विकसित किए हैं:
DHRUV64:
C-DAC द्वारा विकसित 64-बिट स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर।
SHAKTI, AJIT, VIKRAM, THEJAS:
विक्रम प्रोसेसर का उपयोग ISRO के रॉकेट और सैटेलाइट लॉन्च वाहनों में किया जाता है।
भारत दुनिया के कुल माइक्रोप्रोसेसर उत्पादन का लगभग 20% उपभोग करता है।
डिजाइन और टैलेंट पहल (Incentives & Skilling):
Design Linked Incentive (DLI) Scheme:
इसके तहत 24 स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता दी गई है, जिनमें से 14 ने ₹650 करोड़ से अधिक की वेंचर कैपिटल फंडिंग जुटाई है।
EDA टूल्स का लोकतंत्रीकरण:
315 से अधिक विश्वविद्यालयों और 100 से अधिक स्टार्टअप्स को मुफ्त EDA टूल्स प्रदान किए गए हैं, जिनका उपयोग 200 लाख घंटे से अधिक हो चुका है।
Chips to Startup (C2S) प्रोग्राम:
320 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों में 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया गया है।
वैश्विक कौशल साझेदारियां:
Lam Research के साथ मिलकर Semiverse प्लेटफॉर्म द्वारा 10 वर्षों में 60,000 भारतीय इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
प्रमुख क्षेत्रों में सेमीकंडक्टर का महत्व:
प्रमुख क्षेत्रों में सेमीकंडक्टर का महत्व निम्नलिखित है:
1.ऑटोमोटिव और ई-मोबिलिटी (Automotive & EVs):
इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), ADAS, और इंजन कंट्रोल यूनिट्स में पावर सेमीकंडक्टर्स (SiC/GaN) की अत्यधिक खपत होती ह।
2.उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स व IT हार्डवेयर:
स्मार्टफोन्स, लैपटॉप्स और स्मार्ट वियरेबल्स के लिए प्रोसेसिंग चिप्स अनिवार्य हैं।
3. दूरसंचार और 5G/6G:
नेटवर्क बुनियादी ढांचे और टावरों के लिए हाई-स्पीड संचार चिप्स की आवश्यकता होती है [68, 69]।
4. AI और डेटा सेंटर:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल ट्रेनिंग और सोवरेन कंप्यूटिंग के लिए एडवांस्ड जीपीयूस (GPUs) और मेमोरी चिप्स (DRAM/NAND) रीढ़ है।
5. रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान:
SCL मोहाली द्वारा निर्मित रेडिएशन-हार्डेंड चिप्स का उपयोग चंद्रयान-3 के लैंडर कैमरा और आदित्य-L1 सौर मिशन में किया गया है ।
6. **अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy):** सोलर इनवर्टर और स्मार्ट पावर ग्रिड प्रबंधन में डिस्क्रीट डिवाइसेस महत्वपूर्ण हैं [18, 53, 69
]।
वैश्विक संदर्भ: Taiwan, South Korea, USA और China के मुकाबले भारत की स्थिति:
भारत बनाम Taiwan, South Korea, USA और China: सेमीकंडक्टर में भारत की स्थिति
वैश्विक सेमीकंडक्टर दौड़ में भारत की स्थिति: Taiwan, South Korea, USA और China की प्रमुख ताकतों के मुकाबले भारत का बढ़ता semiconductor ecosystem।Global Supply-Chain Diversification में भारत की संभावित भूमिका:
कोरोना महामारी और भू-राजनीतिक तनावों के बाद वैश्विक टेक कंपनियां जोखिम कम करने के लिए "China+1" और Pax Silica जैसी पहलों के तहत सप्लाई चेन में विविधीकरण (Diversification) कर रही हैं।
भारत इस बदलाव का सीधा लाभार्थी है:
द्विपक्षीय साझेदारियां:
भारत ने अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU), जापान, सिंगापुर, जर्मनी और नीदरलैंड्स के साथ सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन रीजिलियंस पर MoUs किए हैं।
विश्वसनीय लोकतांत्रिक भागीदार:
भारत का पारदर्शी नीतिगत ढांचा, बौद्धिक संपदा (IP) सुरक्षा और स्थिर कारोबारी माहौल इसे अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए पसंदीदा बनाता है।
सांख्यिकी डाटा (India Semiconductor Key Data
):
Visual Chart Data Representation (Responsive Bar Chart Dataset)
नीचे दिया गया डेटा भारत के सेमीकंडक्टर बाजार की वृद्धि (USD Billion में) को दर्शाता है, जिसे इंफोग्राफिक या बार चार्ट में प्रदर्शित किया जा सकता है:
भारत के Semiconductor Market की Growth
Indian Semiconductor Market — USD Billion
भारत की प्रमुख चुनौतियां (Key Challenges):
भारत की उपलब्धियों के बावजूद सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कई गंभीर चुनौतियां बनी हुई हैं:
1.अत्यधिक पूंजी और लंबी अवधि (Capital Intensity):
एक आधुनिक फैब स्थापित करने में \$5–\$10 बिलियन का खर्च आता है और इसे पूर्ण क्षमता तक पहुंचने में 4–6 साल लगते हैं।
2.एडवांस्ड नोड टेक्नोलॉजी (Advanced Nodes Gap):
भारत वर्तमान में 28nm से 110nm जैसे परिपक्व नोड्स (Mature Nodes) से शुरुआत कर रहा है। 3nm या 2nm जैसे अत्याधुनिक नोड्स तक पहुंचना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है।
3.उपकरण और कच्चे माल की निर्भरता:
लिथोग्राफी मशीनें, सिलिकॉन वेफर्स, स्पेशलिटी केमिकल्स और उच्च-शुद्धता वाली गैसों के लिए भारत पूरी तरह से आयात पर निर्भर है।
4.बुनियादी ढांचा (Power, Water & Logistics):
सेमीकंडक्टर फैब्स को प्रति दिन लाखों लीटर अल्ट्रा-प्योर वाटर (UPW) और बिना एक सेकंड के रुकावट के निर्बाध बिजली की आवश्यकता होती है।
अगले 5–10 वर्षों के अवसर और भावी राह (Roadmap 2030–2035)
अगले 5–10 वर्षों के अवसर और भावी राह निम्नलिखित है:
2029 तक लक्ष्य:
भारत में 70–75% घरेलू अनुप्रयोगों (Domestic Applications) के लिए आवश्यक चिप्स का स्वदेशी डिजाइन और विनिर्माण हासिल करना।
2030 तक लक्ष्य:
घरेलू चिप बाजार को \$100–\$110 बिलियन तक पहुंचाना।
2035 तक लक्ष्य:
भारत को दुनिया के शीर्ष सेमीकंडक्टर राष्ट्रों में स्थापित करना और \$200 बिलियन के बाजार को संभालना।
3nm/2nm नोड्स का रोडमैप:
Semicon 2.0 के अंतर्गत उन्नत नोड्स और रिसर्च सेंटर्स के लिए दीर्घकालिक रोडमैप तैयार किया गया है ।
निष्कर्ष :
India Semiconductor Mission (ISM) 1.0 और 2.0 के माध्यम से भारत ने केवल नीतिगत इरादे से निकलकर जमीनी विनिर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है।
ताइवान, अमेरिका और दक्षिण कोरिया जैसे स्थापित वैश्विक दिग्गजों के साथ रणनीतिक साझेदारियां करते हुए, भारत खुद को "China+1" रणनीति के तहत एक पारदर्शी और विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित कर रहा है।
साणंद (गुजरात), मोरीगांव (असम), और धोलेरा में शुरू हुए प्रोजेक्ट्स इस बात का प्रमाण हैं कि भारत अब सिर्फ चिप्स का डिजाइनर ही नहीं, बल्कि वैश्विक विनिर्माण का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।
📚 स्रोत (Sources)
FAQs:(अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):
Q1. Semiconductor Supply Chain क्या है?
उत्तर: सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन सिलिकॉन निष्कर्षण, चिप डिजाइन, वेफर फैब्रिकेशन, असेंबली, पैकेजिंग, टेस्टिंग (ATMP/OSAT) और अंतिम इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में एकीकरण की वैश्विक प्रक्रिया है ।
Q2. ISM (India Semiconductor Mission) क्या है?
उत्तर: ISM भारत सरकार की एक नोडल एजेंसी है, जो देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण हेतु नीतियों, वित्तीय प्रोत्साहनों और प्रोजेक्ट्स का क्रियान्वयन करती है।
Q3. भारत में chip manufacturing क्यों जरूरी है?
उत्तर: आयात निर्भरता (जो प्रति वर्ष अरबों डॉलर है) को कम करने, राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने, 5G/AI/ऑटोमोटिव क्षेत्रों को सुरक्षित करने और उच्च-मूल्य वाले रोजगार पैदा करने के लिए चिप विनिर्माण आवश्यक है।
Q4. ATMP/OSAT क्या है?
उत्तर: ATMP (Assembly, Testing, Marking and Packaging) और OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) प्रक्रियाएं निर्मित चिप वेफर्स को सुरक्षित पैकेजिंग और परीक्षण प्रदान करती हैं ताकि वे इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में उपयोग हो सकें।
Q5. Semiconductor Design में भारत की क्या भूमिका है?
उत्तर: भारत दुनिया के 20% सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियरों का घर है और DLI योजना के तहत स्वदेशी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देकर आईपी (IP) और माइक्रोप्रोसेसर (जैसे DHRUV64) विकसित कर रहा है।
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